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RCB के स्टार Bhuvneshwar Kumar की T20I वापसी रही फीकी, दो मैचों में लुटाए 99 रन

अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार चार साल के अंतराल के बाद भारत के T20I सेटअप में वापसी करने के बाद से कोई खास प्रभाव नहीं डाल पाए हैं, जिससे न्यूज़ीलैंड के खिलाफ तीसरे T20I से पहले उन पर दबाव बढ़ गया है। भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच पांच मैचों की T20I सीरीज़ का तीसरा मुक़ाबला मंगलवार को वेलिंगटन के हेनरी स्टेडियम में खेला जाएगा। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम में वापसी करने वाले इस तेज़ गेंदबाज़ के लिए शुरुआती दो मैच महंगे साबित हुए हैं। अब वह वापसी करने की कोशिश करेंगे, क्योंकि भारत इस सीरीज़ में अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है।

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कुमार चार साल के लंबे अंतराल के बाद भारत के T20I सेटअप में लौटे हैं और उन्हें न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सीरीज़ के लिए टीम में जगह मिली है। हालाँकि, शुरुआती दो मैचों में यह अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ विपक्षी बल्लेबाज़ों को रोकने में संघर्ष करता दिखा है और उसने काफ़ी रन लुटाए हैं। पहले T20I मैच में, न्यूज़ीलैंड ने 225/4 का बड़ा स्कोर खड़ा किया। इस दौरान कुमार को कोई विकेट नहीं मिला और उन्होंने अपने चार ओवरों में 49 रन लुटा दिए।

दूसरे T20I में अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ का प्रदर्शन फिर से काफी महंगा रहा; उन्होंने 50 रन दिए और केवल एक विकेट लिया, जबकि न्यूज़ीलैंड ने 180/5 का स्कोर खड़ा किया। अब तीसरे मैच से पहले, कुमार अपनी लय वापस पाने और किफायती गेंदबाज़ी करने की कोशिश करेंगे। लगातार दो महंगे प्रदर्शनों के बाद, प्लेइंग XI में उनकी जगह पर भी सवाल उठ सकते हैं। कुमार ने IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए शानदार प्रदर्शन करके भारतीय टीम में वापसी की थी। उन्होंने IPL 2025 में 27 विकेट लिए और फिर 2026 के सीज़न में 28 विकेट लेकर अपनी सफलता को और आगे बढ़ाया।

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न्यूज़ीलैंड के खिलाफ चल रही T20I सीरीज़ के लिए भारत के तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण है। अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार के साथ-साथ, टीम में स्टार तेज़ गेंदबाज़ अर्शदीप सिंह और युवा तेज़ गेंदबाज़ मयंक यादव व प्रिंस यादव शामिल हैं। पहले T20I में, जो काफी हाई-स्कोरिंग रहा था, मयंक यादव भारत के सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ों में से एक रहे; उन्होंने 40 रन देकर एक विकेट लिया। हालाँकि, दूसरे मैच की प्लेइंग XI से उन्हें बाहर कर दिया गया और उनकी जगह प्रिंस यादव को टीम में शामिल किया गया।

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माओवादी आ-तंक समाप्त: मोदी सरकार में कितना बदला बस्तर?

अक्सर कुछ लोग कहते मिल जाते हैं कि भाजपा और मोदी सरकार में क्या ही बदला है? ये इतना सामान्यीकरण करने वाला प्रश्न है। जो किसी के गले नहीं उतरता है। कहीं और की बात न करें केवल छत्तीसगढ़ और बस्तर को ही देखें तो हमें पूरी तस्वीर ही अलग दिखाई देती है। भाजपा सरकार ने तय समय पर 31मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ समेत देश को सशस्त्र माओवादी आ-तंक से मुक्त कर दिया। बस्तर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह और अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का पहुंचना। ये कोई सामान्य बात नहीं है। ये इतिहास की वो लकीर है। जो राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और समृद्धि की संघर्षमय-प्रतिबद्धता की कहानी कहती है। 2024 में जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ये ऐलान किया था। उस समय लोग विश्वास नहीं कर रहे थे। 'विरोध के लिए विरोध करने वाले' धड़े, उपहास उड़ा रहे थे। किन्तु जब तय समय सीमा में देश से माओवादी आ-तंक ( नक्सलवाद) समाप्त हो गया तो विरोध करने वाले उपहास का पात्र बनकर रह गए। हालांकि 'अर्बन नक्सली' और उन्हीं के र-क्तबीज 'दिमागी नक्सली' आज भी बस्तर में आंखें गड़ाए बैठे हैं। किन्तु वो अब कभी भी सफल नहीं हो पाएंगे। क्योंकि पूरा समाज जाग चुका है।

