अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में चले सैन्य तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि वह हस्तक्षेप नहीं करते तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मृत्यु हो जाती और दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच परमाणु युद्ध छिड़ सकता था। हालांकि उनके बयान को लेकर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्होंने यह बात सचमुच उसी अर्थ में कही या फिर वह बोलते समय चूक गए।
हम आपको बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कार्यकाल के पहले दस महीनों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आठ युद्ध समाप्त कराए। इसी क्रम में उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध की कगार पर थे और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वयं कहा था कि यदि ट्रंप का हस्तक्षेप नहीं होता तो 35 मिलियन लोगों की जान जा सकती थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनकी सराहना की और माना कि उनके प्रयासों से करोड़ों लोगों का जीवन सुरक्षित रहा।
ट्रंप के बयान के दौरान यह आभास हुआ कि उन्होंने संभवतः यह कहना चाहा कि 35 मिलियन लोग मारे जा सकते थे, लेकिन उनके शब्दों से ऐसा लगा मानो वह कह रहे हों कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की ही मृत्यु हो जाती। बाद में विश्लेषकों ने माना कि यह संभवतः भाषण के दौरान हुई एक चूक थी और उनका आशय व्यापक जनहानि से था, न कि किसी एक व्यक्ति की मृत्यु से। हम आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को वार्ता की मेज पर लाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनका कहना रहा है कि उनके प्रयासों के कारण ही दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को नियंत्रित किया जा सका था और एक बड़े संघर्ष को टाला गया।
हालांकि भारत ने अमेरिका या किसी भी तीसरे पक्ष के मध्यस्थता दावे को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारतीय सरकार का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी मुद्दे का समाधान द्विपक्षीय ढंग से ही संभव है और इस प्रक्रिया में किसी बाहरी देश की भूमिका नहीं रही। भारत ने दोहराया है कि ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह से आतंकवाद के खिलाफ लक्षित कार्रवाई थी और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना था।
हम आपको याद दिला दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय बलों ने पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और एक अन्य बड़े सैन्य विमान को मार गिराया था। पाकिस्तानी जेट विमानों को एस-400 वायु रक्षा प्रणाली के जरिए निशाना बनाया गया था जोकि अब तक का सबसे बड़ा सतह से हवा में मार गिराने का रिकॉर्ड है। चार दिनों तक चले सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच संघर्षविराम को लेकर समझ बनी थी। पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक द्वारा भारतीय समकक्ष को किए गए फोन कॉल के बाद द्विपक्षीय स्तर पर संघर्षविराम करने पर सहमति बनी थी।
वहीं ट्रंप के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। कई यूजरों ने ट्रंप के बयान को भारत के विपक्षी नेताओं को टैग करते हुए उनसे सवाल पूछा है कि आखिर क्यों वह ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सवाल उठा रहे थे? यूजर्स लिख रहे हैं कि ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि मई 2025 में पाकिस्तान किसी तरह से उस स्थिति से बाहर निकलने का प्रयास कर रहा था जबकि भारत ने योजना के साथ प्रहार किया, घटनाक्रम की गति को नियंत्रित रखा और पाकिस्तान को परिणामों का सामना करने के लिए छोड़ दिया था। एक यूजर ने लिखा कि भारत को प्रमाणपत्रों की आवश्यकता नहीं है। परिणाम ही प्रमाण है। एक यूजर का कहना था कि पाकिस्तान को बाहरी तर्कों, बाहरी हस्तक्षेप के दावों और बाहरी सहारे की जरूरत पड़ी। लेकिन यह नया भारत है, जिसने पाकिस्तान से कीमत चुकवाई। वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि जो लोग अभी भी भारत की सफलता को मानने को तैयार नहीं हैं, वह वही हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सफलता पचा नहीं पा रहे हैं।
बहरहाल, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ट्रंप का बयान घरेलू राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा सकता है। स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में राष्ट्रपति अक्सर अपनी उपलब्धियों को प्रमुखता से रखते हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी भूमिका को रेखांकित करते हैं।
Continue reading on the app
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। ईरान ने दशकों में पहली बार इस इलाके में अपनी सबसे बड़ी सैन्य ताकत झोंक दी है। जवाब में अमेरिका ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाले अपने सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर फोर्ड को मोर्चे पर तैनात किया है। लेकिन इस $13 बिलियन (करीब 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक) की लागत वाले जहाज के अंदर एक गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है- जहाज के 650 टॉयलेट में से अधिकांश काम करना बंद कर चुके हैं।
US ने इस इलाके में USS गेराल्ड आर फोर्ड को भी तैनात किया है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर माना जाता है, जिससे इस्लामिक देश के साथ पूरी तरह से युद्ध के कयास लगाए जा रहे हैं।
लेकिन इन सबके बीच, USS गेराल्ड आर फोर्ड पर विदेश में तैनात नाविकों को एक अलग समस्या का सामना करना पड़ रहा है -- टॉयलेट संकट। यह एयरक्राफ्ट कैरियर पिछले साल जून से समुद्र में है। इसने जनवरी में वेनेजुएला के पूर्व प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन फोर्ड की तैनाती को और बढ़ाने के अमेरिकी प्रेसिडेंट के फैसले ने इसके लिए कई समस्याएं खड़ी कर दी हैं।
ज़्यादातर टॉयलेट काम नहीं कर रहे हैं
कई मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि लंबे समय तक तैनाती के कारण फोर्ड का सीवेज सिस्टम खराब हो गया है। मेंटेनेंस की कमी की वजह से, USS गेराल्ड आर फोर्ड के 650 टॉयलेट में से ज़्यादातर काम नहीं कर रहे हैं, जिसे USD 13 बिलियन में बनाया गया था।
सीवेज सिस्टम वैक्यूम-बेस्ड मॉड्यूल पर काम करता है। एक भी वाल्व फेल होने से सभी टॉयलेट में सक्शन बंद हो सकता है, जिससे नाविकों के लिए प्रॉब्लम को अलग करना मुश्किल हो जाएगा। प्रॉब्लम को ठीक करने के लिए जहाज़ को डॉक करना होगा, लेकिन खराब पानी में ऐसा होने की उम्मीद कम है। इसलिए, कैरियर पर प्रॉब्लम बनी हुई है।
नाविक नेवी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं
न्यूक्लियर पावर से चलने वाले USS गेराल्ड आर फोर्ड में लगभग 4,500 नाविक हैं, और उनमें से कई इस गड़बड़ी के बाद नेवी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। इस घटना की वजह से USS गेराल्ड आर फोर्ड के नाविकों और टेक्नीशियन के बीच एक-दूसरे पर इल्ज़ाम लगाने का खेल भी शुरू हो गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एयरक्राफ्ट कैरियर के कैप्टन डेविड स्कारोसी को भी नाविक की निराशा के बारे में पता है।
NPR न्यूज़ ने गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस की डायरेक्टर शेल्बी ओकले के हवाले से कहा, "इस बारे में सोचना ज़रूरी है, जैसे हम आप नाविकों से इन हालात में रहने के लिए कह रहे हैं। हमें कम से कम उन्हें रहने की सुविधाएँ तो देनी चाहिए, ताकि उन्हें उस मामले में किसी तरह की परेशानी न हो। और, बदकिस्मती से, हम यहीं हैं।"
ईरान के साथ हालात तनावपूर्ण होते जा रहे हैं, यह देखना होगा कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप USS गेराल्ड आर फोर्ड को वापस बुलाते हैं या नहीं, क्योंकि यह टॉयलेट की दिक्कत का सामना कर रहा है।
Continue reading on the app