Barack Obama ने Donald Trump पर साधा निशाना, ओहायो और मिशिगन में डेमोक्रेट्स के लिए मांगा समर्थन
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शनिवार को ओहायो और मिशिगन में चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रिपब्लिकन सहयोगियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर क्रूरता व अभद्रता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया तथा डेमोक्रेटिक मतदाताओं से अपने उम्मीदवारों के समर्थन में एकजुट होने की अपील की। यह प्रचार ऐसे समय में हुआ है, जब तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले दोनों राज्यों में चुनावी मुकाबला तेज हो गया है। सबसे पहले ओहायो में ओबामा ने गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी पर निशाना साधा।
रामास्वामी ने अपने चुनावी विज्ञापन अभियान को और तेज कर दिया है। इस अभियान के एक विज्ञापन में उनकी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी डॉ. एमी एक्टन की अलग रह रही मां को दिखाया गया है। ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस विज्ञापन का बचाव किया है, जबकि ओहायो के गवर्नर माइक डिवाइन समेत राज्य के कई रिपब्लिकन नेताओं ने इसे हटाने की मांग की है।
ओबामा ने रामास्वामी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों में हमने देखा है कि वह अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि एक्टन ने अपने बचपन के दर्दनाक अनुभवों और उस दौरान झेली गई परेशानियों - उत्पीड़न, उपेक्षा और बेघर होने के बारे में बेहद भावुक होकर बताया है। बाद में मिशिगन में ओबामा ने सीनेट के उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद के आलोचकों की निंदा की। उन्होंने संकेत दिया कि ये आलोचक अल-सैयद को बदनाम करने के लिए उनके नाम या उनके धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ओबामा (65) अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ छोड़ने के करीब एक दशक बाद भी डेमोक्रेटिक पार्टी के सबसे प्रभावशाली प्रचारकों में से एक बने हुए हैं। मध्यावधि चुनाव के अंतिम दिनों में वह अपनी लोकप्रियता और प्रभाव का इस्तेमाल कर पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। तीन नवंबर को होने वाले ये चुनाव अमेरिकी राजनीति में सत्ता के संतुलन को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इस बीच, ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा में अपना वोट डाला, जहां उन्होंने रामास्वामी के विवादित विज्ञापन का बचाव किया। यह विज्ञापन देशभर में राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। ट्रंप ने कहा, ‘‘यह शर्मनाक है।
मां ने कहा है कि एमी एक्टन झूठी हैं और अच्छी इंसान नहीं हैं। मुझे नहीं लगता कि इस बारे में इससे बेहतर कोई गवाही मिल सकती है।’’ उन्होंने कहा कि अगर उनकी अपनी मां ने भी उनके बारे में कुछ बुरा कहा होता, तो उसे भी प्रमुखता से दिखाया जाता। रामास्वामी के चुनाव प्रचार अभियान के वीडियो में एक्टन की मां डोना आर्थर उन्हें ‘‘झूठी’’ कहती दिखाई देती हैं।
वह यह संकेत भी देती हैं कि एक्टन को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। ओहायो में कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख रहीं एक्टन ने बचपन में बेघर होने और उत्पीड़न झेलने की बात सार्वजनिक रूप से बताई है। एक्टन से दुष्कर्म के आरोप में उनके सौतेले पिता एवं आर्थर के पति पर अभियोग लगाए जाने के बाद डोना आर्थर ने अपने बच्चों की अभिरक्षा खो दी थी।
आरोप है कि यह यौन उत्पीड़न दिसंबर 1976 से अप्रैल 1978 के बीच हुआ था। क्लेडिथ आर्थर अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। वर्ष 2004 में उसकी मृत्यु होने तक उसके डोना आर्थर के साथ वैवाहिक संबंध रहे थे।
मध्यावधि चुनावों के लिहाज से मिशिगन भी एक अहम राज्य है। यहां सीनेट और गवर्नर पद के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुकाबले हो रहे हैं। ओबामा ने दोनों राज्यों के चुनावों पर बात की, लेकिन मिशिगन में उन्होंने पूर्व जनस्वास्थ्य अधिकारी अल-सैयद का जोरदार बचाव किया।
