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अफ्रीकी देश बोत्सवाना से लाए 9 चीते:इनमें 6 मादा, 3 नर, केंद्रीय वन मंत्री ने कूनो में छोड़ा; देश में कुनबा बढ़कर हुआ 48

एमपी के कूनो नेशनल पार्क में शनिवार सुबह 9 और चीते लाए गए। दक्षिण अफ्रीकी देश बोत्सवाना से 6 मादा और 3 नर चीता वायुसेना के विशेष विमान से पहले ग्वालियर, फिर हेलीकॉप्टर से कूनो नेशनल पार्क लाए गए। कूना में अब चीतों का कुनबा बढ़कर 45 और देश में 48 हो गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव सुबह विशेष विमान से ग्वालियर, फिर हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो पहुंचे। सुबह करीब 9:20 बजे उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से क्रेट का हैंडल घुमाकर दो चीतों को क्वारंटीन बाड़े में रिलीज किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई खेप में मादा चीतों की अधिक संख्या से कूनो में लिंगानुपात (Sex Ratio) बेहतर होगा, जिससे भविष्य में प्राकृतिक प्रजनन की संभावनाएं और प्रबल होंगी। जेनेटिक विविधता और संतुलन पर जोर जानकारों के मुताबिक, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना के चीतों के शामिल होने से कूनो में जेनेटिक विविधता (Genetic Diversity) और मजबूत होगी। कूनो में अब वयस्क चीतों की संख्या में 18 मादा और 16 नर शामिल हैं। सभी 9 चीतों को अगले एक महीने तक विशेष क्वारंटीन बाड़ों में विशेषज्ञों और डॉक्टरों की सख्त निगरानी में रखा जाएगा। तीन अलग-अलग देशों के चीतों का एक साथ होना इस प्रोजेक्ट की लंबी अवधि की सफलता के लिए निर्णायक साबित होगा। भारत में चीतों की वर्तमान स्थिति 2009 में हुआ कूनो का चुनाव भारत में वर्ष 1952 में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से ही चीतों को फिर से स्थापित करने की योजना चल रही थी। इसी उद्देश्य से सितंबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में चीता विशेषज्ञों की एक बैठक की गई थी। बैठक में चीता संरक्षण कोष के डॉ. लोरी मार्कर, स्टीफन जेओ ब्रायन और अन्य विशेषज्ञों ने दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की थी। पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर वर्ष 2010 में भारतीय वन्यजीव संस्थान (वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट) ने भारत में चीता पुनर्स्थापना के लिए संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया था, जिसमें कूनो को सबसे अनुकूल पाया गया। 10 स्थलों के सर्वेक्षण में मध्य प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य, कूनो पालपुर अभयारण्य एवं राजस्थान के शाहगढ़ को उपयुक्त पाया गया। इन तीनों में से भी कूनो अभयारण्य जो वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान है, सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया।

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काशी में जलती चिताओं की भस्म से होली:नरमुंड, चश्मा लगाकर आए संन्यासी, डमरू की गूंज, 3 लाख टूरिस्ट पहुंचे

जलती चिताएं, रोते-बिलखते लोग और चिता की राख से होली खेलते साधु-संन्यासी। यह नजारा इस समय काशी के मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिल रहा है। यहां शनिवार को मसाने की होली खेली जा रही है। कोई गले में नरमुंडों की माला डाले है, तो कोई डमरू की थाप पर नाचता दिखाई दे रहा है। घाट पर जश्न के बीच से शवयात्राएं भी गुजरती रहीं। रंग और चिता की राख में सराबोर होकर विदेशी पर्यटक भी झूमते नजर आए। शनिवार को मसाने की होली का रंगोत्सव डमरू वादन से शुरू हुआ। डमरू की गूंज के बीच साधु-संन्यासी मणिकर्णिका घाट पहुंचे और पूजन किया। भस्म, रंग, गुलाल और अबीर बाबा मसान नाथ को अर्पित किए। इसके बाद भस्म की होली खेली। मसाने की होली खेलने के लिए 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचे हैं। आमतौर पर जिस चिता की राख से लोग दूरी बनाते हैं, आज उसी राख में लोग श्रद्धा और आस्था के साथ सराबोर नजर आ रहे हैं। मणिकर्णिका घाट से मसाने की होली की 5 तस्वीरें मसाने की होली के लाइव अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए...

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  Sports

Ranji Trophy Final: 346 मैच और 66 साल का सूखा खत्म, जम्मू-कश्मीर ने पहली बार जीती रणजी ट्रॉफी

Ranji Trophy Final: जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रच दिया। 2025-26 रणजी ट्रॉफी फाइनल में उसने सितारों से सजी कर्नाटक टीम को हराकर पहली बार खिताब अपने नाम कर लिया। तेज गेंदबाज आकिब नबी की घातक गेंदबाज़ी और शुभम पुंडीर और कमरान इक़बाल के शतकों ने इस जीत की नींव रखी। यह वही टीम है, जिसे कभी ज़्यादातर प्रतिद्वंद्वी हल्के में लेते थे लेकिन इस बार उसने सबको जवाब दे दिया।

