'भारत-अमेरिका एआई अवसर साझेदारी’ का ऐलान, पैक्स सिलिका के तहत टेक सहयोग को नई रफ्तार
वॉशिंगटन, 22 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका और भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए ‘यू.एस.-इंडिया एआई अवसर साझेदारी’ की संयुक्त घोषणा की है। यह समझौता ‘पैक्स सिलिका घोषणा’ के तहत एक द्विपक्षीय परिशिष्ट के रूप में किया गया है।
दोनों देशों ने कहा कि 21वीं सदी का भविष्य एआई की भौतिक बुनियाद- महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, कंप्यूटिंग क्षमता और सेमीकंडक्टर निर्माण पर निर्भर करेगा। इस संदर्भ में अमेरिका और भारत ने भरोसेमंद सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और मुक्त उद्यम को एआई विकास का आधार बनाने की साझा प्रतिबद्धता जताई।
संयुक्त बयान में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजीज’ (ट्रस्ट) पहल के तहत व्यक्त दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए दोनों देश एआई को डर के बजाय अवसर के रूप में देखते हैं। दोनों पक्षों का मानना है कि स्वतंत्र दुनिया के सामने सबसे बड़ा जोखिम एआई की प्रगति नहीं, बल्कि उसमें नेतृत्व करने में विफल रहना है।
दोनों देशों ने एआई सहयोग के लिए कई प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं। अमेरिका और भारत ऐसे नियामक ढांचे को बढ़ावा देंगे जो तकनीकी नवाचार और निवेश को प्रोत्साहित करे। उद्देश्य है कि स्टार्टअप्स, डेवलपर्स, कोडर्स और प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित और भरोसेमंद एआई सिस्टम विकसित करने, परीक्षण करने और तेजी से विस्तार करने का अवसर मिले।
पैक्स सिलिका ढांचे के तहत दोनों देश ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार, महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन, कुशल कार्यबल के विकास और विश्वसनीय सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में संयुक्त पहल करेंगे। इसमें अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
दोनों देश निजी क्षेत्र की रचनात्मक शक्ति को एआई क्रांति का प्रमुख चालक मानते हैं। वे सीमा-पार वेंचर कैपिटल प्रवाह, अनुसंधान एवं विकास साझेदारी, अगली पीढ़ी के डाटा सेंटरों में निवेश, कंप्यूटिंग संसाधनों और प्रोसेसर तक पहुंच तथा एआई मॉडल और एप्लिकेशन विकास में सहयोग बढ़ाने पर काम करेंगे।
संयुक्त बयान में कहा गया कि दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अमेरिका और भारत न केवल स्वतंत्रता की रक्षा में, बल्कि समृद्धि और सामाजिक सामंजस्य की दिशा में भी साथ खड़े हैं। दोनों देशों ने एक ऐसे एआई भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया है जो नागरिकों की सेवा करे, अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत बनाए और स्वतंत्रता, खुलापन तथा विधि के शासन जैसे साझा मूल्यों को प्रतिबिंबित करे।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
2030 तक 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार : ब्राजील के राष्ट्रपति
नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा है कि भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक बढ़कर 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर का लगभग दोगुना होगा।
उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-ब्राजील बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस फोरम का आयोजन फिक्की, डीपीआईआईटी, ब्राजील के विदेश मंत्रालय, विकास, उद्योग, व्यापार और सेवाएं मंत्रालय तथा एपेक्सब्राजील के सहयोग से किया गया था।
लूला ने कहा कि 2006 में जब भारत और ब्राजील ने रणनीतिक साझेदारी शुरू की थी, तब दोनों देशों के बीच व्यापार केवल 2.4 अरब डॉलर था। अब यह बढ़कर 15 अरब डॉलर हो गया है और पिछले साल इसमें 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा अभी भी दोनों देशों की क्षमता से कम है। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील के बीच दूरी मायने नहीं रखती, क्योंकि दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं और अब दोनों देश आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस लक्ष्य का समर्थन करते हुए कहा कि 15 अरब डॉलर का व्यापार अभी पर्याप्त नहीं है और इसे और तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ब्राजील के पास नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधन हैं, जबकि भारत के पास मजबूत तकनीक और विनिर्माण क्षमता है। दोनों देश मिलकर वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बना सकते हैं।
उन्होंने ब्राजील को कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में मजबूत देश बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच सहयोग के बड़े अवसर हैं। उन्होंने ब्राजील की कंपनियों को भारत में निवेश और साझेदारी के लिए भी आमंत्रित किया।
इस दौरान दोनों देशों के बीच बायोएनर्जी, लौह अयस्क, फार्मास्यूटिकल्स, व्यापार और एयरोस्पेस से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। एनएमडीसी, वेल और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच लगभग 500 मिलियन डॉलर की लागत से लौह अयस्क ब्लेंडिंग सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता हुआ। फार्मा क्षेत्र में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं के संयुक्त शोध और उत्पादन के लिए भी समझौते हुए।
एयरोस्पेस क्षेत्र में ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर और अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत में ई175 रीजनल जेट की असेंबली लाइन स्थापित करने के लिए समझौता किया। इसके अलावा, एपेक्सब्राजील और फिक्की के बीच व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौता हुआ।
दोनों नेताओं ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों के हितों की रक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकारों में समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
--आईएएनएस
एएमटी/एससीएच
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