सात वर्षों में त्रिपुरा में फ्लोरीकल्चर क्षेत्र में 332 प्रतिशत की वृद्धि
अगरतला, 28 फरवरी (आईएएनएस)। त्रिपुरा में पिछले सात वर्षों के दौरान फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) के क्षेत्रफल में 332 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार की पहल और स्थानीय बाजारों में बढ़ती मांग के कारण किसानों की आय में भी इजाफा हुआ है।
मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 से राज्य में फूलों की खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है। बेहतर कीमत मिलने और मांग में निरंतर वृद्धि के चलते किसान पारंपरिक फसलों से हटकर फ्लोरीकल्चर की ओर रुख कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि फ्लोरीकल्चर एक अत्यंत लाभकारी क्षेत्र के रूप में उभरा है, जो किसानों को आय के नए अवसर प्रदान कर रहा है। हालांकि यह खेती हर जगह संभव नहीं है, लेकिन जहां परिस्थितियां अनुकूल हैं, वहां यह कृषि गतिविधियों में सबसे अधिक आय देने वाली फसलों में शामिल है।
मंत्री के अनुसार, पहले बिशालगढ़ जैसे क्षेत्रों में किसान सब्जी की खेती करते थे, लेकिन अब वे अधिक लाभ के लिए फूलों की खेती अपना रहे हैं। सरकार का उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन करना है। फूलों का उपयोग केवल सजावट के लिए ही नहीं, बल्कि होली के प्राकृतिक रंग, दवाइयों और इत्र निर्माण में भी होता है, जिससे इनकी मांग लगातार बनी रहती है।
त्रिपुरा की उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त वर्षा और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु विभिन्न प्रकार के फूलों की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। पारंपरिक किस्मों जैसे गेंदा, ग्लैडियोलस और गुलाब की खेती का क्षेत्र 2018-19 से अब तक 60 प्रतिशत बढ़ा है।
वहीं, उच्च तकनीक आधारित फ्लोरीकल्चर में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। एंथुरियम, ऑर्किड और जरबेरा जैसे फूल अब संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) के तहत सफलतापूर्वक उगाए जा रहे हैं। इस अवधि में हाई-टेक फ्लोरीकल्चर क्षेत्र में 124 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मंत्री ने बताया कि 200 वर्ग मीटर क्षेत्र में फूलों की खेती करने वाले किसान औसतन 10,000 रुपये से अधिक का मासिक लाभ कमा रहे हैं। स्थानीय बाजार में मजबूत मांग के कारण किसानों को अच्छी कीमत मिल रही है।
फ्लोरीकल्चर को मजबूती देने के लिए राज्य सरकार ने पश्चिम त्रिपुरा जिले के बदरघाट गार्डन में 400 वर्ग मीटर का आर्केडियम और 400 वर्ग मीटर का हार्डनिंग सेंटर स्थापित किया है। हाल ही में शुरू की गई इस सुविधा का नाम ‘सेंटर ऑफ फ्लोरीकल्चर एंड लैंडस्केपिंग’ रखा गया है। इसके निर्माण पर लोक निर्माण विभाग की सहायता से 4.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
इसके अलावा, लेम्बूचरा में 65 कानी भूमि पर केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन फ्लावर्स’ विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत ऑर्किड, एंथुरियम, जरबेरा, गुलाब, क्राइसेंथेमम और विभिन्न सजावटी पत्तेदार पौधों की खेती की जाएगी। साथ ही किसानों को प्रशिक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की आपूर्ति भी की जाएगी।
मंत्री ने आशा व्यक्त की कि इन पहलों से त्रिपुरा फ्लोरीकल्चर के उभरते केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगा और फूलों के उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।
--आईएएनएस
डीएससी
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ईरान-इजरायल युद्ध का असर, भारत ने 11 देशों के ऊपर से विमान उड़ाने पर लगाई रोक
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते टकराव और ईरान-इजरायल के बीच जारी जंग जैसे हालात को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे 11 देशों के ऊपर से उड़ान भरने से बचें. यह आदेश सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
कब तक लागू रहेंगे नियम?
DGCA द्वारा जारी यह नया सुरक्षा परामर्श (एडवायजरी) तुरंत लागू कर दिया गया है. फिलहाल यह रोक 2 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी. महानिदेशालय ने साफ किया है कि जब तक हालात में सुधार नहीं होता या नया आदेश नहीं आता, तब तक कंपनियों को इन इलाकों के हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) का इस्तेमाल नहीं करना है. यह कदम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और यूरोपीय विमानन एजेंसी के सुझावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है.
इन 11 देशों के ऊपर से नहीं उड़ेंगे विमान
सरकार ने जिन देशों के रास्ते का इस्तेमाल न करने को कहा है, उनकी सूची काफी लंबी है. डीजीसीए ने कहा है कि ईरान, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, बहरीन, ओमान और कतर जाने से बचना है. इन देशों के हवाई क्षेत्र में किसी भी ऊंचाई पर विमान उड़ाने की मनाही है. तनाव के कारण कई देशों ने तो अपना एयरस्पेस पहले ही बंद कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बुरा असर पड़ा है.
यात्रियों और उड़ानों पर क्या होगा असर?
इस पाबंदी के कारण भारतीय एयरलाइंस ने मिडिल ईस्ट जाने वाली अपनी कई उड़ानें कुछ समय के लिए रोक दी हैं. कई फ्लाइट्स के रास्ते बदले गए हैं (डायवर्ट) और कुछ को रद्द करना पड़ा है. सीधे रास्ते बंद होने से विमानों को घूमकर जाना होगा, जिससे सफर का समय बढ़ जाएगा. उड़ान का समय बढ़ने से तेल का खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा बोझ यात्रियों की जेब पर पड़ सकता है.
कंपनियां प्रभावित यात्रियों को टिकट के पैसे वापस करने या दूसरी तारीख पर यात्रा करने का विकल्प दे रही हैं. DGCA ने एयरलाइंस को लगातार पल-पल की जानकारी (NOTAM) पर नजर रखने को कहा है ताकि किसी भी तरह के खतरे से बचा जा सके. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी एयरलाइन की वेबसाइट पर उड़ान का स्टेटस जरूर चेक कर लें.
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