'लोकसभा में पहली बार विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया गया', भोपाल में किसान महाचौपाल के दौरान बोले राहुल गांधी
Rahul Gandhi in Bhopal: कांग्रेस अध्यक्ष मल्किकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में किसान महाचौपाल का आयोजन किया. इस दौरान राहुल गांधी ने कार्यक्रम में पहुंचे किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि, राहुल गांधी ने कहा कि संसद में आपने मेरा भाषण देखा. राहुल गांधी ने कहा कि प्रेसिडेंट एड्रेस होता है. उसमें हर साल राष्ट्रति का भाषण होता है उसके बाद पहला स्पीकर विपक्ष का नेता होता है, ये हर साल हुआ है.
मैं राष्ट्रीय सुरक्षा की बात कर रहा था- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया गया. कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं वहां राष्ट्रीय सुरक्षा की बातद कर रहा था, लेकिन सदन में मुझे बोलने नहीं दिया गया. राहुल गांधी ने कहा कि चार-पांच घंटे तक मुझे बोलने नहीं दिया गया. मेरा विरोध किया गया. अगले दिन भी मुझे लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया.
अमेरिकी ट्रेड डील को लेकर क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने कहा कि मुझे लोकसभा में क्यों नहीं बोलने दिया गया. इसके पीछे की वजह अमेरिका की डील थी. राहुल गांधी ने कहा कि चार महीने के लिए हिंदुस्तान और अमेरिका का समझौता रुका हुआ था. उसके पीछे की वजह कृषि थी. राहुल गांधी ने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियां सोया, कपास, गुटका हिंदुस्तान में बेच पाएं, दाल हिंदुस्तान में बेच पाएं. हिंदुस्तान का कोई किसान नहीं चाहता. कोई राजनेता नहीं चाहता और हिंदुस्तान की सरकार भी नहीं चाहती थी. इसलिए चार महीने तक चर्चा बंद पड़ी रही.
अब 'केरलम' के नाम से जाना जाएगा केरल, केंद्रीय कैबिनेट में कई अन्य प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक मंगलवार को आयोजित हुई. इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा के साथ कुछ प्रस्तावों को मंजूरी भी दी गई. इसी कड़ी में अब केरल का नाम बदलकर उसे केरलम किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है. यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जिससे इस कदम को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के साथ अब यह प्रस्ताव आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के लिए बढ़ेगा. राज्य सरकार लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रही थी, जिसे अब औपचारिक समर्थन मिल गया है.
Union Cabinet approves the proposal for alteration of name of State of ‘Kerala’ as ‘Keralam’ pic.twitter.com/uVydvy5fFl
— ANI (@ANI) February 24, 2026
विधानसभा का सर्वसम्मत प्रस्ताव
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम ‘केरलम’ करने की अपील की थी. इससे पहले अगस्त 2023 में भी इसी आशय का प्रस्ताव पारित कर भेजा गया था, लेकिन गृह मंत्रालय ने उसमें कुछ तकनीकी संशोधन सुझाए थे.
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— PIB India (@PIB_India) February 24, 2026
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मुख्यमंत्री विजयन की पहल
बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने यह प्रस्ताव सदन में पेश किया था. उनका तर्क था कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है और यह नाम राज्य की सांस्कृतिक पहचान के अधिक करीब है.
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा था कि मलयालम भाषी समुदायों के लिए एकीकृत ‘केरलम’ की अवधारणा स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही प्रबल रही है. हालांकि भारतीय संविधान के प्रथम अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है, जिसे बदलने के लिए संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया आवश्यक है.
संवैधानिक और राजनीतिक महत्व
नाम परिवर्तन का प्रस्ताव केवल प्रतीकात्मक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सांस्कृतिक स्वाभिमान से भी जोड़ा जा रहा है. यदि संविधान की अनुसूचियों में आवश्यक संशोधन किए जाते हैं, तो आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ दर्ज किया जाएगा. अब निगाहें आगे की संसदीय प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिसके बाद ‘केरलम’ नाम को संवैधानिक मान्यता मिल सकेगी.
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