Kartarpur Corridor फिर खोलने की मांग, CM Bhagwant Mann ने केंद्र से लगाई गुहार
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को केंद्र सरकार से करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलने और पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब में मत्था टेकने के लिए सिख श्रद्धालुओं की नियमित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की अपील की। मान ने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों को राजनीतिक विचारों से ऊपर रखा जाना चाहिए। श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना जरूरी है और धार्मिक आस्था को कभी भी राजनीतिक हितों की भेंट नहीं चढ़ने देना चाहिए।
करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलने की मांग से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा, “लोगों की आध्यात्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। धार्मिक आस्था के मामले में ओछी राजनीति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।” अगले महीने पाकिस्तान में होने वाले ‘विश्व पंजाबी सम्मेलन’ में शामिल होने के निमंत्रण को लेकर पूछे गए सवाल पर भगवंत मान ने कहा कि औपचारिक निमंत्रण मिलने पर उन्हें केंद्र सरकार से राजनीतिक मंजूरी लेनी होगी।
उन्होंने कहा कि इसके लिए वह केंद्र से अनुमति मांगेंगे। सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मान ने कहा, “दोनों देशों के लोग शांति चाहते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार होना चाहिए।” इससे पहले, पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने भी मंगलवार को राज्य विधानसभा सत्र के आखिरी दिन एक प्रस्ताव पेश करके केंद्र सरकार से करतारपुर साहिब गलियारे को फिर से खोलने की मांग की थी।
UAE जाने वाले भारतीयों के लिए Travel Insurance जरूरी, दूतावास ने जारी की एडवायजरी
भारत ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों को सलाह दी कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा ले लें। ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें भारतीयों को अचानक हुई बीमारी या इमरजेंसी के कारण भारी-भरकम मेडिकल बिल चुकाने पड़े हैं। दुबई में भारत के महावाणिज्य दूत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “यूएई की यात्रा या पर्यटन के उद्देश्य से जाने वाले सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले उचित स्वास्थ्य बीमा जरूर ले लें।” सलाह में कहा गया है कि बीमा में कैशलेस सुविधाएं भी शामिल होनी चाहिए, जिसमें किसी अप्रत्याशित आपाकतालीन चिकित्सा स्थिति में भारत वापस लाने (मेडिकल रिपैट्रिएशन) का खर्च भी शामिल हो।
भारतीय मिशन ने बताया कि अबू धाबी में भारतीय दूतावास और दुबई तथा उत्तरी अमीरात में महावाणिज्य दूतावास को ऐसे कई मामले मिले हैं, जिनमें भारतीय नागरिकों को आपात चिकित्सा स्थितियों का सामना करना पड़ा और इसके कारण उन्हें भारी-भरकम बिल चुकाने पड़े। इसमें कहा गया है कि ये बिल कभी-कभी “मरीज या उनके परिवार वालों की वहन करने की क्षमता से बाहर” होते थे, और इसका कारण अपर्याप्त बीमा कवरेज था। रोजगार वीजा पर या आश्रितों के रूप में संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे भारतीयों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि उनका चिकित्सा बीमा देश में सभी चिकित्सा खर्चों और भारत में चिकित्सा प्रत्यावर्तन को पर्याप्त रूप से कवर करता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








