अब दुनिया में मचेगी तबाही! North Korean के नेता Kim Jong Un ने खा ली कसम
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन का व्यक्तित्व दुनिया के लिए एक अनसुलझी और खौफनाक पहेली की तरह है। उन्हें आधुनिक युग के सबसे निर्मम और क्रूर तानाशाहों में गिना जाता है, जिनका शासन 'भय' और 'रक्तपात' की नींव पर टिका है। किम जोंग उन के राज में उत्तर कोरिया एक ऐसी 'अंधेरी दुनिया' बन चुका है, जहाँ मानवाधिकारों का कोई अस्तित्व नहीं है।
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने चेतावनी दी कि अगर उनकी सुरक्षा को खतरा हुआ तो परमाणु-संपन्न देश दक्षिण कोरिया को ‘‘पूरी तरह से मिटा’’ सकता है। उन्होंने सियोल के साथ बातचीत करने से एक बार फिर इनकार कर दिया। सरकारी मीडिया ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी की एक बैठक के समापन के दौरान उन्होंने अगले पांच वर्षों के लिए अपने नीतिगत लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वाशिंगटन से बातचीत के लिए अपने रास्ते खुले रखे।
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हाल के वर्षों में किम ने सियोल के प्रति अपनी बयानबाजी को और तीखा कर दिया है और उसके साथ कूटनीति के प्रति अपनी अस्वीकृति पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सैन्य संघर्ष की आशंका नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक व्यापक रणनीति को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत किम के परमाणु हथियारों और मॉस्को तथा बीजिंग के साथ संबंधों के बल पर उत्तर कोरिया की अधिक मजबूत और प्रभावशाली भूमिका स्थापित करना है।
आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ ने कहा कि किम ने अपनी परमाणु-संपन्न सेना को मजबूत करने के लिए नयी हथियार प्रणालियों को विकसित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में उनके परमाणु और मिसाइल के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास ने देश को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में उभारा है।
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उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका लंबे समय से रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करना चाहता है तो उसे उत्तर कोरिया के प्रति अपनी कथित “शत्रुतापूर्ण” नीतियों को छोड़ना होगा। दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया का अंतर-कोरियाई संबंधों को शत्रुतापूर्ण रूप में परिभाषित किया जाना खेदजनक है और सियोल शांति के प्रयासों को धैर्यपूर्वक जारी रखेगा।
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VIDEO | Switzerland: At the High-Level Segment of the 55th Regular Session of the UN Human Rights Council, First Secretary, Anupama Singh in Geneva, says, “India is compelled to exercise its right of reply in response to the references made during the high-level segment by… pic.twitter.com/uHOrmIEf4g
— Press Trust of India (@PTI_News) February 26, 2026
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