Dal Kachori Recipe: हलवाई जैसी दाल की कचौड़ियां खाएंगे तो चाट लेंगे उंगलियां, बनाने की ये है ईज़ी रेसिपी
Dal Kachori Recipe: सुबह का ब्रेकफास्ट हो या शाम की चाय, गरमागरम दाल की कचौड़ी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। बाजार में हलवाई की दुकान पर सजी सुनहरी, फूली-फूली कचौड़ियां देखकर खुद को रोक पाना मुश्किल होता है। लेकिन अब वही स्वाद आप घर पर भी आसानी से पा सकते हैं।
अगर आपको लगता है कि हलवाई जैसी खस्ता और मसालेदार कचौड़ी बनाना मुश्किल है, तो यह खबर आपके लिए है। सही मसालों का संतुलन और आटे की सही गूंथाई से आप घर पर ऐसी दाल कचौड़ी तैयार कर सकते हैं कि परिवार वाले उंगलियां चाटते रह जाएं।
दाल कचौड़ी बनाने के लिए सामग्री
आटे के लिए
- 2 कप मैदा
- 3 बड़े चम्मच तेल या घी (मोयन के लिए)
- स्वादानुसार नमक
- गुनगुना पानी (गूंथने के लिए)
दाल की स्टफिंग के लिए
- 1 कप धुली मूंग दाल (2-3 घंटे भिगोई हुई)
- 1 छोटा चम्मच सौंफ
- 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
- 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला
- चुटकी भर हींग
- स्वादानुसार नमक
- 1 बड़ा चम्मच तेल
दाल कचौड़ी बनाने का तरीका
दाल कचौड़ी एक ऐसी डिश है जिसे बच्चे और बड़े समान रूप से पसंद करते हैं। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा लें। उसमें नमक और मोयन के लिए तेल या घी डालकर अच्छे से मिक्स करें। हथेलियों से रगड़ते हुए ऐसा मिलाएं कि मैदा में हल्की सी चिकनाई आ जाए।
अब थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें। आटे को ढककर 15-20 मिनट के लिए सेट होने दें। यही खस्ता कचौड़ी का राज है। अब भीगी हुई मूंग दाल का पानी निकालकर उसे दरदरा पीस लें। ध्यान रहे कि पेस्ट बिल्कुल महीन न हो।
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अब कढ़ाही में तेल गरम करें। उसमें हींग और सौंफ डालें। खुशबू आने लगे तो पिसी दाल डाल दें। अब धनिया पाउडर, लाल मिर्च, गरम मसाला और नमक मिलाएं। धीमी आंच पर दाल को तब तक भूनें जब तक वह सूखी और भुरभुरी न हो जाए। गैस बंद कर मिश्रण ठंडा होने दें।
आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें। हर लोई को थोड़ा सा बेलें और बीच में 1-2 चम्मच दाल की स्टफिंग रखें। किनारों को जोड़कर अच्छी तरह बंद करें। अब हल्के हाथ से इसे दबाकर कचौड़ी का आकार दें। ध्यान रखें कि स्टफिंग बाहर न निकले।
कढ़ाही में तेल मध्यम आंच पर गरम करें। तेल ज्यादा तेज नहीं होना चाहिए, वरना कचौड़ी बाहर से जल जाएगी और अंदर से कच्ची रह जाएगी। कचौड़ियों को धीमी से मध्यम आंच पर सुनहरा और खस्ता होने तक तलें। तलते समय उन्हें हल्के से दबाते रहें ताकि वे अच्छे से फूल जाएं। तैयार कचौड़ियों को टिश्यू पेपर पर निकाल लें।
गरमागरम दाल कचौड़ी को आलू की सब्जी, हरी चटनी या इमली की चटनी के साथ सर्व करें। यह रेसिपी खास मौकों या वीकेंड ब्रंच के लिए परफेक्ट है। एक बार घर पर बनाकर देखेंगे तो बाजार की कचौड़ी भूल जाएंगे।
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Dry Ginger Powder: जोड़ों के दर्द से आराम दिलाएगा सोंठ का पाउडर, 5 समस्याओं में दिलाता है राहत
Dry Ginger Powder: रसोई में रखी छोटी-सी सौंठ (सूखी अदरक) को अक्सर लोग सिर्फ मसाले की तरह इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही सौंठ कई आम बीमारियों में असरदार घरेलू उपाय साबित हो सकती है? आयुर्वेद में सौंठ को 'महाऔषधि' कहा गया है, क्योंकि यह शरीर को अंदर से गर्म रखती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है। बदलते मौसम में जब सर्दी-खांसी, गैस या जोड़ों का दर्द परेशान करता है, तब सौंठ का सेवन राहत दिला सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग छोटी-छोटी समस्याओं के लिए तुरंत दवा ले लेते हैं, लेकिन रसोई में मौजूद प्राकृतिक चीजें भी उतनी ही असरदार हो सकती हैं। सौंठ में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और पाचन सुधारने वाले गुण पाए जाते हैं।
5 समस्याओं में सौंठ दिलाएगी राहत
सर्दी-खांसी और गले की खराश में फायदेमंद
सौंठ की तासीर गर्म होती है, जो सर्दी-जुकाम में बेहद लाभकारी मानी जाती है। सौंठ का काढ़ा या सौंठ-शहद का मिश्रण गले की खराश कम करता है और बलगम ढीला करने में मदद करता है। नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में सौंठ लेने से सर्दी की समस्या जल्दी ठीक हो सकती है।
पाचन संबंधी समस्याओं में राहत
अगर आपको गैस, अपच या पेट फूलने की शिकायत रहती है, तो सौंठ कारगर उपाय हो सकती है। सौंठ पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करती है, जिससे खाना जल्दी पचता है। खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ चुटकीभर सौंठ लेने से पेट हल्का महसूस होता है।
जोड़ों के दर्द में सहायक
सौंठ में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। जोड़ों के दर्द या गठिया की समस्या में सौंठ का सेवन फायदेमंद माना जाता है। सौंठ का पाउडर दूध में मिलाकर लेने से दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है।
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पीरियड्स के दर्द में आराम
महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द में भी सौंठ राहत दे सकती है। सौंठ की चाय पीने से पेट दर्द और ऐंठन कम हो सकती है, क्योंकि यह शरीर को गर्म रखती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करती है।
इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार
सौंठ में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में सौंठ का सेवन करने से मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
सेवन करते समय रखें सावधानी
सौंठ का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में लेने से एसिडिटी या जलन हो सकती है। गर्भवती महिलाएं या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति डॉक्टर की सलाह लेकर ही सेवन करें।
(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)
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(लेखक:कीर्ति)
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