स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार 23 अक्टूबर 2026 को बस्तर में राष्ट्रपति का जाना हुआ है। सैकड़ों साल पुरानी 'मुरिया दरबार' परंपरा और वहां की कई परंपराओं से राष्ट्रपति का साक्षात्कार होना ।हमारी सांस्कृतिक अन्तश्चेतना का प्रतिबिम्ब है। ये कोई सामान्य बात नहीं है। यह उस संकल्प की परिणति है। जो संकल्प—बस्तर की ख़ुशहाली के लिए प्रतिबद्ध है।

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बस्तर में यही लोकतन्त्र का उदय है। जहां अब लोग निर्भय होकर जीवन जी रहे हैं। राष्ट्रप्रमुख उनके बीच पहुंच रहे हैं। जबकि इसके पहले 'अर्बन नक्सलियों' की कमांड से संचालित होने वाले सशस्त्र माओवादी — वहां हिं-सा, रक्त'-पात का वीभत्स खेल, रचते थे। 'जनताना' सरकार के नाम पर भारत के लोकतन्त्र और संविधान को चुनौती देते थे। इन्हें किस विचार और पूर्ववर्ती सरकार का घोषित-अघोषित समर्थन प्राप्त था? क्या ये किसी से छिपा है? लेकिन अब नक्सली नेस्तनाबूद हो चुके हैं। जिन माओवादियों ने सरेंडर किया है। उनके पुनर्वास के कार्यक्रम चल रहे हैं। उनको कौशल सम्पन्न बनाया जा रहा है। मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है। ये केंद्र की मोदी और राज्य की साय सरकार ने ही कर दिखाया है। आप इनकी और मुद्दों पर आलोचना कर सकते हैं। लेकिन माओवादी आ-तंक को समाप्त करने का जो साहसिक कार्य भाजपा सरकार ने किया है। वो 'न भूतो न भविष्यति' जैसा ही है।

अब बस्तर में - बस्तर पंडुम हो रहा है, बस्तर ओलंपिक हो रहा है। पर्यटन का विस्तार हो रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सड़कों का नया जाल बुना जा रहा है। भारत की राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पहुंचना भी कोई सामान्य बात नहीं है। उनका राष्ट्रपति बनना भी कोई साधारण बात नहीं थी। ये भी ध्यान रखना चाहिए कि- जनजातीय समाज से आने वाली बेटी 'द्रौपदी मुर्मु' को भाजपा ने सर्वोच्च पद राष्ट्रपति की आसंदी तक पहुंचाया है। जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन ने- जनजातीय समाज की इसी बेटी के ख़िलाफ़ अपना उम्मीदवार उतारा था। वो किसी भी स्थिति में जनजातीय समाज से आने वाली बेटी को राष्ट्रपति नहीं बनने देना चाहते थे। भला, कांग्रेस और इंडी गठबंधन को जनजातीय समाज के विरोध में आने से क्या हासिल हुआ? क्या ये कॉलोनियल माइंडसेट नहीं था, जो जनजातीय समाज को कभी भी स्वीकार नहीं करना चाहता है?

वहीं गाहे-बगाहे कुछ लोग भारत के लोकतन्त्र को नसीहतें देते रहते हैं। उपनिवेश की मानसिकता के गुलाम आज भी कहते हैं कि —“15 अगस्त 1947 के बाद ही भारत में लोकतन्त्र आया।” ऐसे में उन्हें बस्तर के 'मुरिया दरबार' को जानना चाहिए। जहां सैकड़ों सालों से लोकतन्त्र और जन-संवाद का अद्भुत उदाहरण मिलता है। सैकड़ों गांवों के मांझी, चालकी और प्रतिनिधि 'मुरिया दरबार' में अपनी बातें रखते थे। क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर गहन, चिंतन और विमर्श करने की परंपरा निर्बाध रूप से जारी है। जहां पूरा समाज एक-दूसरे का पूरक है। भारत के कोने-कोने में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं। अंतर केवल इतना है कि भारत ने लोकतन्त्र शब्द का झुनझुना नहीं बजाया बल्कि लोकतन्त्र को जीवन में उतारा है। इसे शराब और ऐय्याशी में डूबे एसी कमरों में बैठने वाले तथाकथित अकादमिक जल्लाद और गल्पकार ( इतिहासकार) नहीं समझ सकते हैं।

ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि वो लोग जो हमारे जनजातीय बांधवों को अपने चश्मे से दिखाते हैं। बताते हैं कि 'आदिवासी हिन्दू नहीं हैं।' वो 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरे को देखें। हमारा जनजातीय समाज ही बस्तर दशहरे का मुख्य कर्ताधर्ता है। पारंपरिक रीति-रिवाजों, मान्यताओं का जितना कड़ाई से जनजातीय समाज पालन करता है। उसका हम आप सहस्त्रांश नहीं कर पाते। यही हिन्दुत्व का विराट स्वरूप है।

