आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे एक युग का अंत बताया और भारत-ईरान के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला।
अपने पोस्ट में सिंह ने लिखा कि जिनके पूर्वज भारत से हैं, उनके लिए अयातुल्ला खुमैनी का ईरान का सर्वोच्च नेता बनना एक युग का अंत है। भारत ने एक भरोसेमंद दोस्त खो दिया है। खुमैनी जी को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। ईरान भारत का पारंपरिक सहयोगी रहा है। इसने हमेशा पाकिस्तान के खिलाफ मतदान किया है और भारत का साथ दिया है। इसने भारत को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने आगे कहा कि संकट की इस घड़ी में, भारत सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए, अन्यथा वैश्विक तानाशाह अमेरिका का अत्याचार पूरी दुनिया में फैल जाएगा।
इस बीच, ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान में 40 दिनों का सार्वजनिक शोक मनाया जा रहा है। शनिवार को अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हमलों (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी/लायंस रोर) के बाद उनका निधन हुआ। देश के सर्वोच्च नेता के कार्यालय ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, जिसके तहत झंडे आधे झुके रहेंगे और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सार्वजनिक सभाओं का आयोजन किया जाएगा। यह इस्लामी गणराज्य के इतिहास के 37 साल के एक अध्याय के समापन का प्रतीक है।
अयातुल्ला खामेनेई क्रांति के संस्थापक रुहोल्लाह खुमैनी के उत्तराधिकारी थे। 1989 से उनका "गद्दा" पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ अटूट प्रतिरोध का प्रतीक रहा है। अधिकारियों ने अशांति को रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे देश में, विशेष रूप से तेहरान जैसे प्रमुख शहरों में, सुरक्षा बढ़ा दी है। खामेनेई के उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया पर सबकी नज़र है, संभावित उम्मीदवारों और ईरान के भावी नेतृत्व पर इसके प्रभाव को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
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अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक गर्ल्स स्कूल पर हमला हुआ जिसमें कम से कम 148 छात्राओं की मौत हो गई। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने यह दावा किया है कि यह हमला मिनाब शहर में शनिवार को किया गया है। यह हमला उस बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा था जिसे अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई इलाकों में अंजाम दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले के दौरान स्कूल पर बम गिरा जिससे वहां पढ़ने वाली छात्राओं की मौके पर ही मौत हो गई। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, मीनाब के शजारेह तैय्येबेह गर्ल्स प्राइमरी स्कूल में मृतकों की संख्या बढ़कर 148 हो गई है और 95 घायल हुए हैं। मृतकों में से अधिकतर 7 से 12 वर्ष की आयु वर्ग की थीं।
इन हमलों में ईरान के कई अहम ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। शुरुआती हमले में सुप्रीम लीडर अयुतुल्लाह अल खेमेनाई से जुड़े दफ्तरों के पास राजधानी तेहरान में कई जगह धमाके सुने गए और आसमान में धुएं के गुब्बारे भी उठते दिखे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान में बड़े सैन्य अभियान शुरू हो चुके हैं और उन्होंने ईरानी जनता से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की भी अपील की थी। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजिमिन नेतन्याहू ने कहा कि यह कारवाई ईरानी लोगों को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का मौका देगी। इन हमलों के जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। साथ ही बहरीन, कुवैत और क़तर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया।
अबू धाबी में मिसाइल के मलबे से गिरने से एक व्यक्ति की मौत की खबर भी आ रही है। स्थिति बिगड़ने के बाद यूएई और इराक ने अपने हवाई क्षेत्र अस्थाई रूप से बंद कर दिए हैं। ईरान के विदेश मंत्री ने कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि देश अपनी रक्षा के लिए पूरी ताकत से जवाब देगा। यह संघर्ष पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंका को और गहरा करता जा रहा है।
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