France में प्रदर्शनों को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम, 70,000 पुलिसकर्मी तैनात
पेरिस में छात्रों और कामगारों ने स्कूलों को वित्तपोषण और जीवन-यापन के लिए बढ़ते खर्च के मुद्दों पर एक और मार्च निकालने की शनिवार को तैयारी की, जबकि एक हफ्ते पहले हुई हिंसक घटनाओं में दुकानों को लूटा गया और कारें जला दी गई थीं। इस बार का मार्च शहर के केंद्र से दूर, दक्षिण-पूर्वी हिस्से तक ही सीमित रखा गया है, जबकि पूरे फ्रांस में काफी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। पिछले हफ्ते दुकानों में लूटपाट, गाड़ियों में आगजनी और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों पर हमलों के बाद ऐसा लग रहा था कि सरकार का नियंत्रण समाप्त हो गया है।
नकाबपोश उपद्रवियों ने पेरिस सहित कई अन्य शहरों के मुख्य व्यावसायिक क्षेत्रों को निशाना बनाया था। पुलिस ने शुक्रवार को पोर्ट डी इटली और पोर्ट डी विन्सेनेस के बीच नया मार्ग निर्धारित किया, जिसने बास्तिल से नेशन तक के पूर्व निर्धारित मार्च की जगह ले ली। यह आंदोलन पिछले महीने पेरिस के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक उच्च विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर शुरू हुआ था।
छात्र और अधिक शिक्षक, बेहतर स्कूल भवन और विश्वविद्यालय में और अधिक सीटें चाहते हैं। यूनियनें लोगों को बढ़ती महंगाई का सामना करने में मदद के लिए बेहतर वेतन और पेंशन की मांग कर रही हैं। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि देशभर में करीब 70,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।
इसके अलावा हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां भी तैनात की गई हैं। पिछले सप्ताह पांच लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए थे, जिसे देखते हुए इस बार भी भारी भीड़ जुटने की आशंका है। संग्रहालय बंद हैं, और दुकानदार चिंतित हैं।
लूव्र, ओर्से संग्रहालय, पिकासो संग्रहालय और ग्रैंड पैलेस (जहां सेजान की एक बड़ी प्रदर्शनी लगी है) सहित कई प्रमुख संग्रहालय शनिवार को बंद हैं। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित समकालीन कला मेलों में से एक, आर्ट बेसल शुक्रवार को जनता के लिए खोला गया था, लेकिन यह केवल एक दिन के लिए ही खुला। अशांति की आशंका को देखते हुए आयोजकों ने सप्ताहांत के कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है।
अशांति के बाद, पेरिस पुलिस प्रमुख पैट्रिस फॉरे ने पेरिस के दुकानदारों से सुरक्षा गार्ड रखने की अपील की। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि कारोबारियों और उनके प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। पिछले सप्ताहांत पूरे फ्रांस में लगभग 3,000 दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया या उनमें लूटपाट की गई।
कुछ विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पेरिस और मार्सिले में विरोध मार्च आयोजित होने हैं, लेकिन ल्योन, नीस और मोंटपेलियर सहित कुछ अन्य स्थानों पर रैलियों पर स्थानीय प्रशासन ने रोक लगा दी है। फ्रांसीसी मीडिया के अनुसार, ल्योन में शनिवार सुबह पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
पेरिस के बाहर के शहर अशांति से बुरी तरह प्रभावित हुए। फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लिमोज के 19वीं सदी के सिटी हॉल को लगभग पूरी तरह नष्ट कर देने वाली आगजनी के मामले में दो संदिग्धों के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू की गई है और उन्हें मुकदमे तक हिरासत में रखा गया है। इस जांच में एक सरकारी अधिकारी की हत्या के प्रयास का मामला भी शामिल है।
ट्रेड यूनियनों ने इन प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए इन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है, जिसे संविधान द्वारा संरक्षण प्राप्त है। पेरिस से लगभग 110 किलोमीटर दक्षिण में स्थित ऑरलियन्स शहर में, शनिवार सुबह हजारों लोग एकत्र हुए।
यूपी में तीन नए एक्सप्रेसवे की तैयारी, 650 गांवों से गुजरेगा विकास का नया रास्ता, 15 हजार करोड़ में बनेगी बात
UP News: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर विकास की रफ्तार अब और तेज होने जा रही है. राज्य सरकार ने आम यात्रियों की सुविधा और माल ढुलाई के काम को नई गति देने के लिए एक साथ तीन नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण का बड़ा फैसला लिया है. इन तीनों विशाल सड़क परियोजनाओं के लिए करीब 8,200 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया पर सरकारी खजाने से 15,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. सरकार की यह पहल प्रदेश के दूरदराज के इलाकों को आपस में जोड़ने के साथ ही औद्योगिक गतिविधियों को बड़ा सहारा देगी.
