Kartik Maas 2026: आज से शुरू हुआ कार्तिक मास, विष्णु जी की कृपा पाने के लिए इस महीने इन नियमों का पालन जरूर करें
Kartik Maas 2026: सनातन धर्म में कार्तिक का महीना अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है. इस महीने में स्नान-दान और पूजा करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है. कार्तिक का पूरा माह जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है. साथ ही इस महीने में भगवान कार्तिकेय का पूजन भी किया जाता है. इस पवित्र महीने में नियमित से नारायण की पूजा करने से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. आज यानी 26 अक्टूबर 2026 को कार्तिक मास की शुरुआत हो रही है और इसका समापन 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन होगा. इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है. अगर आप भी इस पावन मास में विष्णु जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो इन नियमों का पालन करें.
कार्तिक मास में जरूर करें ये काम (Kartik Maas Rules)
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान- इस महीने में सभी को सूर्योदय से पहले गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए. यदि ऐसा संभव न हो तो प्रति दिन नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. इसे कार्तिक स्नान कहते हैं.
- तुलसी पूजन- कार्तिक मास में तुलसी पूजन का भी खास महत्व होता है. इस महीने में रोजाना सुबह और शाम तुलसी पौधे का पूजन करना चाहिए. पौधे में जल अर्पित करना चाहिए और घी का दीपक जलाना चाहिए.
- दान पुण्य- कार्तिक के महीने में जरूरतमंदों को दान करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है. इस महीने में अन्न, वस्त्र, धन का दान कर सकते हैं.
- दीपदान- कार्तिक मास में दीपदान करने का भी बेहद खास महत्व होता है. अधिक शुभ फलों की प्राप्ति के लिए पूरे महीने में तुलसी के पौधे, पीपल के वृक्ष, शमी के वृक्ष और घर के मुख्य द्वार पर दीया जलाना चाहिए.
कार्तिक मास में इन बातों का ख्याल रखें (Never do these mistakes in Kartik Maas)
- इस पूरे महीने में तामसिक चीजों से दूरी बनाएं रखनी चाहिए. प्याज,लहसुन और मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए.
- कार्तिक के महीने में किसी की बुराई करने, झूठ बोलने या क्रोध करने से बचें और मन शांत रखना चाहिए.
- कार्तिक के महीने में स्नान-दान करने के साथ ही पूजा-पाठ, जप और तप करने का विशेष महत्व होता है. इस महीने में पूरी श्रद्धा और सच्चे भाव से ईश्वर की उपासना कर सकते हैं.
- कार्तिक मास में इन कुछ दालों का सेवन वर्जित माना जाता है. जैसे उड़द, मसूर, चना, मटर और राई.
- यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है. इसलिए, इस महीने में सुबह स्नान करने के बाद विष्णु जी की पूजा जरूर करें और तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें.
- कार्तिक मास में विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
समस्याओं से परेशान होकर कलेक्ट्रेट के लिए पैदल निकले स्कूली छात्र, 20 किलोमीटर का लंबा सफर किया तय
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक बहुत ही हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां सैलाना इलाके में स्थित एकलव्य मॉडल स्कूल के छात्र अपनी समस्याओं को लेकर काफी समय से परेशान चल रहे थे। जब उनकी सुनवाई कहीं नहीं हुई, तो वे अपनी शिकायत लेकर सीधे कलेक्टर से मिलने के लिए पैदल ही कलेक्ट्रेट के लिए निकल पड़े।
दरअसल इन स्कूली बच्चों ने कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए करीब 20 किलोमीटर का लंबा रास्ता पैदल ही तय किया। इस दौरान रास्ते भर स्थानीय प्रशासन और स्कूल का स्टाफ बच्चों को रोकने और समझाने की कोशिश करता रहा। लेकिन आक्रोशित छात्र किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हुए और अपनी बात सिर्फ कलेक्टर के सामने ही रखने की मांग पर अड़े रहे।
हॉस्टल में पसरी गंदगी और शिक्षकों की लापरवाही से परेशान थे छात्र
स्कूली छात्रों की मुख्य शिकायत स्कूल और हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर है। बच्चों का आरोप है कि हॉस्टल में साफ-सफाई बिल्कुल नहीं होती और शिक्षक भी समय पर पढ़ाने नहीं आते हैं। इसके अलावा गेस्ट फैकल्टी के टीचर भी अपनी मर्जी से आते हैं। छात्रों का कहना है कि वे पिछले एक महीने से इन समस्याओं को झेल रहे थे लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं था।
जब अधिकारियों को बच्चों के पैदल निकलने की खबर मिली तो वे तुरंत मौके पर पहुंचे। दरसल, प्रशासन की तरफ से बच्चों को रतलाम ले जाने के लिए बस का भी इंतजाम किया गया था, लेकिन छात्रों ने बस में बैठने से साफ मना कर दिया। बच्चे पैदल ही आगे बढ़ते रहे और उनके पीछे-पीछे अधिकारियों की गाड़ियां और खाली बसें चलती रहीं।
रतलाम में मौजूद नहीं थे कलेक्टर
जब 20 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करके बच्चे कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कलेक्टर साहब अभी शहर में नहीं हैं। अफसरों ने बच्चों को रुककर अपनी समस्या बताने को कहा, लेकिन छात्रों का कहना था कि वे अपनी शिकायत केवल कलेक्टर साहब को ही सुनाएंगे।
इस दौरान जनजातीय विभाग की सहायक आयुक्त प्रियंका राय से भी जब हॉस्टल के पिछले निरीक्षण को लेकर सवाल पूछा गया, तो वे कोई सही जवाब नहीं दे पाईं। रास्ते में बच्चों के लिए स्कूल की तरफ से नाश्ते का इंतजाम किया गया था। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी बच्चों को शांत कराने और उनकी बात सुनने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।
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