न कार न बंगला.. 15 साल की बेटी ने उठाया कांवर, महादेव से मांगी सिर्फ पढ़ाई की मदद
15 साल की साधना ने गरीबी, कर्ज और स्कूल फीस की चिंता के बीच हिम्मत नहीं हारी. दिव्यांग माता-पिता के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गांव कोसीकलां तक पैदल निकली है. उसका विश्वास है कि भोले बाबा उसकी पढ़ाई और परिवार की परेशानियां दूर करेंगे. आस्था, संघर्ष और उम्मीद की यह कहानी हर किसी को प्रेरित करती है.
सुल्तानपुर का धम्मौर इलाका बौद्ध काल से जुड़ा, यहां मिली प्राचीन बुद्ध मूर्तियां, बौद्ध संस्कृति के प्रचार का केंद्र रहा यह क्षेत्र
Sultanpur buddhist place: सुल्तानपुर एक समय में बौद्ध काल के कई साक्ष्य आज भी छोड़ कर गया है. कुछ स्थान के नाम भी बौद्ध कृतियां और जीवन दर्शन से जुड़ा हुआ है. इसी तरह सुल्तानपुर के कुड़वार से दक्षिण दिशा में लगभग 12 किलोमीटर के बाद सदर तहसील में धम्मौर का क्षेत्र है. जिसका संस्कृत का शब्द धर्म पाली में धर्म हो गया. बौद्ध काल में हुआ प्रचार प्रसारइस प्रकार यह माना जाता है कि संस्कृत का धर्म शब्द पालि में धम्म हो गया. जहां से बौद्ध कालीन प्राचीन मूर्तियां भी मिली.
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