JEE Main 2027: NTA ने शुरू किए आवेदन, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में हुए ये बदलाव
JEE Main 2027 Registration: देशभर के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले की राह देख रहे लाखों छात्रों का इंतजार खत्म हो गया है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी है. बीई, बीटेक और बीआर्क जैसे कोर्सेज में दाखिला पाने के इच्छुक छात्र आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना फॉर्म भर सकते हैं. इस बार एनटीए ने परीक्षा शेड्यूल में कुछ अहम बदलाव किए हैं और साथ ही आवेदन प्रक्रिया को पहले से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तीन नए नियम भी जोड़े हैं. छात्रों को तय समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण पूरा करना होगा ताकि अंतिम समय में तकनीकी दिक्कतों से बचा जा सके.
बदली गई जनवरी सत्र की तारीखें
एनटीए ने जेईई मेन 2027 के पहले सत्र की तारीखों में संशोधन किया है. पहले जारी सूचना के अनुसार यह परीक्षा 22, 23, 24, 28 और 29 जनवरी को होनी थी. अब नए कार्यक्रम के अनुसार पहले सत्र की परीक्षाएं 20, 21, 22, 23, 24 और 28 जनवरी 2027 को होंगी. यानी परीक्षा कुल छह दिन चलेगी. हर दिन की परीक्षा को दो पालियों में बांटा गया है. पहली पाली सुबह नौ बजे से दोपहर बारह बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी पाली दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक आयोजित होगी. इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए छात्र अपनी तैयारी की योजना बना सकते हैं.
नियमों में हुए तीन बड़े बदलाव
इस बार आवेदन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए तीन बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. पहला बदलाव पहचान सत्यापन को लेकर है. इसके तहत परीक्षार्थियों को भारत सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे डिजिलॉकर, मेरी पहचान या जनपरिचय के माध्यम से अपना विवरण प्रमाणित करना होगा. इससे फर्जी आवेदनों पर रोक लगेगी और गलतियों की गुंजाइश खत्म होगी. दूसरा नियम लाइव फोटो से जुड़ा है. फॉर्म भरते समय कंप्यूटर के वेबकैम या मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करके उम्मीदवार की लाइव फोटो ली जाएगी. तीसरा बड़ा बदलाव लेट फीस का है. जो छात्र 22 नवंबर तक फॉर्म नहीं भर पाएंगे, उन्हें 500 रुपये के विलंब शुल्क के साथ 23 से 26 नवंबर 2026 तक फॉर्म भरने की मोहलत मिलेगी.
दोनों सत्रों का पूरा कार्यक्रम
एनटीए ने जनवरी सत्र के साथ ही अप्रैल सत्र का टाइम टेबल भी सामने रख दिया है. जनवरी सत्र के लिए आवेदन 24 अक्टूबर से 22 नवंबर तक चलेंगे और शुल्क भुगतान की अंतिम तारीख भी 22 नवंबर रखी गई है. आवेदन में सुधार करने का अवसर 27 से 29 नवंबर 2026 तक मिलेगा. परीक्षा शहर की जानकारी 30 दिसंबर को मिलेगी और प्रवेश पत्र 13 जनवरी 2027 को जारी होंगे. वहीं दूसरे सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन 5 जनवरी से 3 फरवरी 2027 तक लिए जाएंगे. दूसरे सत्र की परीक्षाएं 2 अप्रैल से 7 अप्रैल 2027 के बीच आयोजित कराई जाएंगी. छात्र एक ही आवेदन संख्या से दोनों सत्रों के लिए प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे.
पात्रता और आवेदन शुल्क का विवरण
जेईई मेन 2027 में बैठने के लिए उम्र की कोई सीमा तय नहीं की गई है. जिन छात्रों ने साल 2025 या 2026 में 12वीं की परीक्षा पास की है या जो 2027 में 12वीं की परीक्षा में बैठ रहे हैं, वे आवेदन करने के पात्र हैं. इसके लिए भौतिकी और गणित के साथ रसायन विज्ञान या अन्य तकनीकी विषय होना आवश्यक है. सामान्य वर्ग के पुरुष अभ्यर्थियों के लिए एक पेपर की फीस 1000 रुपये और सामान्य वर्ग की महिला अभ्यर्थियों के लिए 800 रुपये तय है. ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 900 रुपये तथा आरक्षित वर्गों के लिए यह फीस 500 रुपये रखी गई है. दोनों पेपर देने पर फीस दोगुनी देनी होगी.
