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Ranji Trophy Final: जम्मू-कश्मीर की पहले खिताब पर नजर, कर्नाटक से हुबली में होगी टक्कर

Ranji Trophy Final: घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े मंच रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन का फाइनल मंगलवार से खेला जाएगा। एक तरफ अनुभव से भरी कर्नाटक है, तो दूसरी ओर इतिहास रचने के करीब पहुंची जम्मू-कश्मीर की टीम। चार महीने से ज्यादा चले इस लंबे सीजन के बाद अब दोनों टीमें खिताब से सिर्फ एक कदम दूर हैं।

जम्मू-कश्मीर के लिए यह सीजन किसी सपने से कम नहीं रहा है। टीम ने कई मजबूत टीमों को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। शुरुआत जरूर मुंबई से 35 रन की हार के साथ हुई थी लेकिन उसके बाद जम्मू-कश्मीर ने जबरदस्त वापसी की। क्वार्टरफाइनल में मध्य प्रदेश को 56 रन से हराया और सेमीफाइनल में बंगाल को 6 विकेट से मात देकर फाइनल का टिकट कटाया।

आकिब नबी जम्मू-कश्मीर के ट्रंप कार्ड
इस शानदार सफर में तेज गेंदबाज आकिब नबी सबसे बड़े हीरो बनकर उभरे। उन्होंने इस सीजन में 9 मैचों की 16 पारियों में 55 विकेट लिए और औसत सिर्फ 12.72 का रहा है। सेमीफाइनल में 9 विकेट और उससे पहले एमपी के खिलाफ 12 विकेट लेकर उन्होंने टीम को यहां तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। गेंद के साथ-साथ बल्ले से भी उन्होंने धमाल मचाया और शतक भी ठोका। 

कर्नाटक की ताकत बल्लेबाजी
दूसरी तरफ कर्नाटक की टीम अनुभव और रिकॉर्ड दोनों में भारी है। टीम 14 बार फाइनल खेल चुकी और 8 बार खिताब जीत चुकी। इस बार भी उनका बल्लेबाजी क्रम बेहद खतरनाक फॉर्म में है। खासकर आर स्मरण ने इस सीजन में रन बनाने की मशीन जैसा प्रदर्शन किया है। 13 पारियों में 950 रन, चार शतक और दो दोहरे शतक उनके नाम हैं।

केएल राहुल पर रहेंगी नजरें
टीम के स्टार बल्लेबाज केएल राहुल ने भी कर्नाटक को मजबूती दी है। 6 पारियों में 457 रन, दो शतक और दो अर्धशतक उनके खाते में हैं। वहीं कप्तान देवदत्त पडिक्कल, करुण नायर और मयंक अग्रवाल जैसे बल्लेबाज किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तोड़ने की क्षमता रखते हैं।

सेमीफाइनल में कर्नाटक ने जिस तरह 736 रन का विशाल स्कोर बनाया, उससे साफ है कि उनकी बल्लेबाजी कितनी मजबूत है। हालांकि इस बार मुकाबला आसान नहीं होगा, क्योंकि जम्मू-कश्मीर की गेंदबाजी भी पूरे टूर्नामेंट में शानदार रही है।

कर्नाटक का रिकॉर्ड बेहतर
दोनों टीमों के बीच रणजी ट्रॉफी में अब तक चार मुकाबले हुए हैं और हर बार कर्नाटक ने जीत दर्ज की है, जिनमें 2 जीत पारी से रही हैं। लेकिन फाइनल का दबाव अलग होता है और जम्मू-कश्मीर पहली बार ट्रॉफी जीतने के सपने के साथ मैदान में उतरेगी। मैच हुबली में खेला जाएगा, जहां मौसम साफ रहने का अनुमान है और तापमान 20 से 30 डिग्री के बीच रहेगा। ऐसे में पूरे पांच दिन रोमांचक क्रिकेट देखने को मिल सकता है।

