Iran-Israel War: जंग के बीच भारत का बड़ा कदम, एस जयशंकर ने ईरान और इजरायल के विदेश मंत्रियों से की बात
Iran-Israel War: इस बातचीत में एस जयशंकर ने क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात को लेकर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा जल्द से जल्द तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब ईरान, इज़राइल और उनके सहयोगी देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है
इजराइल और ईरान की बढ़ती जंग ने क्यों बढ़ा दी है दुबई एयरपोर्ट की मुश्किलें, जानें क्या है होगा दुनिया पर असर?
मिडिल ईस्ट में छिड़े इजरायल-ईरान संघर्ष ने पूरी दुनिया के हवाई सफर को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां से आगे की राह बहुत मुश्किल लग रही है. इस जंग की वजह से दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक, दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कामकाज प्रभावित होना पूरे एविएशन सेक्टर के लिए किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है. सालों से दुबई को दुनिया के अलग-अलग कोनों जैसे यूरोप, एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया को जोड़ने वाला सबसे बड़ा केंद्र यानी धुरी माना जाता है.
हालात इतने खराब हैं कि दुबई की मुख्य एयरलाइन 'अमीरात' (Emirates) ने अपनी सभी उड़ानों को फिलहाल के लिए रोक दिया है. कई दूसरी बड़ी कंपनियों ने भी या तो अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं या फिर उनका रास्ता बदलकर उन्हें दूसरे हवाई अड्डों पर उतारा जा रहा है.
क्यों अहम है दुबई एयरपोर्ट?
दुबई एयरपोर्ट की अहमियत को इसके आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है. यह एयरपोर्ट दुनिया के 110 देशों के करीब 291 शहरों को आपस में जोड़ता है. बीते साल 2025 में यहां साढ़े नौ करोड़ से ज्यादा यात्रियों ने सफर किया है. इस साल 2026 में यह संख्या बढ़कर लगभग 10 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. काम के भारी बोझ का अंदाजा इस बात से लगाइए कि यहां से साल भर में साढ़े चार लाख से ज्यादा विमानों ने उड़ान भरी.
अगर हम इस साल के सबसे व्यस्त दिन यानी 3 जनवरी की बात करें, तो यहां से एक ही दिन में सवा तीन लाख से ज्यादा लोग गुजरे, जिसका सीधा मतलब है कि हर एक सेकंड में करीब चार यात्री यहां से निकल रहे थे. सिर्फ मुसाफिर ही नहीं, बल्कि दवाइयों और ऑनलाइन सामान की ढुलाई के लिए भी यह दुनिया का बहुत बड़ा केंद्र है जहां से हर साल 25 लाख टन माल इधर-से-उधर भेजा जाता है.
हवाई रास्तों में बदलाव से बढ़ेंगी मुश्किलें
अब सबसे बड़ी चुनौती हवाई रास्तों को लेकर खड़ी हो गई है. रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की वजह से कई एयरलाइंस पहले से ही रूस के ऊपर से उड़ान भरने से बच रही थीं, ऐसे में मिडिल ईस्ट का रास्ता ही यूरोप और एशिया के बीच सफर के लिए सबसे बड़ा सहारा बना हुआ था. अब जब यह रास्ता भी जंग की वजह से बंद हो गया है, तो लंबी दूरी के विमानों को काफी लंबा और महंगा रास्ता अपनाना पड़ रहा है.
जानकारों का कहना है कि रास्ता बड़ा होने से तेल का खर्च तो बढ़ेगा ही, साथ ही पायलटों और क्रू के काम करने के घंटों पर भी बोझ बढ़ेगा. इसका सीधा असर हवाई टिकटों के महंगे होने और उड़ानों के समय में होने वाली देरी के रूप में मुसाफिरों को झेलना पड़ सकता है.
दुनिया भर के एयरपोर्ट्स और कारोबार पर संकट
दुबई एयरपोर्ट के ठप होने का असर सिर्फ खाड़ी के देशों तक सीमित नहीं रहने वाला है. इससे लंदन के हीथ्रो, सिंगापुर के चांगी, इस्तांबुल और दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े हवाई अड्डों पर काम का दबाव अचानक बहुत ज्यादा बढ़ सकता है.
हालांकि, भौगोलिक स्थिति और सुविधाओं के मामले में दुबई जैसी कनेक्टिविटी देना किसी भी दूसरे एयरपोर्ट के लिए इतना आसान नहीं होगा. इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात का पूरा कारोबार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स काफी हद तक इसी एयरपोर्ट पर टिका है, जिस पर अब बुरा असर पड़ सकता है. पहले से ही कोरोना और रूस-यूक्रेन युद्ध की मार झेल रहे विमानन उद्योग के लिए यह नया संकट दुनिया भर की सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लंबे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है.
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