परीक्षा पैटर्न और आईआईटी का रास्ता
बीटेक के लिए परीक्षा पैटर्न पिछले साल जैसा ही रहेगा. इसमें कुल 300 अंकों के 75 प्रश्न पूछे जाएंगे. प्रश्न पत्र में भौतिकी, रसायन और गणित के खंड होंगे. हर सही उत्तर पर चार अंक मिलेंगे और गलत उत्तर पर एक अंक काटा जाएगा. दोनों सत्र पूरे होने के बाद सर्वोत्तम स्कोर के आधार पर मेरिट तय होगी. शीर्ष ढाई लाख उम्मीदवारों को जेईई एडवांस्ड में बैठने का मौका मिलेगा, जिसके जरिए देश के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों में प्रवेश का रास्ता खुलता है.
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सीएम धामी ने हल्द्वानी में 'कुमाऊं द्वार महोत्सव' में की शिरकत, देवभूमि की संस्कृति और विकास पर रखी बात
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी आज हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस अवसर पर उन्होंने महोत्सव में उपस्थित लोगों का स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार होने के साथ ही पर्वतीय समाज के लिए विशेष महत्व रखता है. यह क्षेत्र कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली और लोक कलाओं की विशिष्ट पहचान को व्यापक मंच प्रदान करता है. महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि प्रदेशवासी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं.
मुख्यमंत्री ने ‘वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन’ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लोकगायन और लोकनृत्य के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान देने के साथ ही इन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है. यहां के लोकगीतों और लोकनृत्यों में पर्वतीय जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य, ऋतु परिवर्तन, लोक आस्थाओं और गौरवशाली इतिहास की झलक देखने को मिलती है. छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी और न्योली जैसी लोक विधाएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं. इसी प्रकार बेड़ा गीत, मांगल गीत और चैती गीत जैसी पारंपरिक गायन शैलियां उत्तराखंड के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग हैं.
उन्होंने कहा कि ढोल, दमाऊ, तुर्री, भंकोरा और रणसिंहा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र उत्तराखंड की लोक संस्कृति को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं. इनकी धुनों में पहाड़ के जनजीवन, लोक आस्थाओं और परंपराओं की झलक मिलती है. डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के विस्तार से उत्तराखंड का लोक संगीत प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकलकर देश-विदेश में पहचान बना रहा है. यह प्रसन्नता का विषय है कि युवा पीढ़ी भी लोक संगीत में रुचि ले रही है और इसे आगे बढ़ाने में योगदान दे रही है.
देवभूमि की अस्मिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं. राज्य सरकार ने प्रदेश के भविष्य, जनहित और देवभूमि की विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने, दंगारोधी कानून लागू करने और सशक्त भू-कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है. देवभूमि की अस्मिता की रक्षा करना राज्य सरकार के लिए राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि संकल्प है. इसी उद्देश्य से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों और अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि कानून के शासन को सुनिश्चित करना और प्रदेश के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है.
पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के साथ-साथ युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. नकल माफिया पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है. इसके परिणामस्वरूप भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरी प्रदान की गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के हित में बड़े और आवश्यक निर्णय लेने से सरकार पीछे नहीं हटेगी. उनके अनुसार, प्रदेश का हित सत्ता से, जनहित राजनीति से और राष्ट्रहित वोटबैंक की राजनीति से ऊपर है.
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को प्रदेश की जनता आज भी याद करती है. उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया और उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया. ऐसे ऐतिहासिक संदर्भों के बीच प्रदेश के लोगों के सम्मान से जुड़ी टिप्पणियां और भी संवेदनशील हो जाती हैं.
राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील विषयों पर जिम्मेदार संवाद जरूरी
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों के संबंध में राजनीतिक बयान देते समय राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए. उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के सम्मान से जुड़े विषयों को भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखना उचित है.
अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय को सर्वोपरि रखने पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की गंभीर जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया, तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने प्रकरण में न्यायालय द्वारा दोषियों को सुनाई गई सजा और जमानत याचिकाओं से संबंधित न्यायिक कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के अनुसार चलने वाली प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बहन अंकिता को न्याय मिलना सर्वोपरि है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी संवेदनशील मामले को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर संवाद किया जाना चाहिए. उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि किसी बेटी के दुख को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना और बिना प्रमाण के आरोप लगाना कितना उचित है.
अंतिम छोर तक विकास पहुंचाना सरकार का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प विकास की यात्रा को प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है. सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें, प्रत्येक बहन-बेटी सशक्त बने और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए.
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की जनता के सहयोग, विश्वास और आशीर्वाद से उत्तराखंड विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और जनकल्याण के लक्ष्यों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा.
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