आज NZ vs ENG मैच से होगा पाकिस्तान की किस्मत का फैसला, जानिए कहां LIVE देख सकेंगे ये अहम मुकाबला
NZ vs ENG: टी-20 विश्व कप 2026 रोमांचक अंदाज में आगे बढ़ रहा है. टीमों के बीच सेमीफाइनल में पहंचने की होड़ लगी हुई है. आज न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच सुपर-8 का एक अहम मुकाबला खेला जाने वाला है. इस मैच के फैसले से न्यूजीलैंड और इंग्लैंड का भविष्य तो जुड़ा ही है. साथ ही साथ इस मैच पर पाकिस्तान क्रिकेट टीम की भी नजरें होंगी, क्योंकि इसी से तय होगा कि पाकिस्तान सेमीफाइनल में पहुंचने की रेस में जीवित रहेगी या फिर वह टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी. तो आइए जानते हैं कि ये मैच कितने बजे से शुरू होगा और आप इसे कितने बजे से लाइव देख सकते हैं?
कितने बजे शुरू होगा मैच?
न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेला जाने वाला मैच आज शाम 7 बजे से शुरू होगा. इस मैच से पहले टॉस के लिए दोनों कप्तान 6.30 बजे मैदान पर उतरेंगे.
Can New Zealand join England in the semi-finals of the #T20WorldCup? ????
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कहां लाइव देख सकेंगे मैच?
न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेले जाने वाले मैच को आप आराम से घर पर टीवी और मोबाइल पर देख सकेंगे. क्रिकेट फैंस इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान मुकाबला भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क के टीवी चैनलों पर लाइव देख पाएंगे. वहीं, मोबाइल और डिजिटल यूजर्स इस मैच को जियो हॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीम कर सकेंगे.
Who will join South Africa and England in the #T20WorldCup semi-finals? ????
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पाकिस्तान की किस्मत का होगा फैसला
इस मैच में अगर इंग्लैंड जीत जाता है तो पाकिस्तान के पास सेमीफाइनल में जगह बनाने का एक मौका होगा. वहीं अगर आज न्यूजीलैंड की टीम जीत दर्ज करती है, तो पाकिस्तान के लिए टी20 वर्ल्ड कप 2026 का सफर खत्म हो जाएगा और वो पूरी तरह सेमीफाइनल में जगह बनाने से चूक जाएगी.
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बेल पर छूटे नेताओं की दोबारा गिरफ्तारी का बांग्लादेश पुलिस को आदेश, गलत: मानवाधिकार संगठन
पेरिस, 27 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में अवामी लीग के नेताओं को जेल, बेल, और फिर पुलिस अधिकारी की ओर से गिरफ्तारी का आदेश, बेहद हैरान करने वाला मामला बन गया है। एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
दरअसल, बांग्लादेश के राजशाही रेंज पुलिस डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) मोहम्मद शाहजहां ने “स्पेशल डायरेक्टिव” जारी किए। इस विशेष निर्देश में कानूनी एजेंसियों को अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को कोर्ट से बेल मिलने के बाद भी दोबारा गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है।
फ्रांस में जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (जेएमबीएफ) ने चिंता जताते हुए कहा कि 24 फरवरी को कथित तौर पर अवामी लीग नेताओं को रिहा होने के बाद दूसरे मामलों में गिरफ्तारी दिखाने का निर्देश बहुत गलत है। यह न्यायिक आदेशों को बेअसर करने की एक साफ कोशिश है और प्रशासनिक शक्ति का खुला उल्लंघन है।
मानवाधिकार समूह ने कहा, “जब कोई कोर्ट बेल देता है, तो किसी व्यक्ति को कानून का दुरुपयोग कर दोबारा गिरफ्तार करना संवैधानिक अधिकार को कमजोर करता है और कानून के राज की नींव को हिलाता है। इस तरह की हरकतें मानवाधिकारों का साफ उल्लंघन हैं।”
इसमें आगे कहा गया, “बांग्लादेश का संविधान व्यक्तिगत आजादी, कानूनी सुरक्षा के अधिकार और न्याय तक पहुंच की गारंटी देता है। किसी सक्षम कोर्ट से बेल मिलने के बाद तथाकथित ‘गिरफ्तारी’ दिखाना न्यायपालिका की स्वतंत्रता, शक्ति विभाजन और संवैधानिक संतुलन के सिद्धांत का उल्लंघन है।”
जेएमबीएफ ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा जारी रहा, तो देश का कानूनी ढांचा सिर्फ सांकेतिक बनकर रह जाएगा, और कानून के शासन की जगह प्रशासनिक विवेकाधिकार ले लेगा—“किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह एक खतरनाक संकेत है।”
जेएमबीएफ संस्थापक शाहनूर इस्लाम ने कहा, “बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार, देश के रूल ऑफ लॉ फ्रेमवर्क को व्यवस्थित रूप से कमजोर करके पिछली अंतरिम सरकार के रास्ते पर चलती दिख रही है। नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में, सरकारी मशीनरी को सियासी प्रतिशोध टूल के तौर पर इस्तेमाल करने का ट्रेंड न सिर्फ चिंता की बात है—बल्कि यह लोकतंत्र के लिए भी खतरनाक है।”
उन्होंने आगे कहा, “लोगों को दोबारा अरेस्ट करने के लिए निर्देशों के जरिए कोर्ट के बेल ऑर्डर को दरकिनार करना कोई अकेली प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं है; बल्कि, यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा लगती है। न्यायपालिका के आदेशों को बेअसर करने का यह कल्चर संविधान की खुली अनदेखी है और इसे तुरंत रोकना चाहिए।”
जेएमबीएफ ने “विशेष निर्देश” को तुरंत वापस लेने, राजनीतिक पहचान के आधार पर गिरफ्तारी और न्यायपालिका की पूरी सुरक्षा के साथ ही कोर्ट के आदेशों को लागू करने की मांग उठाई है।
एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आयोग के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों द्वारा सक्रिय निगरानी करने की भी मांग की है।
--आईएएनएस
केआर/
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