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तमिलनाडु के रामनाथपुरम में मिर्च की फसल खराब होने से बढ़े दाम

रामानथपुरम, 1 मार्च (आईएएनएस)। तमिलनाडु के रामानथपुरम में मिर्च की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जहां खुले बाजार में मुंडू और सांबा किस्मों की कीमत 20,000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो गई है।

अधिकारियों ने बताया कि इस वृद्धि का कारण खेती योग्य भूमि में कमी, कीटों का व्यापक प्रकोप और सूखे की स्थिति है, जबकि किसानों ने तमिलनाडु सरकार से फसल के बढ़ते नुकसान की भरपाई के लिए सूखा राहत की घोषणा करने का आग्रह किया है।

मिर्च जिले की सबसे बड़ी बागवानी फसल बनी हुई है। इस वर्ष लगभग 13,500 हेक्टेयर में इसकी खेती की गई है, जो पिछले वर्ष के 15,050 हेक्टेयर की तुलना में 1,500 हेक्टेयर से अधिक की गिरावट है।

बागवानी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह गिरावट मुख्य रूप से पिछले मौसम में गंभीर फफूंद रोग के प्रकोप के कारण हुई है, जिसके परिणामस्वरूप पैदावार में भारी नुकसान हुआ और किसानों को खेती का विस्तार करने से हतोत्साहित किया।

फसल कटाई का मौसम शुरू हो जाने के साथ ही, बाजारों में कम आवक के कारण कीमतें सामान्य स्तर से लगभग दोगुनी हो गई हैं।

रामानथपुरम के एक पारंपरिक मिर्च किसान और निर्यातक एम. रामर ने कहा कि मुंडू मिर्च, जिसकी कीमत आमतौर पर 13,000 रुपए से 20,000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच होती है, वर्तमान में 25,000 रुपए से 36,000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है।

इसी तरह, सांबा मिर्च की कीमतें भी सामान्य 12,000-15,000 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 20,000-25,000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच पहुंच गई हैं। कृषि विपणन विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि नियामक बाजार मूल्य भी काफी बढ़ गए हैं।

सांबा मिर्च लगभग 220 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव से बिक रही है, जबकि मुंडू किस्म की मिर्च 360 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच रही है जो सामान्य फसल के मौसम में देखी जाने वाली औसत दरों से लगभग दोगुनी है।

किसान कीमतों में इस भारी वृद्धि का कारण कीटों के हमले, फल सड़ने का रोग और लंबे समय तक सूखे के कारण कम पैदावार को बताते हैं।

बागवानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि 2,500 हेक्टेयर से अधिक मिर्च की फसल कीटों के प्रकोप से प्रभावित हुई है और सूखे की स्थिति ने नुकसान को और भी बढ़ा दिया है।

मिर्च किसान अय्यप्पन ने कहा, केवल वे किसान जिनके पास सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा थी या जो टैंकरों के माध्यम से पानी खरीदने में सक्षम थे, वे ही अपनी फसल बचा पाए। बाकी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

--आईएएनएस

एसएके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आयुर्वेदिक दिनचर्या: फिट बॉडी और रिलैक्स माइंड का सीक्रेट मंत्र

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपनी दिनचर्या को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे शरीर बीमारियों का घर बन जाता है। ऐसे में आयुर्वेद हमें सिखाता है कि अगर हम प्रकृति के नियमों के अनुसार अपना दिन बिताएं तो शरीर भी तंदुरुस्त रहेगा और मन भी शांत रहेगा।

सबसे पहली और अहम आदत है सुबह जल्दी उठना, खासकर सूर्योदय से पहले। इस समय वातावरण शांत और ताजा होता है, दिमाग साफ रहता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ होती है। उठते ही लगभग आधा से एक लीटर गुनगुना पानी पीना बहुत फायदेमंद माना गया है। इससे पेट साफ रहता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।

इसके बाद शौच और दांतों की सफाई जरूरी है। नीम या बबूल की दातुन का इस्तेमाल या सामान्य ब्रश से दांत साफ करना, जीभ की सफाई करना और कुल्ला करना मुंह की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। आयुर्वेद में तेल से गरारे करने की भी सलाह दी जाती है, जिससे दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं। इसके बाद नाक में दो-दो बूंद तेल या घी डालना और आंखों को ठंडे पानी से धोना भी लाभकारी बताया गया है।

शरीर की मालिश (अभ्यंग) रोजाना या हफ्ते में कुछ दिन जरूर करनी चाहिए। सरसों, तिल या नारियल के तेल से हल्की मालिश करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, त्वचा चमकदार बनती है और थकान दूर होती है। खासकर सिर और पैरों की मालिश से अच्छी नींद आती है और तनाव कम होता है। इसके बाद हल्का व्यायाम, योग या प्राणायाम करना चाहिए। इतना ही व्यायाम करें कि हल्का पसीना आ जाए, ज्यादा थकान नहीं होनी चाहिए।

नहाने के लिए सिर पर सामान्य तापमान का पानी और शरीर पर हल्का गर्म पानी इस्तेमाल करना अच्छा माना जाता है। स्नान से शरीर तरोताजा होता है और आलस्य दूर होता है।

खाने के मामले में भी आयुर्वेद संतुलन पर जोर देता है। ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन लें। ज्यादा तला-भुना और भारी खाना कम करें। समय पर खाना और अच्छी तरह चबा कर खाना पाचन के लिए बहुत जरूरी है। रात को जल्दी और हल्का भोजन करें और खाने के तुरंत बाद सोने से बचें।

अच्छी नींद भी उतनी ही जरूरी है जितना अच्छा भोजन। बड़ों के लिए छह से आठ घंटे और बच्चों के लिए आठ से दस घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। सोने से पहले हाथ-पैर धो लेना, पैरों में थोड़ा गुनगुना तेल लगाकर मालिश करना और मन को शांत करने के लिए हल्का संगीत या ध्यान करना बहुत फायदेमंद होता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

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