होली 2026 : कोल्ड ड्रिंक्स नहीं रंगों के त्योहार पर ट्राई करें ठंडई, घर पर ऐसे करें तैयार
नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। पूरे देश में 4 मार्च को रंगों का त्योहार होली मनाया जाएगा। इस दिन लोग रंग खेलने के साथ-साथ मिठाइयों और ठंडे पेय का भरपूर मजा लेते हैं। बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेट वाली ठंडई का क्रेज बहुत ज्यादा होता है, लेकिन इनमें चीनी की मात्रा ज्यादा होने के कारण ये सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
इनसे पेट में गड़बड़ी, वजन बढ़ना और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट्स और घरेलू नुस्खों के जानकार सलाह देते हैं कि होली पर घर में बनी पारंपरिक ठंडई का सेवन करें। यह न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि पूरी तरह सेहतमंद और एनर्जी से भरपूर भी होती है। घर की ठंडई में कोई कृत्रिम रंग, केमिकल या ज्यादा चीनी नहीं होती। इसके बजाय इसमें प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल होता है, जो शरीर को ठंडक देती है और त्योहार की थकान दूर करती है।
यह ठंडई बनाने में आसान है, और त्योहार के दिन परिवार के साथ मिलकर बनाना और भी मजेदार होता है। इसमें मौजूद बादाम, पिस्ता और मगज के बीज प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर होते हैं, जो एनर्जी देते हैं। सौंफ और इलायची पाचन को दुरुस्त रखते हैं, ठंडक प्रदान करती है और केसर मूड अच्छा करता है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है, बल्कि शरीर को भी फायदा पहुंचाती है।
ठंडई बनाने के लिए जरूरी सामग्री में सौंफ, खसखस, कालीमिर्च, इलायची, मगज के बीज (तरबूज, खरबूज, कद्दू के बीज), बादाम, काजू, पिस्ता, केसर, गुलाब की पत्तियां और चीनी शामिल होती है। इन सभी चीजों को साफ करके एक कटोरी में पानी डालकर 2-3 घंटे या रात भर भिगो दें। भिगोने से ये नरम हो जाती हैं और पीसना आसान होता है।
भिगोई हुई सामग्री को पानी से निकालकर मिक्सी में बारीक पीस लें। अगर जरूरत हो तो थोड़ा पानी और डालकर पेस्ट बना लें। अब एक बड़े जग में ठंडा दूध लें। इसमें यह पेस्ट अच्छे से मिलाएं। स्वाद के अनुसार चीनी या गुड़ भी मिला सकते हैं। अंत में इसमें कुछ गुलाब की पत्तियां, केसर के धागे और बर्फ के टुकड़े डालकर सर्व करें। चाहें तो ऊपर से कटे हुए बादाम, पिस्ता और काजू छिड़क दें, जिससे स्वाद और देखने में भी और अच्छे लगते हैं।
--आईएएनएस
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अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग का भारत पर क्या होगा असर, क्या बढ़ने वाली हैं तेल की कीमतें?
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर किए गए हालिया हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका जताई जा रही है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने की स्थिति में ब्रेंट क्रूड 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर जा सकता है. विशेषज्ञ इसे 'वार प्रीमियम' का असर मान रहे हैं, जो भू-राजनीतिक तनाव के दौरान कीमतों में अतिरिक्त तेजी लाता है.
भारत की ऊर्जा निर्भरता बनी चिंता
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 86 से 89 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. इनमें से करीब 45 से 50 प्रतिशत आपूर्ति सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आती है. इन देशों से आने वाला बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. ऐसे में अगर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है.
सूत्रों के अनुसार, फरवरी 2026 में भारत ने औसतन 52 से 55 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया. इसमें से लगभग आधा हिस्सा उसी समुद्री मार्ग से आया, जो वर्तमान तनाव का केंद्र है.
विविधीकरण की रणनीति और रूस फैक्टर
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई थी. एक समय रूस से आयात बढ़कर 35-40 प्रतिशत तक पहुंच गया था. हालांकि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और प्रतिबंधों के कारण यह हिस्सा घटकर करीब 22-23 प्रतिशत रह गया है. इसकी भरपाई के लिए खाड़ी देशों से आयात फिर बढ़ाया गया, जो मौजूदा संकट में जोखिमपूर्ण हो सकता है.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर रूस और अफ्रीकी देशों से अतिरिक्त खरीद पर विचार किया जा सकता है. रिफाइनरियों को वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों के लिए तैयार रहने को कहा गया है.
बाजार में पहले से दिख रहा असर
27 फरवरी को ब्रेंट क्रूड 72.87 से 73.19 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर है. पूरे फरवरी महीने में कीमतों में करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो कीमतों में और 10-15 प्रतिशत तक उछाल संभव है.
घरेलू कीमतों पर संभावित दबाव
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें पिछले तीन वर्षों से लगभग स्थिर रही हैं. 14 मार्च 2024 को आखिरी बार कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी. फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल लगभग 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.
यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो सरकार पर सब्सिडी और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है. साथ ही आयात बिल में वृद्धि, रुपये पर दबाव और महंगाई दर में इजाफा संभावित है.
सरकार की नजर हालात पर
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है. ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडार के उपयोग जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है. आने वाले सप्ताहों में वैश्विक घटनाक्रम यह तय करेगा कि तेल बाजार की दिशा क्या होगी और उसका भारत की अर्थव्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ेगा.
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