Cuba Shootout: क्यूबा के तट पर अमेरिकी स्पीडबोट पर अंधाधुंध फायरिंग; 4 की मौत, मार्को रुबियो ने दिए जांच के आदेश
Cuba Border Guard Shooting: क्यूबा के समुद्र तट पर बुधवार को एक भीषण गोलीबारी की घटना सामने आई है। फ्लोरिडा का एक स्पीडबोट के क्यूबाई जलक्षेत्र में प्रवेश करने के बाद क्यूबा की सुरक्षा बलों ने उस पर गोलियां बरसा दीं। जिसमें चार लोगों की मौत हो गई है और छह अन्य घायल हो गए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, फ्लोरिडा में रजिस्टर्ड स्पीडबोट (नंबर FL7726SH) क्यूबा के विला क्लारा प्रांत में स्थित कायो फाल्कोन्स के पास एल पिनो चैनल में देखी गई थी।
क्यूबा ने कहा- आत्मरक्षा में की गई फायरिंग
क्यूबा के आंतरिक मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि जब उनके सीमा रक्षक सैनिकों ने नाव की पहचान करने के लिए उसके पास जाने की कोशिश की, तो नाव पर सवार किसी व्यक्ति ने पहले क्यूबा के सैनिकों पर गोली चला दी। इस हमले में क्यूबा के एक गश्ती नाव के कमांडर घायल हो गए, जिसके जवाब में सैनिकों ने आत्मरक्षा में फायरिंग की। इस जवाबी कार्रवाई में नाव पर सवार चार लोगों की जान चली गई।
Note from the Ministry of the Interior:
— Cuban Embassy in US (@EmbaCubaUS) February 25, 2026
On the morning of February 25, 2026, a violating speedboat was detected within Cuban territorial waters. The vessel, registered in Florida, United States, with registration number FL7726SH, approached up to 1 nautical mile northeast of the… pic.twitter.com/AEmwtAZ4lO
मार्को रुबियो ने सक्रिय की अमेरिकी दूतावास की टीम
इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि हवाना स्थित अमेरिकी दूतावास लगातार क्यूबा के अधिकारियों के संपर्क में है। अमेरिका अब जीवित बचे लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या वे अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी हैं। रुबियो ने स्पष्ट किया कि जैसे ही पूरी जानकारी सामने आएगी, वाशिंगटन उचित कार्रवाई के लिए तैयार रहेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका यह जानना चाहता है कि आखिर उस समय समुद्र के बीच क्या हुआ था।
SECRETARY RUBIO on CUBA: What I’m telling you is we’re going to find out exactly what happened and who was involved. We’re not going to just take what somebody else tells us.
— Department of State (@StateDept) February 26, 2026
I’m very confident we will be able to know the story independently. pic.twitter.com/965ul2lC8b
व्हाइट हाउस की पैनी नजर और बढ़ता तनाव
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस पूरी स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में विवरण सीमित हैं और वे अधिक जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण हैं। वाशिंगटन ने हाल ही में क्यूबा को होने वाली तेल की आपूर्ति पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके कारण यह कम्युनिस्ट देश दशकों के सबसे बड़े आर्थिक संकट और ईंधन की भारी किल्लत से जूझ रहा है।
फ्लोरिडा के अधिकारियों ने जताई चिंता
स्पीडबोट फ्लोरिडा में रजिस्टर्ड होने के कारण अमेरिकी सांसदों ने क्यूबा की कार्रवाई की निंदा की है। रिपब्लिकन सांसद कार्लोस ए. गिमेनेज ने अमेरिकी संपत्ति और नागरिकों के खिलाफ घातक बल के प्रयोग को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने इस मामले में जवाबदेही की मांग की है। दूसरी ओर, क्यूबा के गृह मंत्रालय ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि वे अपने क्षेत्रीय जल की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और राष्ट्रीय संप्रभुता उनके लिए सर्वोपरि है। फिलहाल, घायलों का इलाज क्यूबा में चल रहा है और मृतकों की पहचान उजागर नहीं की गई है।
Diplomatic Reset: भारत-कनाडा विवाद खत्म? पीएम कार्नी की यात्रा से पहले बड़ा बयान, कहा- 'अपराधों में भारत का हाथ नहीं'
India-Canada Relations: भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक तल्खी अब खत्म होती नजर आ रही है। कनाडा की सरकार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अब कनाडा में होने वाली हिंसक घटनाओं और अपराधों के तार भारत से नहीं जुड़े हैं। यह बयान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की आगामी भारत यात्रा से ठीक पहले आया है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कनाडा के रुख में आया बड़ा बदलाव
कनाडा के संघीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि वे अब आश्वस्त हैं कि भारत की संलिप्तता वाली हिंसक गतिविधियां अब कनाडा में नहीं हो रही हैं। टोरंटो स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) के बीच सक्रिय और मजबूत संवाद चल रहा है। अधिकारी ने यह भी कहा कि अगर ऐसी गतिविधियां जारी रहतीं, तो प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा का कोई औचित्य नहीं होता। यह बयान उस समय आया है जब कार्नी मुंबई और नई दिल्ली के नौ दिवसीय दौरे पर आने वाले हैं, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
Toronto Star reports, "The federal government now believes India is no longer linked to violent crimes in Canada, a senior official said Wednesday, during a briefing ahead of Prime Minister Mark Carney’s highly anticipated trip to that country."
— ANI (@ANI) February 26, 2026
"The statement came during a… pic.twitter.com/HX3IpcsunL
निज्जर हत्याकांड के बाद बिगड़े थे रिश्ते
जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार के एजेंटों पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे नई दिल्ली ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। इस विवाद के कारण दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और संबंधों में एक लंबा गतिरोध पैदा हो गया था। हालांकि, अब कनाडा की नई सरकार आर्थिक संबंधों को गहरा करने और 'व्यावहारिक' विदेश नीति अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
NSA स्तर की बातचीत ने बदली तस्वीर
रिश्तों में आए इस सकारात्मक सुधार के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की भूमिका अहम मानी जा रही है। हाल ही में भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने ओटावा का दौरा किया था, जहां उनकी कनाडाई समकक्ष नथाली ड्रौइन और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री के साथ विस्तृत चर्चा हुई। ओटावा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने बताया कि दोनों पक्षों ने सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन एक्शन प्लान तैयार किया है। इसमें नशीले पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, हिंसक उग्रवाद, साइबर अपराध और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने की सहमति बनी है।
कनाडाई सिख समुदाय में मिली-जुली प्रतिक्रिया
एक ओर जहां सरकारें रिश्ते सुधारने में जुटी हैं, वहीं कनाडा के सिख कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने इस नए आकलन की आलोचना की है। कुछ धार्मिक नेताओं का दावा है कि उन्हें अभी भी जान का खतरा है। वहीं, 'सिख फॉर जस्टिस' जैसे समूहों ने पार्लियामेंट हिल पर प्रदर्शन कर भारत के साथ फिर से जुड़ने के सरकारी फैसले का विरोध किया है। इसके बावजूद, ओटावा का मानना है कि व्यापारिक और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना समय की मांग है, खासकर तब जब कनाडा अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने और व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।
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