ऋषभ रिखीराम शर्मा पंडित रविशंकर के आखिरी शिष्य नहीं, संगीत संस्थान ने जारी किया बयान
मुंबई, 27 फरवरी (आईएएनएस)। युवा सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा और अनुष्का शंकर के बीच, सितार वादक और संगीतज्ञ रहे पंडित रविशंकर के आखिरी शिष्य होने के दावे के बीच बहस जारी है। ऋषभ का कहना है कि गुरु ने उन्हें अपना आखिरी शिष्य माना था। उन्होंने यह दावा हाल ही में हुए आयोजन में किया था, जिसका विरोध खुद दिवंगत पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर ने किया। उन्होंने ऋषभ की बातों को झूठा बताया।
5 साल में दोस्त से कैसे बने दुश्मन: क्यों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच खुलकर शुरू हुआ युद्ध, जानें 3 बड़ी वजहें
pakistan afghanistan war: अगस्त 2021 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया था, तब पाकिस्तान में जश्न जैसा माहौल था। माना जा रहा था कि अब काबुल में 'अपनी' सरकार है और पश्चिमी सरहद सुरक्षित रहेगी। इस्लामाबाद सालों से तालिबान को समर्थन देता रहा था। उम्मीद थी कि यह रिश्ता पाकिस्तान के लिए फायदेमंद साबित होगा। लेकिन 2026 आते-आते हालात पूरी तरह बदल गए। डूरंड लाइन पर लगातार गोलाबारी हो रही है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले के आरोप लगा रहे हैं। रिश्ते इतने बिगड़ चुके हैं कि दोनों एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर युद्ध में कूद गए हैं।
अब सवाल ये है कि 2021 में जो बात दोस्ती से शुरू हुई थी वो कैसे 5 सालों में दुश्मनी में तब्दील हो गई। आइए वजह समझते हैं। इसकी एक वजह है तहरीक-ए-तालिबान।
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— Wahida ???????? (@RealWahidaAFG) February 27, 2026
????????Ministry of Defense: A video released shows key Pakistani military centers being targeted by drones.#AfghanistanPakistanWar pic.twitter.com/JcudYUV0Oe
टीटीपी का पलटवार
पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान के लड़ाके अफगानिस्तान की धरती से पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेट कर रहे और उन्हें तालिबान सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। 2021 के बाद से पाकिस्तान में सुरक्षा बलों और पुलिस ठिकानों पर हमले बढ़े हैं।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की अगुआई में इस्लामाबाद ने जवाब में सख्त रुख अपनाया। अफगानिस्तान के भीतर एयरस्ट्राइक और सीमा पार ऑपरेशन किए गए। काबुल ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि पाकिस्तान टीटीपी के बहाने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा।
Afghan forces entered Pakistan from the direction of Spin Boldak, destroyed a Pakistani weapons depot, captured three Pakistani soldiers alive, and killed 40 others.#Afghanistan #AfghanistanPakistanWar pic.twitter.com/Gyyvsv3TzP
— Pathan Bhai (@PathanBhaiii) February 26, 2026
विश्लेषकों का कहना है कि अफगान तालिबान और टीटीपी विचारधारा में करीब हो सकते हैं लेकिन संगठनात्मक तौर पर अलग हैं। बावजूद इसके, पाकिस्तान की आक्रामक नीति ने काबुल का रुख और सख्त कर दिया है। जो 'रणनीतिक संपत्ति' कभी प्रभाव बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की गई, वही अब पाकिस्तान के लिए सुरक्षा संकट बन गई।
Security sources told TOLOnews that the country’s defense forces targeted “key” centers of Pakistan’s military regime last night using unmanned aerial vehicles.
— TOLOnews English (@TOLONewsEnglish) February 27, 2026
The sources added that following the strikes, the regime’s centers were set ablaze.#TOLOnews_English pic.twitter.com/vWYQq8Y14o
बगराम एयरबेस में अमेरिका की दिलचस्पी
दूसरा संवेदनशील मुद्दा है बगराम एयरफील्ड। 2021 में अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद से ये एयरबेस खाली पड़ा है। हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर अटकलें तेज हैं कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोबारा बगराम में दिलचस्पी दिखाते हैं, तो पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश कर सकता।
ट्रंप पहले कह चुके हैं कि हमें बगराम नहीं छोड़ना चाहिए था। हालांकि मौजूदा झड़पों को सीधे बगराम से जोड़ने का कोई आधिकारिक सबूत नहीं है, लेकिन काबुल में यह शक गहरा है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय दबदबा दोबारा हासिल करने के लिए अस्थिरता पैदा कर सकता। अफगानिस्तान के लिए यह उसकी संप्रभुता पर सीधा खतरा माना जा रहा।
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— Wahida ???????? (@RealWahidaAFG) February 27, 2026
????????Ministry of Defense: A video released shows key Pakistani military centers being targeted by drones.#AfghanistanPakistanWar pic.twitter.com/JcudYUV0Oe
काबुल में भारत की बढ़ती मौजूदगी
तीसरा और शायद सबसे संवेदनशील पहलू है अफगानिस्तान का भारत की ओर झुकाव। तालिबान, जो पहले भारत के खिलाफ सख्त रुख रखता था, अब मानवीय सहायता, बुनियादी ढांचे और कूटनीतिक संवाद को लेकर नई दिल्ली से लगातार संपर्क में है। पाकिस्तान लंबे समय से भारत पर अपने यहां होने उग्रवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है, जिसे नई दिल्ली खारिज करता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, असल चिंता सबूतों से ज्यादा अपना असर या पकड़ खोने की है। दशकों तक पाकिस्तान चाहता था कि अफगानिस्तान में भारत की भूमिका सीमित रहे। अब जब काबुल कई देशों के साथ रिश्ते संतुलित कर रहा है, तो इस्लामाबाद की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है।
2021 में 'भाईचारे' की बात से लेकर 2026 में तोपों की गूंज तक का सफर बताता है कि रणनीतिक खेल उल्टा भी पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पड़ोसी देशों के बीच भरोसा टूट चुका है, और हालात बेहद नाजुक हैं।
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