Jamia Millia में 14 दिनों की Hunger Strike के बाद बड़ा फैसला, Student Union Election को मिली मंजूरी
14 दिनों की भूख हड़ताल, विरोध-प्रदर्शनों, गिरफ्तारियों और यूनिवर्सिटी कैंपस में बढ़ते दबाव के बाद, जामिया मिलिया इस्लामिया ने सोमवार को आखिरकार घोषणा की कि छात्र संघ के चुनाव, संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद कराए जाएंगे। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा 26 अक्टूबर को जारी किया गया यह आदेश ठीक उस समय आया, जब यह आंदोलन अपने 15वें दिन में प्रवेश कर रहा था। इससे पहले रात भर मार्च निकाले गए, सुरक्षा कड़ी कर दी गई और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई थीं।
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इसकी शुरुआत एक छात्र, जासिम खान से हुई—जो मास्टर्स का छात्र है और जिसने छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी। धीरे-धीरे यह एक सामूहिक आंदोलन बन गया, जिसमें पांच छात्र शामिल हो गए, जिनमें एक छात्रा भी थी। यह विरोध प्रदर्शन बार-बार लगाई गई पाबंदियों, झड़पों और गिरफ्तारियों के बीच हुआ। साथ ही, इसमें छात्रों, पूर्व छात्रों और कैंपस के बाहर के समर्थकों की ओर से एकजुटता का एक अभूतपूर्व प्रदर्शन भी देखने को मिला।
इस बीच, तनाव बढ़ने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस के कुछ हिस्सों को बंद कर दिया, लाइब्रेरी पर ताले लगा दिए और कक्षाओं को ऑनलाइन कर दिया। भारी संख्या में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती के कारण कैंपस किसी किले में तब्दील हो गया था; कई जगहों पर तो प्रदर्शनकारी छात्रों की तुलना में सुरक्षाकर्मियों की संख्या कहीं अधिक नज़र आ रही थी। यह आंदोलन तब एक नया मोड़ ले गया जब बड़ी संख्या में छात्राएं इसमें शामिल हो गईं। इस दौरान कुछ हॉस्टल निवासियों को हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए जाने और लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी चिंताएं थीं। 14 तारीख की रात को जासिम की तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा, जिससे प्रदर्शनकारियों के बीच चिंता और बढ़ गई।
रविवार आधी रात को भी छात्र गुलिस्तान-ए-ग़ालिब में अपना जुलूस निकालते रहे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कैंपस के अंदर खाना-पानी नहीं जाने दिया जा रहा था। जब जासिम सुबह करीब 3:30 बजे अस्पताल से लौटा, तो पता चला कि प्रशासन का फैसला प्रदर्शनकारी छात्रों तक पहुँचा दिया गया था, क्योंकि कैंपस में जश्न शुरू हो चुका था। सोमवार को जारी आदेश में छात्रों के निलंबन और उन्हें दिए गए 'शो-कॉज़' नोटिस को भी रद्द कर दिया गया, और सुरक्षाकर्मियों के बर्ताव की जाँच कराने का वादा किया गया।
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हालाँकि, इसके बदले में प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा गया कि वे प्रशासन के खिलाफ दिए गए कथित अपमानजनक बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगें और सोशल मीडिया से उनसे जुड़ी पोस्ट हटा दें। विश्वविद्यालय ने निर्देश दिया कि प्रदर्शन को तुरंत खत्म कर दिया जाए।
चक्रवात ‘अर्नब’ हुआ सक्रिय, 28 अक्टूबर को Andhra Pradesh तट से टकराने की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरे दबाव का क्षेत्र चक्रवात ‘अर्नब’ में तब्दील हो गया है तथा इसके 27 अक्टूबर तक अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान में बदलने तथा अगले दिन सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है। आईएमडी के राष्ट्रीय बुलेटिन के अनुसार, सोमवार सुबह साढ़े पांच बजे चक्रवात बंगाल की खाड़ी के मध्य-पूर्वी और उससे सटे मध्य-पश्चिमी हिस्से में केंद्रित था। पिछले छह घंटों के दौरान यह 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा।
मौसम विभाग ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा दबाव चक्रवात ‘अर्नब’ में तब्दील हो गया है और इसके 27 अक्टूबर तक अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान में बदलने तथा 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है।” विभाग ने बताया कि यह चक्रवाती प्रणाली अंडमान द्वीपसमूह के श्री विजय पुरम से करीब 590 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में, विशाखापत्तनम से 650 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में, काकीनाडा से 730 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में, मछलीपत्तनम से 830 किलोमीटर पूर्व में और बापटला से 910 किलोमीटर पूर्व में स्थित थी। मौसम विभाग के अनुसार, इस प्रणाली के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और सोमवार आधी रात तक बंगाल की खाड़ी के मध्य-पश्चिमी हिस्से में भीषण चक्रवाती तूफान में बदलने की प्रबल संभावना है। इसके बाद 27 अक्टूबर तक इसके और मजबूत होकर अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान बनने का अनुमान है।
इसके बाद चक्रवात के उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और 28 अक्टूबर की सुबह तक बापटला एवं विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश और यानम के तटों को पार करने की आशंका है। इस दौरान हवा की अधिकतम निरंतर रफ्तार 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि हवा की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है। इस चक्रवाती प्रणाली के प्रभाव से तटीय आंध्र प्रदेश, यानम और रायलसीमा में कुछ स्थानों पर गरज-चमक की आशंका है।
मौसम विभाग ने 27 और 28 अक्टूबर को तटीय आंध्र प्रदेश तथा यानम में भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में 29 अक्टूबर को भी भारी बारिश हो सकती है। इस बीच, आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एपीएसडीएमए) के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने कहा कि अगले तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा संबंधी सावधानियों का सख्ती से पालन करने की अपील की। जैन ने आगाह किया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात के लगातार मजबूत होने के बीच लोगों को अपनी सतर्कता में कोई कमी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को आधिकारिक परामर्शों का पालन करने और जरूरी एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी।
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