कर्नाटक 9वां खिताब जीतकर अपनी विरासत मजबूत करना चाहेगी, जबकि जम्मू-कश्मीर इतिहास रचने की कोशिश करेगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि अनुभव जीतता है या जज्बा।

जम्मू और कश्मीर (संभावित प्लेइंग-11): 1 शुभम खजूरिया, 2 यावर हसन, 3 शुभम पुंडीर, 4 पारस डोगरा (कप्तान), 5 अब्दुल समद, 6 कन्हैया वधावन, 7 आबिद मुश्ताक, 8 वंशज शर्मा, 9 औकिब नबी, 10 युद्धवीर सिंह, 11 सुनील कुमार।

कर्नाटक (संभावित प्लेइंग-11): 1 केएल राहुल, 2 मयंक अग्रवाल, 3 देवदत्त पडिक्कल (कप्तान), 4 करुण नायर, 5 आर स्मरण, 6 श्रेयस गोपाल, 7 कृतिक कृष्णा (विकेट कीपर), 8 विद्याधर पाटिल, 9 विजयकुमार वैश्यक, 10 शिखर शेट्टी, 11 प्रसिद्ध कृष्णा।

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Jammu Kashmir: किश्तवाड़ में 326 दिन चला ऑपरेशन, जैश कमांडर सैफुल्लाह समेत 7 आतंकी ढेर

Jammu-Kashmir: व्हाइट नाइट कॉर्प्स (White Knight Corps) ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चतरू इलाके में बड़ी कामयाबी हासिल की है. सेना ने बताया कि 326 दिनों तक चले संयुक्त ऑपरेशन में सात खूंखार आतंकियों को मार गिराया गया. यह ऑपरेशन बेहद कठिन हालात में अंजाम दिया गया.

कड़ाके की ठंड के बीच भी जारी रहा अभियान

सेना के अनुसार, चतरू और आसपास के ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में कड़ाके की ठंड, लगातार बारिश और बर्फबारी के बीच सुरक्षाबलों ने अभियान जारी रखा. इस मिशन में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और Central Reserve Police Force ने मिलकर काम किया. मजबूत खुफिया तंत्र के आधार पर आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और आखिरकार उन्हें घेरकर मार गिराया गया.

ऑपरेशन में आधुकनिक तकनीक का इस्तेमाल

मारे गए आतंकी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed से जुड़े थे. सुरक्षाबलों ने जैश के कमांडर सैफुल्लाह और उसके साथियों को ढेर कर दिया. सेना ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया. इसमें एफपीवी ड्रोन, सैटेलाइट इमेज और आरपीए/यूएवी जैसे उपकरण शामिल थे, जिनकी मदद से आतंकियों की सटीक लोकेशन का पता लगाया गया.

कई बार हो चुकी है मुठभेड़

पिछले एक साल में चतरू के घने जंगलों में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच कई बार मुठभेड़ हुई. दबाव बढ़ने पर आतंकी लगातार अपनी जगह बदलते रहे. वे किश्तवाड़ से डोडा, कठुआ और उधमपुर जिलों तक भागते रहे, लेकिन सुरक्षाबलों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. आखिरकार, सुरक्षाबलों ने उन्हें घेरकर खत्म कर दिया.

आगे भी जारी रहेगा अभियान

सेना ने कहा कि यह कार्रवाई आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है. जवानों के साहस और खुफिया एजेंसियों के समन्वय से यह सफलता मिली है. इससे पहले 7 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने जम्मू में सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी. उन्होंने सुरक्षाबलों को पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकियों के खिलाफ मिशन मोड में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. सेना ने साफ कहा है कि आतंक के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा.

यह भी पढ़ें: किश्तवाड़ एनकाउंटर: सेना ने तीसरे आतंकवादी को मार गिराया, भारी मात्रा में हथियार बरामद

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  Sports

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