ओहायो और मिशिगन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के समर्थन में बोलने के साथ-साथ ओबामा ने ट्रंप पर भी हमला बोला। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति और उनके परिवार पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप जीवन-यापन की लागत कम करने में नाकाम रहे हैं और इसके बजाय उन्होंने ‘व्हाइट हाउस’ के दक्षिणी लॉन में नया बॉलरूम और हेलीकॉप्टर उतरने के लिए हेलीपैड बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है।
ओबामा ने व्यंग्य करते हुए कहा, ‘‘पता नहीं आपने गौर किया है या नहीं, लेकिन वह घर के नवीनीकरण पर काफी ध्यान दे रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हर जगह सोना ही सोना है। उन्होंने व्हाइट हाउस को ऐसा बना दिया है, मानो सद्दाम हुसैन ने ‘चीजकेक फैक्टरी’ खोल ली हो।’’ अगले सप्ताह ओबामा जॉर्जिया में सीनेटर जॉन ओसॉफ और गवर्नर पद की उम्मीदवार कीशा लांस बॉटम्स के साथ एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगे।
Milan समेत यूरोप के शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन, इटली में 500 सैनिक तैनात
इटली के मिलान, रोम और ट्यूरिन समेत कई शहरों की सड़कों पर शनिवार को हजारों युवाओं ने मार्च निकाला। पिछले सप्ताह इसी तरह के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक झड़पों और लूटपाट की घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए अधिकारियों ने बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सैनिकों को तैनात किया। मिलान में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन रोम और ट्यूरिन में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ कुछ देर के लिए झड़पें हुईं।
इतालवी मीडिया के अनुसार, मिलान में हजारों युवाओं ने सड़कों पर मार्च निकाला। इस दौरान सैनिक तैनात किए गए और महंगे सामान की दुकानों के सामने सुरक्षा के लिए लकड़ी के तख्ते लगा दिए गए। हालांकि, दोपहर तक ज्यादातर दुकानें खुल गई थीं।
पिछले सप्ताहांत दंगाइयों ने दुकानों में जबरन घुसकर तोड़फोड़ की थी। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कई उपायों की घोषणा की, जिनमें मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिक भेजना और नाबालिगों के लिए सजा के प्रावधान सख्त करना शामिल है। पुलिस ने कहा था कि पिछले सप्ताह हिंसक प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में नाबालिग शामिल थे।
मीडिया के अनुसार, मिलान में पुलिस ने एहतियातन कई नाबालिगों को हिरासत में लिया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा ध्यान फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों पर रहा है, लेकिन शनिवार को मिलान, रोम से लेकर मैड्रिड, लिस्बन और तिराना तक यूरोप के कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में शिक्षा, भ्रष्टाचार, युद्ध-विरोधी आंदोलन, पेंशन और आवास समेत कई मुद्दे उठाए गए।
अल्बानिया की राजधानी तिराना में दंगा-रोधी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की बड़ी भीड़ पर पानी की बौछारें कीं। इनमें से कुछ लोगों ने सरकारी इमारतों में आग लगा दी और पुलिस पर चीजें फेंकीं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को शहर की सड़कों पर 2,500 पुलिसकर्मी तैनात थे।
एक सप्ताह से भी अधिक समय से प्रदर्शनकारी शहर के मध्य हिस्से में पुलिस पर पथराव कर रहे हैं, आग लगाने वाले बम और आतिशबाजी फेंक रहे हैं। पुलिस ने जवाब में लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया है। उच्च विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के छात्र ट्यूशन फीस कम करने तथा शिक्षा में सरकारी निवेश बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
वे शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें से कुछ छात्र सरकार-विरोधी व्यापक आंदोलन में भी शामिल हो गए हैं, जो अल्बानिया के समाजवादी प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहा है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में शनिवार को हजारों सेवानिवृत्त लोगों और अन्य नागरिकों ने शांतिपूर्ण मार्च निकाला।
उनकी मांग है कि सार्वजनिक पेंशन व्यवस्था में कोई बदलाव न किया जाए। स्पेन में आवास के मुद्दे पर भी प्रदर्शन हुए हैं। स्पेन के प्रदर्शनकारियों से प्रेरणा लेते हुए किफायती आवास की मांग कर रहे लोगों ने शनिवार को पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में मार्च निकाला।
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