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बाइपोलर डिसऑर्डर: उन्माद और अवसाद के बीच फंसा जीवन, डब्ल्यूएचओ से जानें समाधान

नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। हॉलीवुड एक्टर रॉबर्ट कैराडाइन ने 71 वर्ष की आयु में आत्महत्या कर ली। उनके परिवार ने पुष्टि की कि वह लंबे समय से बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी गंभीर मानसिक समस्या से जूझ रहे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जो व्यक्ति के मूड, एनर्जी, एक्टविटी और सोच को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

इस बीमारी में व्यक्ति का मूड चरम पर बदलता रहता है। वह कभी उन्माद (मैनिया या हाइपोमेनिया) और कभी गहरी उदासी या अवसाद में चला जाता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 37 मिलियन लोग (वैश्विक आबादी का 0.5 प्रतिशत) बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों में दिखती है, लेकिन युवाओं में भी हो सकती है। पुरुषों और महिलाओं में इसकी व्यापकता लगभग बराबर है।

बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों को गलत निदान, अपर्याप्त इलाज और समाज में कलंक का सामना करना पड़ता है। कई लोगों को उचित उपचार नहीं मिल पाता, जिस वजह से यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन बताता है कि बाइपोलर डिसऑर्डर में दो मुख्य चरण होते हैं। इनमें पहला उन्माद या हाइपोमेनिया है, जिसमें व्यक्ति बहुत अधिक एनर्जी से भरा, खुश, उत्साहित या चिड़चिड़ा हो जाता है। इस स्थिति में वह तेजी से बोलता है, कम नींद लेता है, रिस्क भरे काम करता है। उसे कभी-कभी भ्रम भी हो सकता है।

वहीं, दूसरी स्थिति अवसाद की होती है। इस दौरान उदासी, रुचि की कमी, थकान, नींद या भूख न लगना या ज्यादा लगना, अपराधबोध महसूस करना, निराशा और आत्महत्या के विचार तक आ सकते हैं। ये लक्षण लंबे समय तक रह सकते हैं।

बाइपोलर जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करता है – रिश्ते बिगड़ते हैं, शिक्षा और काम प्रभावित होते हैं। इससे आत्महत्या का खतरा बहुत बढ़ जाता है। बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोग धूम्रपान, शराब या नशे की लत में ज्यादा पड़ते हैं, शारीरिक बीमारियां भी ज्यादा होती हैं।

स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सही देखभाल से बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोग सार्थक जीवन जी सकते हैं। समाज में कलंक कम करना और समय पर इलाज उपलब्ध कराना जरूरी है। बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज पूरी तरह संभव है।

दवाएं:- मूड स्टेबलाइजर (जैसे लिथियम, वैल्प्रोएट) और एंटीसाइकोटिक्स से उन्माद और अवसाद को नियंत्रित किया जा सकता है। दवाओं से पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलती है।

मनोचिकित्सा:- संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा, पारिवारिक थेरेपी से लक्षण कम होते हैं और रिकवरी तेज होती है।

जीवनशैली:- नियमित नींद, व्यायाम, स्वस्थ आहार और तनाव प्रबंधन बहुत जरूरी हैं।

सहायता:- परिवार, दोस्त और सहायता समूह का साथ महत्वपूर्ण है।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Kisan Credit Card Scheme: किसानों के लिए बड़ी राहत! KCC में किए अहम बदलाव

Kisan Credit Card Scheme: आरवी गुप्ता समिति की सिफारिश पर साल 1998 में शुरू की गई किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना का मकसद किसानों को आसान और सस्ता कर्ज उपलब्ध कराना था. इसके जरिए किसान बीज, खाद और खेती से जुड़ी जरूरी चीजें खरीद सकें. साल 2004 में इस योजना को खेती से जुड़ी अन्य गतिविधियों से जोड़ा गया. फिर 2019 में इसमें बड़ा बदलाव करते हुए डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन को भी शामिल किया गया. इससे किसानों की गैर-फसल आय बढ़ाने में मदद मिली. 2020 में भी कुछ सुधार किए गए.

योजना में फिर से अहम बदलाव की तैयारी

अब इस योजना में फिर से अहम बदलाव की तैयारी है. सबसे बड़ा प्रस्ताव यह है कि कर्ज चुकाने की अवधि 12 महीने से बढ़ाकर 6 साल तक की जा सकती है. फिलहाल किसान को एक साल के भीतर कर्ज चुकाना होता है, जो फसल कटाई और बिक्री पर निर्भर करता है. नई व्यवस्था लागू होने पर किसानों को बार-बार नया कार्ड बनवाने या बैंक के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

आम जनता से मांगे गए सुझाव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने योजना को और लचीला और किसानों के अनुकूल बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन पर 6 मार्च तक आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं. नई नियमावली कॉमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों पर लागू होगी.

कैसी है नई व्यवस्था

नई व्यवस्था में फसल को उसकी अवधि के आधार पर बांटा गया है. छोटी अवधि की फसल के लिए 12 महीने और लंबी अवधि की फसल के लिए 18 महीने का ऋण मिलेगा. अब तकनीक से जुड़े खर्च भी ऋण में शामिल किए जाएंगे, जो पहले नहीं होते थे.

बिना किसी गारंटी के किसानों को मिलेगा कर्ज

किसान अब 1.6 लाख रुपये तक का कर्ज बिना किसी गारंटी के ले सकते हैं. इसमें 50 हजार रुपये का बीमा कवर भी शामिल है. यह योजना छोटे और सीमांत किसानों, बटाईदारों, किराए पर खेती करने वालों और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी फायदेमंद है. सरकार और RBI का मकसद है कि किसानों को समय पर पर्याप्त कर्ज मिले, ताकि वे साहूकारों से बच सकें और अपनी आय बढ़ा सकें. नए बदलावों से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है.

यह भी पढ़ें: Pashu Kisan Credit Card : अब क्रेडिट कार्ड से खरीदें गाय-भैंस, बनवाने के लिए ऐसे करें आवेदन

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