उत्तर प्रदेश के छात्रों को होली का शानदार तोहफा, योगी सरकार ने कक्षा 9वीं-10वीं की छात्रवृत्ति बढ़ाई
UP scholarship increase 2026: होली के रंग अभी फैलने से पहले ही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं को एक खुशखबरी दे डाली है. सरकार ने कक्षा 9 और 10 में पढ़ने वाले पिछड़े वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की राशि में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. अब इन छात्रों को सालाना 3000 रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी जबकि पहले यह राशि 2250 रुपये थी. यानी छात्रवृत्ति में 750 रुपये की सीधी बढ़ोतरी हुई है.
38 लाख छात्र होंगे लाभान्वित
इस फैसले से प्रदेश के लगभग 38 लाख छात्र लाभान्वित होंगे. साथ ही अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा को भी 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है जिससे योजना का दायरा और बड़ा हो गया है और अधिक से अधिक गरीब परिवारों के बच्चे इसका फायदा उठा सकेंगे.
पैसे की कमी नहीं है... हर उस छात्र को स्कॉलरशिप का लाभ मिलना चाहिए, जो इसके लिए पात्रता रखता है। सरकार ने इस सुविधा का लाभ प्रदेश के अंदर सभी लोगों को बिना भेदभाव के देना प्रारंभ किया है।
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) January 25, 2026
— मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी pic.twitter.com/eUOfoOaTkV
OBC छात्रों को SC श्रेणी के छात्रों के बराबर आर्थिक सहायता मिलेगी
पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने मीडिया में दिए बयान में कहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है, ताकि OBC छात्रों को SC श्रेणी के छात्रों के बराबर आर्थिक सहायता मिल सके.
दिव्यांगजनों को भी 1500 रुपये का अतिरिक्त भत्ता
यूपी सरकार ने ओबीसी छात्रों के अलावा दिव्यांगजनों को भी 1500 रुपये का अतिरिक्त भत्ता देने का प्रावधान किया है. बता दें उत्तर प्रदेश छात्रवृत्ति योजना के तहत अब तक करीब 20 लाख छात्र लाभ ले चुके हैं और इस बढ़ोतरी से शिक्षा के क्षेत्र में गरीब बच्चों की पढ़ाई को और मजबूती मिलेगी. यूपी सचिवालय अधिकारियों के अनुसार सरकार का मकसद है कि कोई भी योग्य छात्र आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे.
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Aryan Khan Case: आर्यन खान को अरेस्ट करने वाले समीर वानखेड़े की बढ़ी मुश्किलें, दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र की अर्जी स्वीकार
बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार करने वाले आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े की मुश्किलें फिर से बढ़ गई हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) को उनके खिलाफ आगे की कार्यवाही शुरू करने की मांग करने वाली केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस याचिका में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनत्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने जनवरी 2026 को सीबीएसई द्वारा समीर वानखेड़े के खिलाफ आगे की कार्यवाही करने से रोक दिया था। दरअसल, सीबीएसई ने वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की थी। यह कार्यवाही एसईटी द्वारा वानखेड़े के खिलाफ जांच से जुड़े आरोपों पर आधारित थी। वानखेड़े के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में सेवा के दौरान 2021 के हाई प्रोफाइल कॉर्डेलियिया क्रूज ड्रग जब्ती मामले में उनके खिलाफ कई शिकायतें आईं, जिस पर जांच शुरू की गई थी।
एनसीबी ने इस मामले में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को भी गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद यह मामला हाई प्रोफाइल बन गया, जिसकी वजह से तेजी से जांच शुरू हुई। आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ भी कई शिकायतें आईं। वानखेड़े ने तर्क दिया कि प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों को औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता। वहीं, सीबीआईसी पर उचित प्रक्रिया का पालन न करने का भी तर्क दिया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जारी किया गया आरोप पत्र मनमाना, कानूनी रूप से अस्थिर और दुर्भावना से प्रेरित है।
समीर वानखेड़े के इन तर्कों के आधार पर केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने उनके खिलाफ आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। लेकिन, केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की इस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें समीर खानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही को रद्द करने के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती दी गई है।
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