यूरोप में गर्मी से इस साल रिकॉर्ड 50 हजार मौतें:65% मौतों की वजह क्लाइमेट चेंज, 2022 से 71% ज्यादा; 854 शहरों पर स्टडी
यूरोप में इस साल जून से अगस्त के बीच भीषण गर्मी के कारण 50,391 लोगों की मौत हुई। इनमें 32,619 मौतों के लिए जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) को जिम्मेदार माना गया है। कोयला, तेल और गैस जलाने से बढ़ते वैश्विक तापमान ने गर्मी को और जानलेवा बना दिया। इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने यूरोप के 854 शहरों के तापमान और मौतों के आंकड़ों का अध्ययन कर यह अनुमान लगाया। इन शहरों में यूरोप की करीब 40% आबादी रहती है। 2022 की तुलना में इस बार गर्मी से होने वाली मौतें 71% बढ़ गईं। उस साल 29,480 लोगों की जान गई थी। सबसे ज्यादा मौतें इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में हुई हैं। गर्मी से 20 से 44 साल के 800 से ज्यादा लोगों की भी मौत हुई। अकेले 17 जून से 1 जुलाई के बीच करीब एक-तिहाई मौतें हुईं। इस दौरान तापमान सामान्य से 5.3°C ज्यादा था। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मई की हीटवेव को शामिल नहीं किए जाने के कारण वास्तविक मौतों का आंकड़ा और ज्यादा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यूरोप का बुनियादी ढांचा इतनी भीषण गर्मी से निपटने के लिए तैयार नहीं है। 75 साल में धरती के 2.8 डिग्री ज्यादा गर्म होने की आशंका यूएनईपी की एमिशन्स गैप रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा नीतियां जारी रहीं तो अगले 75 वर्षों में धरती औद्योगिक युग से पहले के मुकाबले 2.8 डिग्री ज्यादा गर्म हो सकती है। गोयल बोले- यूरोप आठ गुना ज्यादा कार्बन उत्सर्जन कर रहा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में विकसित देशों पर क्लाइमेट चेंज से निपटने की जिम्मेदारी नहीं निभाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूरोप में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत से 7-8 गुना ज्यादा है। विकसित देशों ने मदद के लिए हर साल 9.49 लाख करोड़ जुटाने का वादा किया था, पर 11 साल बीत गए, लेकिन हमें एक पैसा भी नहीं मिला। बंगाल की खाड़ी में तीन दिन बाद चक्रवात की आशंका बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि यह 24 अक्टूबर को डिप्रेशन, 25 को डीप डिप्रेशन और 26 अक्टूबर की सुबह चक्रवात बन सकता है। इसके बाद यह उत्तरी आंध्र प्रदेश व ओडिशा के तटों की ओर बढ़ेगा। दोनों राज्यों में 27 से 29 अक्टूबर के बीच भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी है।
रूसी डीजल की पहली खेप अमेरिका रवाना:जहाज पर करीब 3 लाख बैरल डीजल लदा; देश में डीजल की कीमतें कम करना चाहते हैं ट्रम्प
अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच रूस से करीब 3 लाख बैरल डीजल लेकर एक टैंकर अमेरिका के लिए रवाना हुआ है। जहाज 10 नवंबर को न्यूयॉर्क पहुंच सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच वैश्विक बाजार में ईंधन की सप्लाई बढ़ाने पर सहमति के बाद यह पहली खेप है। ट्रम्प प्रशासन रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील देकर ईंधन की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। एनबीसी न्यूज के मुताबिक, माल्टा के झंडे वाला टैंकर ‘एगियोई फानेंदेस’ शुक्रवार को रूस के प्रिमोर्स्क बंदरगाह से रवाना हुआ। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली कंपनी एनर्जी एस्पेक्ट्स ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि जहाज पर करीब 2.98 लाख बैरल डीजल लदा है। अमेरिका में डीजल की कीमत 78% बढ़ी अमेरिका में इस साल डीजल की औसत कीमत 3.55 डॉलर प्रति गैलन से बढ़कर 6.32 डॉलर हो गई है। यानी इसमें करीब 78% की बढ़ोतरी हुई है। ईरान युद्ध और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं। डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। खेती, माल ढुलाई और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ता है। सामान की ढुलाई महंगी होने से कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिसका बोझ आखिरकार आम लोगों पर भी पड़ सकता है। रूस पर प्रतिबंधों में ढील दे रहे ट्रम्प ट्रम्प प्रशासन ने करीब दो हफ्ते पहले रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी थी। इसके बाद कुछ और पाबंदियों में भी राहत दी गई। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब रूस का यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी है। ट्रम्प रूस के साथ संबंध सुधारने और यूक्रेन पर युद्ध खत्म करने के लिए दबाव बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को कहा कि रूसी ऊर्जा मंत्रालय ने पहले टैंकर के रवाना होने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि आगे भी ईंधन की खेप नियमित रूप से भेजी जा सकती है। अमेरिका की रोजाना खपत से बहुत कम है खेप अमेरिका में हर दिन करीब 38 लाख बैरल डीजल की खपत होती है। ऐसे में रूस से आ रही करीब 2.98 लाख बैरल की खेप देश की एक दिन की जरूरत भी पूरी नहीं कर पाएगी। ऊर्जा बाजार की कंपनी एनर्जी एस्पेक्ट्स के विश्लेषकों का मानना है कि इस खेप से कीमतों पर असर सीमित रहेगा। बैंक ऑफ अमेरिका के कमोडिटी विशेषज्ञ फ्रांसिस्को ब्लांच के मुताबिक, दुनिया में डीजल जैसे रिफाइंड ईंधनों की सप्लाई कम हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जहाजों पर हमलों और रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमलों ने भी सप्लाई को प्रभावित किया है। कीमतें घटाने के लिए कई कदम उठा रहे ट्रम्प डीजल की कीमतें कम करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। इनमें ऑफ-रोड इस्तेमाल वाले डीजल के ज्यादा इस्तेमाल की अनुमति देना और यूरोपीय देशों पर अपने डीजल भंडार जारी करने का दबाव बनाना शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने कच्चे तेल और डीजल के रणनीतिक भंडार से नई खेप जारी करने की कोशिश भी की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद विशेषज्ञों को कीमतों में जल्द बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। ब्लांच के मुताबिक, सरकारी कदम कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं, लेकिन डीजल की कीमतें घटाने का कोई आसान समाधान नहीं है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका, बोले- हमें फायदा, रूस से कर चुका डीजल खरीद डील अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के हित में है। पूरी खबर पढ़ें…
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