Kal Ka Mausam: बदल सकता है मौसम का मिजाज! 7 राज्यों में बारिश-ओलावृष्टि का अलर्ट; जानें अगले 4 दिन का हाल
Kal Ka Mausam: देश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 24 घंटों के अंदर कई राज्यों में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है. इस बदलाव से तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है. कुछ जगहों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. उत्तर भारत के 13 जिलों में घने कोहरे का अलर्ट भी जारी किया गया है.
पूर्वोत्तरी राज्यों में ओलावृष्टी के आसार
पूर्वी मध्य प्रदेश, असम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और लक्षद्वीप में 25-26 फरवरी को गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की भी संभावना है. वहीं 27-28 फरवरी को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश के आसार हैं.
यूपी- दिल्ली में साफ रहेगा मौसम
उत्तर प्रदेश में 25 फरवरी को मौसम साफ रहेगा और बारिश की संभावना नहीं है. हालांकि सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर और बरेली में सुबह हल्की ठंड बढ़ सकती है. लखनऊ में अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम 15 डिग्री रहने का अनुमान है. दिल्ली में भी मौसम साफ रहेगा. तापमान में 1 से 2 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है. अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 14 डिग्री रहने की संभावना है.
बिहार-झारखंड में क्या होगा हाल
बिहार में भी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन गया, पटना और दरभंगा समेत कई जिलों में तापमान बढ़ सकता है. पटना में अधिकतम 29 और न्यूनतम 16 डिग्री तापमान रह सकता है. झारखंड में सुबह हल्का कोहरा और बादल छाए रहेंगे. रांची में अधिकतम तापमान 27 और न्यूनतम 14 डिग्री रहने का अनुमान है.
एमपी और राजस्थान में कैसा होगा मौसम
मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश के आसार हैं, जबकि राजस्थान में अब बारिश की संभावना नहीं है. तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में 1 मार्च तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.
यह भी पढ़ें: Kal ka Mausam: कहीं बारिश का अलर्ट तो कहीं बढ़ने लगी गर्मी, जानें अगले कुछ दिनों का मौसम
बाइपोलर डिसऑर्डर: उन्माद और अवसाद के बीच फंसा जीवन, डब्ल्यूएचओ से जानें समाधान
नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। हॉलीवुड एक्टर रॉबर्ट कैराडाइन ने 71 वर्ष की आयु में आत्महत्या कर ली। उनके परिवार ने पुष्टि की कि वह लंबे समय से बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी गंभीर मानसिक समस्या से जूझ रहे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जो व्यक्ति के मूड, एनर्जी, एक्टविटी और सोच को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
इस बीमारी में व्यक्ति का मूड चरम पर बदलता रहता है। वह कभी उन्माद (मैनिया या हाइपोमेनिया) और कभी गहरी उदासी या अवसाद में चला जाता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 37 मिलियन लोग (वैश्विक आबादी का 0.5 प्रतिशत) बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों में दिखती है, लेकिन युवाओं में भी हो सकती है। पुरुषों और महिलाओं में इसकी व्यापकता लगभग बराबर है।
बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों को गलत निदान, अपर्याप्त इलाज और समाज में कलंक का सामना करना पड़ता है। कई लोगों को उचित उपचार नहीं मिल पाता, जिस वजह से यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन बताता है कि बाइपोलर डिसऑर्डर में दो मुख्य चरण होते हैं। इनमें पहला उन्माद या हाइपोमेनिया है, जिसमें व्यक्ति बहुत अधिक एनर्जी से भरा, खुश, उत्साहित या चिड़चिड़ा हो जाता है। इस स्थिति में वह तेजी से बोलता है, कम नींद लेता है, रिस्क भरे काम करता है। उसे कभी-कभी भ्रम भी हो सकता है।
वहीं, दूसरी स्थिति अवसाद की होती है। इस दौरान उदासी, रुचि की कमी, थकान, नींद या भूख न लगना या ज्यादा लगना, अपराधबोध महसूस करना, निराशा और आत्महत्या के विचार तक आ सकते हैं। ये लक्षण लंबे समय तक रह सकते हैं।
बाइपोलर जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करता है – रिश्ते बिगड़ते हैं, शिक्षा और काम प्रभावित होते हैं। इससे आत्महत्या का खतरा बहुत बढ़ जाता है। बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोग धूम्रपान, शराब या नशे की लत में ज्यादा पड़ते हैं, शारीरिक बीमारियां भी ज्यादा होती हैं।
स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सही देखभाल से बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोग सार्थक जीवन जी सकते हैं। समाज में कलंक कम करना और समय पर इलाज उपलब्ध कराना जरूरी है। बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज पूरी तरह संभव है।
दवाएं:- मूड स्टेबलाइजर (जैसे लिथियम, वैल्प्रोएट) और एंटीसाइकोटिक्स से उन्माद और अवसाद को नियंत्रित किया जा सकता है। दवाओं से पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलती है।
मनोचिकित्सा:- संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा, पारिवारिक थेरेपी से लक्षण कम होते हैं और रिकवरी तेज होती है।
जीवनशैली:- नियमित नींद, व्यायाम, स्वस्थ आहार और तनाव प्रबंधन बहुत जरूरी हैं।
सहायता:- परिवार, दोस्त और सहायता समूह का साथ महत्वपूर्ण है।
--आईएएनएस
एमटी/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation























