क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?
क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?
Telegram पर सरकार का सख्त एक्शन, पाइरेटेड कंटेंट हटाने के लिए दी 15 दिन की मोहलत
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप में हाल ही में एक नया फीचर यूजरनेम शुरू किया था। जिसके बाद से हर जगह इसकी चर्चा हो रही थी। यूजरनेम पर कई सारे सवाल उठ रहे थे। जिसके बाद सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी। व्हाट्सएप के बाद अब सरकार ने टेलीग्राम को भी नोटिस जारी कर दिया है।
भारत में ऑनलाइन प्राइवेसी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब मैसेजिंग प्लेटफार्म टेलीग्राम के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर प्लेटफॉर्म को अपनी एंटी-पाइरेसी व्यवस्था को मजबूत करने और इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
Telegram को सरकार का आदेश
सरकार का कहना है कि टेलीग्राम पर बड़ी संख्या में पाइरेटेड फिल्में, कॉपीराइट कंटेंट और ओटीटी कंटेंट शेयर किया जा रहे हैं। जिससे फिल्म इंडस्ट्री और क्रिएटर इकोनॉमी को नुकसान हो रहा है। प्लेटफॉर्म को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वह पाइरेटेड फिल्मों और कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाले ऑडियो वीडियो कंटेंट की पहचान कर उनकी रिपोर्टिंग करने और उन तक पहुंच रोकने और हटाने के लिए कोई मजबूत तरीका तैयार करें। सरकार का कहना है कि केवल शिकायत मिलने के बाद कंटेंट हटाना ही पर्याप्त नहीं है। प्लेटफॉर्म को खुद भी इस तरह के कंटेंट की पहचान करने और समय रहते उसे हटाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
सरकार ने उन यूजर्स नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है जो बार-बार इस तरह का कंटेंट साझा करते हैं। इसमें पर्सनल अकाउंट से लेकर ग्रुप, चैनल, बॉट, एडमिन और उनसे जुड़े कई नेटवर्क शामिल है। सरकार का मकसद ऐसे पूरे नेटवर्क को खत्म करना है जो फिल्म और वेब सीरीज की पाइरेटेड कॉपी लोगों तक पहुंचाता है।
मांगी गई ये जानकारी
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से टेलीग्राम से Grievance Redressal सिस्टम की पूरी जानकारी भी मांगी गई है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि पाइरेटेड कंटेंट की शिकायत असली निर्माता द्वारा कैसे दर्ज कराई जा सकती है और शिकायत पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।
15 दिन में मांगी रिपोर्ट
सरकार ने 15 दिनों के भीतर एक डिटेल एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने के निर्देश जारी किए हैं। इस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि कंटेंट की पहचान कर उन्हें रोकने और हटाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। अगर तय समय के अंदर रिपोर्ट नहीं दी जाती है तो मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
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