अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग का भारत पर क्या होगा असर, क्या बढ़ने वाली हैं तेल की कीमतें?
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर किए गए हालिया हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका जताई जा रही है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने की स्थिति में ब्रेंट क्रूड 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर जा सकता है. विशेषज्ञ इसे 'वार प्रीमियम' का असर मान रहे हैं, जो भू-राजनीतिक तनाव के दौरान कीमतों में अतिरिक्त तेजी लाता है.
भारत की ऊर्जा निर्भरता बनी चिंता
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 86 से 89 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. इनमें से करीब 45 से 50 प्रतिशत आपूर्ति सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आती है. इन देशों से आने वाला बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. ऐसे में अगर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है.
सूत्रों के अनुसार, फरवरी 2026 में भारत ने औसतन 52 से 55 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया. इसमें से लगभग आधा हिस्सा उसी समुद्री मार्ग से आया, जो वर्तमान तनाव का केंद्र है.
विविधीकरण की रणनीति और रूस फैक्टर
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई थी. एक समय रूस से आयात बढ़कर 35-40 प्रतिशत तक पहुंच गया था. हालांकि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और प्रतिबंधों के कारण यह हिस्सा घटकर करीब 22-23 प्रतिशत रह गया है. इसकी भरपाई के लिए खाड़ी देशों से आयात फिर बढ़ाया गया, जो मौजूदा संकट में जोखिमपूर्ण हो सकता है.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर रूस और अफ्रीकी देशों से अतिरिक्त खरीद पर विचार किया जा सकता है. रिफाइनरियों को वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों के लिए तैयार रहने को कहा गया है.
बाजार में पहले से दिख रहा असर
27 फरवरी को ब्रेंट क्रूड 72.87 से 73.19 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर है. पूरे फरवरी महीने में कीमतों में करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो कीमतों में और 10-15 प्रतिशत तक उछाल संभव है.
घरेलू कीमतों पर संभावित दबाव
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें पिछले तीन वर्षों से लगभग स्थिर रही हैं. 14 मार्च 2024 को आखिरी बार कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी. फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल लगभग 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.
यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो सरकार पर सब्सिडी और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है. साथ ही आयात बिल में वृद्धि, रुपये पर दबाव और महंगाई दर में इजाफा संभावित है.
सरकार की नजर हालात पर
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है. ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडार के उपयोग जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है. आने वाले सप्ताहों में वैश्विक घटनाक्रम यह तय करेगा कि तेल बाजार की दिशा क्या होगी और उसका भारत की अर्थव्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ेगा.
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फरहान-फखर की जोड़ी ने रचा इतिहास, टी20 वर्ल्ड कप में सबसे बड़ी साझेदारी का बनाया रिकॉर्ड
पल्लेकेले, 28 फरवरी (आईएएनएस)। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान की भिड़ंत श्रीलंका के साथ हो रही है। पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने 8 विकेट खोकर स्कोरबोर्ड पर 212 रन लगाए। पल्लेकेले इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में साहिबजादा फरहान और फखर जमान की सलामी जोड़ी ने शनिवार को इतिहास रच दिया। दोनों ने टी20 विश्व कप में किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी निभाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
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