तमिलनाडु : प्राइवेट डेयरियों ने दूध के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए
चेन्नई, 26 फरवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु की प्राइवेट दूध कंपनियों ने दूध के प्रोडक्शन में कमी और किसानों से दूध खरीदने की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए रिटेल दूध की कीमतें 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी हैं।
बड़े ब्रांड्स के लिए कीमतों में बदलाव पहले ही लागू हो चुका है, और इससे घरों के बजट के साथ-साथ डेयरी प्रोडक्ट्स पर निर्भर छोटे बिजनेस पर भी असर पड़ने की उम्मीद है।
अरोक्या 21 फरवरी को बदले हुए रेट लागू करने वाली पहली कंपनियों में से एक थी, जिससे दूध और दही दोनों के दाम बढ़ गए। इसके तुरंत बाद, डोडला और जर्सी जैसे दूसरे बड़े प्राइवेट प्लेयर्स ने भी ऐसा ही किया। इस बढ़ोतरी के साथ, फुल-क्रीम दूध की कीमत 76 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 78 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जबकि स्पेशल टी दूध की कीमत अब 68 रुपए से बढ़कर 70 रुपए प्रति लीटर हो गई है।
स्टैंडर्डाइज्ड दूध 66 रुपए से बढ़कर 68 रुपए प्रति लीटर, टोंड दूध 60 रुपए से बढ़कर 62 रुपए और डबल-टोंड दूध 48 रुपए से बढ़कर 50 रुपए हो गया है। दही की कीमतों में भी बदलाव किया गया है।
दही के एक किलोग्राम पैक की कीमत अब 76 रुपए है, जबकि पहले यह 74 रुपए का था, जबकि 450 ग्राम का पैक 38 रुपए से बढ़कर 40 रुपए हो गया है। डबल-टोन्ड दही की कीमत 70 रुपए से बढ़कर 72 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है।
प्राइवेट डेयरियों द्वारा कीमत बढ़ाने से कई ग्राहक सरकारी डेयरी कोऑपरेटिव ब्रांड आविन की ओर चले गए हैं, जो काफी कम कीमतों पर दूध बेच रहा है।
अभी, आविन दूध की कीमत प्राइवेट ब्रांड की तुलना में लगभग 18 रुपए प्रति लीटर कम है, जिसमें आधा लीटर पर लगभग 10 रुपए का अंतर है।
कीमतों में भारी अंतर के कारण आविन प्रोडक्ट्स की मांग में तेजी आई है, जिसके कारण कई रिटेल दुकानों पर स्टॉक की कमी हो गई है, जहां सप्लाई आने के तुरंत बाद ही बिक जाने की खबर है।
इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि राज्य में दूध का प्रोडक्शन कम होने से यह बढ़ोतरी हुई है, जिससे प्राइवेट डेयरियों को किसानों से ज्यादा कीमतों पर दूध खरीदना पड़ रहा है। तमिलनाडु मिल्क एजेंट्स वर्कर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पोन्नुसामी ने कहा कि प्राइवेट कंपनियों ने डेयरी किसानों को दिए जाने वाले प्रोक्योरमेंट रेट बढ़ाने के बाद रिटेल कीमतों में बदलाव किया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आविन ने दूध का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए हैं, और चेतावनी दी कि गर्मी शुरू होने से पहले ही प्रोडक्शन कम हो गया है और आने वाले महीनों में हालत और खराब हो सकती है। इसके अलावा, उन्होंने प्राइवेट कंपनियों से अपील की कि वे बदले हुए रिटेल प्राइस को देखते हुए दूध एजेंटों को दिया जाने वाला कमीशन बढ़ा दें।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ली छ्यांग ने चीन-जर्मन आर्थिक सलाहकार समिति की संगोष्ठी में भाग लिया
बीजिंग, 26 फरवरी (आईएएनएस)। 25 फरवरी को दोपहर के बाद चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने पेइचिंग के जन वृहद भवन में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ चीन-जर्मन आर्थिक सलाहकार समिति की संगोष्ठी में भाग लिया। चीनी और जर्मन उद्यमों के 60 से अधिक प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया।
ली छ्यांग ने कहा कि हाल के समय में, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और अनिश्चितता में सामान्यतः वृद्धि हुई है। विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में चीन और जर्मनी ने निरंतर घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से न केवल अपने-अपने विकास क्षेत्र का विस्तार किया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान की है। वर्तमान में, वैश्विक अर्थव्यवस्था को अभी भी कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एकतरफावाद और संरक्षणवाद बढ़ रहे हैं और कुछ देशों और क्षेत्रों में तो व्यापक रूप से प्रचलित हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और व्यापारिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुँच रहा है। स्थिति जितनी गंभीर होगी, चीन और जर्मनी को सहयोग को उतना ही मजबूत करना चाहिए।
ली छ्यांग ने कहा कि वर्तमान में, चीन और जर्मनी दोनों की अर्थव्यवस्थाओं में सुधार और सकारात्मक बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान, द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक सहयोग के और भी व्यापक अवसर खुलेंगे। चीन और जर्मनी के बीच आर्थिक और औद्योगिक लाभों के पूरक होने का मूल स्वरूप अपरिवर्तित है। सहयोग प्रतिस्पर्धा से कहीं अधिक है, और वे स्वस्थ प्रतिस्पर्धी और सहयोगात्मक संबंध विकसित करके एक साथ बेहतर विकास कर सकते हैं।
मर्ज ने कहा कि जर्मनी और चीन एक दूसरे के महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक साझेदार हैं, द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंध गतिशील हैं और वर्षों से उच्च स्तर का विकास बनाए हुए हैं, जिसने दोनों देशों के आर्थिक विकास को मजबूती से बढ़ावा दिया है। जर्मनी चीन से सीखने और उससे सबक लेने, ऑटोमोबाइल, रसायन, मशीनरी और उपकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में आपसी लाभ वाले सहयोग को मजबूत करने, साझा समृद्धि को बढ़ावा देने और जर्मनी-चीन संबंधों के दीर्घकालिक स्थिर विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। जर्मनी, चीनी बाजार में निवेश करने और अपनी उपस्थिति को मजबूत करने वाली जर्मन कंपनियों का समर्थन करता है, अपने कारोबारी माहौल को लगातार बेहतर बनाने के लिए तैयार है, और जर्मनी में निवेश करने और कारोबार करने के लिए अधिक चीनी कंपनियों का स्वागत करता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
डीकेपी/
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