ये जो जात-पात, वाद आदि के ज़हर से समाज को तोड़ने की साज़िश करते रहते हैं। वो ज़रा! पूरे बस्तर दशहरा में एक कोई प्रकरण ढूंढ़ कर ला दें। जब पूरे बस्तर दशहरे के आयोजन के बीच कहीं कोई भेदभाव होता हो। यहां हर समाज के लोग बस आस्था और परंपरा के रंगों में डूबे मिलते हैं। प्रसन्नता के साथ धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करते मिलते हैं। कहने का आशय ये है कि —अब बस्तर में बारूद की गंध नहीं है। अब बस्तर में प्रकृति, संस्कृति, परिवर्तन और विकास की नई चेतना हिलोरें ले रही है। ये इसीलिए संभव हो पाया है क्योंकि देश की जनता ने प्रधानमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी को दिल्ली में चुनकर भेजा है। जो 'विकास और विरासत' को एक साथ लेकर चलने के लिए संकल्पबद्ध है। आप सोचिए कि —अगर केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार नहीं होती तो क्या देश से माओवादी आ-तंक समाप्त हो पाता ? क्या धारा-370 ख़त्म हो पाती? बस्तर में हम जो दृश्य देख पा रहे हैं क्या वो कभी दिख पाते ? ज़रा ! इन सवालों के ज़वाब ख़ुद से एक बारगी ज़रूर पूछिएगा !

— कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल 
(साहित्यकार, स्तंभकार एवं पत्रकार)

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Team India में 4 साल बाद वापसी पर बोले Bhuvneshwar Kumar, अब पहले से ज्यादा मुश्किल हुआ T20

वेलिंगटन में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ सीरीज़ जीतने के बाद, भारतीय तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार ने चार साल बाद टीम में अपनी वापसी और युवा गेंदबाज़ों के साथ अपना अनुभव साझा करने के बारे में बात की। टीम इंडिया ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ शानदार सीरीज़ जीत हासिल की। ​​अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की ज़बरदस्त पावरप्ले बल्लेबाज़ी की बदौलत भारत ने 199 रनों के लक्ष्य को महज़ 13.2 ओवर में आसानी से हासिल कर लिया। इसके साथ ही भारत ने सीरीज़ में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है, जबकि अभी भी दो मैच खेले जाने बाकी हैं। वापसी के बाद भुवनेश्वर का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है; उन्होंने अपने हर चार ओवर के स्पेल में 40 से ज़्यादा रन दिए हैं और तीन मैचों में केवल एक विकेट ही ले पाए हैं।

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मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, भुवनेश्वर ने युवा खिलाड़ियों - अर्शदीप सिंह, मयंक यादव, नीतीश कुमार रेड्डी और प्रिंस यादव - के साथ अपना अनुभव साझा करने के बारे में कहा कि युवा खिलाड़ियों में काफी उत्सुकता है। वे नए हैं, लेकिन उनके पास अनुभव भी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे IPL खेलते हैं, जो कि T20 क्रिकेट ही है और इसी स्तर का है। हर कोई सीखना चाहता है। हम जिस भी विषय पर बात कर सकते हैं, उस पर बात करते हैं। लेकिन हमें यह समझना होगा कि T20 क्रिकेट अब बहुत मुश्किल हो गया है।

उन्होंने कहा कि जब मैंने अपना T20I डेब्यू किया था, तब ऐसा होता था कि 'ठीक है, इसे खेलने दो और धीरे-धीरे सभी फॉर्मेट में डेब्यू करने दो।' लेकिन अब ऐसा नहीं है, अब यह मुश्किल है। T20 में आपको परिपक्वता (maturity) की जरूरत होती है। इन सभी गेंदबाजों ने IPL में यह दिखाया है और अच्छा प्रदर्शन किया है। मैं उनके साथ अपना अनुभव साझा कर सकता हूँ, चाहे वह सामान्य बातें हों या न्यूजीलैंड की परिस्थितियों के बारे में, लेकिन अब तक उन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।

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अपनी वापसी के बारे में बात करते हुए भुवनेश्वर ने कहा कि मुझे लगता है कि मेरी वापसी... ज़ाहिर है, भारत का प्रतिनिधित्व करना अच्छा लगता है। मैं कई सालों तक टीम से बाहर था। लेकिन अपनी वापसी के बारे में मैं क्या कहूँ? अच्छा लग रहा है, मुझे फिर से भारत के लिए खेलने का मौका मिल रहा है। मैं फिर से अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहा हूँ। मैच की बात करें तो, भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फ़ैसला किया। टिम सीफ़र्ट (2) के जल्दी आउट होने के बाद, फ़िन एलन (25 गेंदों में 40 रन, पाँच चौकों के साथ) और डेरिल मिशेल के बीच दूसरे विकेट के लिए 86 रनों की साझेदारी ने न्यूज़ीलैंड को मैच में वापस ला दिया।

Wed, 28 Oct 2026 14:34:00 +0530

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