तीन बड़े एक्सप्रेसवे का तैयार हुआ खाका
राज्य में शुरू होने जा रही इन परियोजनाओं में 320 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेसवे, 145 किलोमीटर लंबा मेरठ हरिद्वार एक्सप्रेसवे और 100 किलोमीटर लंबा विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे शामिल है. इन तीनों ही मार्गों का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीडा की देखरेख में पूरा किया जाएगा. शासन स्तर पर इन तीनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं के रूट और अलाइनमेंट को अंतिम रूप दे दिया गया है.
गांवों से गुजरेगा तरक्की का नया गलियारा
योजना के मुताबिक ये नए एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के करीब 650 गांवों और पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की सीमाओं से होकर गुजरेंगे. जमीन की जरूरत के लिहाज से देखें तो विंध्य एक्सप्रेसवे इस पूरी योजना की सबसे बड़ी कड़ी है. अकेले इस मार्ग के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के 109 गांवों से लगभग 4,615 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना तय हुआ है. यह मार्ग गंगा एक्सप्रेसवे को प्रयागराज, भदोही और मिर्जापुर होते हुए सीधे सोनभद्र जिले तक विस्तार देगा. सोनभद्र जैसे खनिज और ऊर्जा संपन्न जिले के सीधे जुड़ने से पूरे इलाके में व्यापार और रोजगार के नए अवसर खड़े होंगे.
मेरठ से हरिद्वार तक की राह होगी आसान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच धार्मिक और पर्यटन यात्रा को सुगम बनाने के लिए मेरठ हरिद्वार एक्सप्रेसवे को तैयार किया जा रहा है. यह मार्ग गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से आगे बढ़ाते हुए सीधे हरिद्वार तक लेकर जाएगा. इस खास प्रोजेक्ट के लिए पश्चिमी यूपी के अमरोहा और बिजनौर जिलों के 184 गांवों के साथ उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के कुछ हिस्सों से लगभग 2,020 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी. इसके तैयार होने से दिल्ली एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सफर करने वाले यात्रियों को भारी जाम से मुक्ति मिल सकेगी.
एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि वर्तमान में चल रहे और आने वाले नए एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को पूरा करने में रीढ़ की हड्डी साबित होंगे. बेहतर सड़कों के माध्यम से कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामानों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा. इससे माल ढुलाई की लागत में कमी आएगी और स्थानीय स्तर पर नए उद्योग स्थापित करने के लिए निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा.
कनेक्टिविटी के नए युग में प्रवेश करता प्रदेश
राज्य में आधुनिक सड़क तंत्र के विस्तार का यह सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है. हाल ही में 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था. अब उसी विशाल नेटवर्क को विंध्य और मेरठ हरिद्वार जैसे नए मार्गों से जोड़कर पूरे प्रदेश में एक मजबूत और निर्बाध सड़क तंत्र खड़ा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. इन तीनों नए एक्सप्रेसवे के धरातल पर उतरने के बाद उत्तर प्रदेश देश भर में आधुनिक सड़क अवसंरचना के मामले में एक मिसाल के रूप में उभरेगा.
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