फाइनल में आकिब नबी ने गेंद से कमाल दिखाया। पहली पारी में शुभम पुंडीर ने शतक जड़कर टीम को मज़बूत स्थिति में पहुंचाया। दूसरी पारी में क़मरान इक़बाल ने सेंचुरी ठोक दी और कर्नाटक पर दबाव बना दिया। इन तीनों के प्रदर्शन ने मैच का रुख पूरी तरह जम्मू-कश्मीर की ओर मोड़ दिया।

जम्मू-कश्मीर पहली बार बना चैंपियन
यह खिताब इसलिए भी खास है क्योंकि टीम का रणजी सफर आसान नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर ने 1960 में अपना पहला मैच खेला था लेकिन पहली जीत उन्हें 1982 में 99वें मुकाबले में मिली। दिलचस्प बात यह है कि उसी साल कर्नाटक ने अपना तीसरा खिताब जीता था। 2025-26 का फाइनल उनके रणजी इतिहास का 346वां मैच था और यह सिर्फ 47वीं जीत थी।

इस सीज़न में टीम ने कमाल का प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट में उन्हें सिर्फ एक हार मिली, जो श्रीनगर में मुंबई के खिलाफ आई थी। इसके अलावा उन्होंने लगातार शानदार क्रिकेट खेली और फाइनल तक का सफर तय किया। 66 साल के लंबे इंतज़ार के बाद आया यह खिताब सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि मेहनत, धैर्य और भरोसे की जीत है। जम्मू-कश्मीर ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो इतिहास बदला जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इस ऐतिहासिक दिन को करीब से देखने के लिए शुक्रवार शाम को ही हुबली पहुंचे थे और टीम के पहले खिताब के गवाह भी बने। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हम J&K क्रिकेट टीम को रणजी ट्रॉफी का फाइनल खेलने के लिए चीयर करने हुबली जा रहे। उन्होंने फाइनल में पहुंचकर लाखों लोगों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व महसूस कराया है। मैं कल स्टैंड्स में उनका हौसला बढ़ाने के लिए सच में उत्सुक हूं।'

मैच का पूरा हाल
रणजी ट्रॉफी फाइनल की पहली गेंद से ही जम्मू-कश्मीर ने इरादे साफ कर दिए थे। कप्तान पारस डोगरा ने अहम टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी चुनी। पिच को देखते हुए अंदाज़ा था कि चौथे-पांचवें दिन दरारें दिखेंगी, और डोगरा का दांव बिल्कुल सही बैठा।

पहली पारी में जम्मू-कश्मीर ने 584 रन ठोक दिए। कर्नाटक को करीब सात सेशन तक मैदान में पसीना बहाना पड़ा। नंबर-3 पर उतरे शुभम पुंडीर ने 121 रन की शानदार पारी खेली। डोगरा (70), यावर हसन (88), अब्दुल समद (61), कनहैया वाधवान (70) और साहिल लोटरा (72) ने अर्धशतक जमाकर स्कोर पहाड़ जैसा बना दिया। कर्नाटक के गेंदबाज़ पूरी तरह दबाव में दिखे।

आकिब नबी ने पहली पारी में 5 विकेट झटके
मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच तनातनी भी रही। एक विवादित पल में डोगरा ने सब्स्टीट्यूट फील्डर केवी अवनीश को हेड-बट कर दिया। बाद में उन्होंने इसे ‘हीट ऑफ द मोमेंट’ बताया, लेकिन 41 साल के कप्तान पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगा।

कहावत है कि पिच को तब तक मत आंकिए जब तक दोनों टीमें बल्लेबाज़ी न कर लें। तेज़ गेंदबाज़ आकिब नबी ने इसे सच कर दिखाया। इस सीज़न के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले नबी ने कर्नाटक की कमर तोड़ दी। उन्होंने पहले राहुल (13) को आउट किया, फिर लगातार दो गेंदों पर करुण नायर (0) और स्मरण रविचंद्रन (0) को चलता किया। स्कोर 57/4 हो गया। मयंक अग्रवाल ने 160 रन बनाकर लड़ाई लड़ी, लेकिन नबी के आगे वो भी फीके पड़ गए। नबी ने सीज़न का सातवां फाइफर लिया, कुल 60 विकेट पूरे किए और इतिहास में तीसरे ऐसे तेज़ गेंदबाज़ बने जिन्होंने एक सीज़न में 60+ विकेट झटके।

291 रन की बढ़त के बाद दूसरी पारी में शुरुआत डगमगाई। प्रसिद्ध कृष्णा और विजयकुमार वैशाख ने यावर (1) और पुंडीर (4) को जल्दी आउट कर दिया। लेकिन क़मरान इक़बाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 159* की नाबाद पारी खेली, वहीं साहिल लोटरा 101* पर डटे रहे। टीम ने 342/4 पर पारी घोषित की।

मैच ड्रॉ रहा था लेकिन 633 रन की विशाल बढ़त के दम पर ट्रॉफी जम्मू-कश्मीर के नाम रही। 2025–26 सीज़न में टीम को सिर्फ एक हार मिली- ओपनर में मुंबई के खिलाफ। नॉकआउट में मध्य प्रदेश और बंगाल को हराकर फाइनल में पहुंची इस टीम ने आखिरकार इतिहास रच दिया।

संक्षिप्त स्कोर: जम्मू-कश्मीर 584 और 342/4 घोषित; कर्नाटक 293।
नतीजा: मैच ड्रॉ, लेकिन जम्मू-कश्मीर बना चैंपियन।

Sat, 28 Feb 2026 14:39:07 +0530

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