2030 तक 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार : ब्राजील के राष्ट्रपति
नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा है कि भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक बढ़कर 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर का लगभग दोगुना होगा।
उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-ब्राजील बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस फोरम का आयोजन फिक्की, डीपीआईआईटी, ब्राजील के विदेश मंत्रालय, विकास, उद्योग, व्यापार और सेवाएं मंत्रालय तथा एपेक्सब्राजील के सहयोग से किया गया था।
लूला ने कहा कि 2006 में जब भारत और ब्राजील ने रणनीतिक साझेदारी शुरू की थी, तब दोनों देशों के बीच व्यापार केवल 2.4 अरब डॉलर था। अब यह बढ़कर 15 अरब डॉलर हो गया है और पिछले साल इसमें 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा अभी भी दोनों देशों की क्षमता से कम है। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील के बीच दूरी मायने नहीं रखती, क्योंकि दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं और अब दोनों देश आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस लक्ष्य का समर्थन करते हुए कहा कि 15 अरब डॉलर का व्यापार अभी पर्याप्त नहीं है और इसे और तेजी से बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ब्राजील के पास नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधन हैं, जबकि भारत के पास मजबूत तकनीक और विनिर्माण क्षमता है। दोनों देश मिलकर वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बना सकते हैं।
उन्होंने ब्राजील को कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में मजबूत देश बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच सहयोग के बड़े अवसर हैं। उन्होंने ब्राजील की कंपनियों को भारत में निवेश और साझेदारी के लिए भी आमंत्रित किया।
इस दौरान दोनों देशों के बीच बायोएनर्जी, लौह अयस्क, फार्मास्यूटिकल्स, व्यापार और एयरोस्पेस से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। एनएमडीसी, वेल और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच लगभग 500 मिलियन डॉलर की लागत से लौह अयस्क ब्लेंडिंग सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता हुआ। फार्मा क्षेत्र में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं के संयुक्त शोध और उत्पादन के लिए भी समझौते हुए।
एयरोस्पेस क्षेत्र में ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर और अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत में ई175 रीजनल जेट की असेंबली लाइन स्थापित करने के लिए समझौता किया। इसके अलावा, एपेक्सब्राजील और फिक्की के बीच व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौता हुआ।
दोनों नेताओं ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों के हितों की रक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकारों में समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कनाडाई मीडिया द्वारा खालिस्तानी आतंकी को ‘सिख नेता’ बताना खतरनाक: रिपोर्ट
ओटावा, 21 फरवरी (आईएएनएस)। कनाडाई मीडिया संस्थानों द्वारा खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को “सिख नेता” बताकर संबोधित किए जाने को तथ्यों को खतरनाक ढंग से मिटाने जैसा बताया गया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पहचान की राजनीति और चुनिंदा नैरेटिव से विभाजित दुनिया में मीडिया की प्रस्तुति जनमत और नीतियों पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।
‘खालसा वॉक्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2023 में कनाडा के सरे में मारे गए निज्जर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नामित आतंकी, हिंसक साजिशों के कथित सूत्रधार और उग्र खालिस्तानी संगठनों के प्रमुख चेहरों में से एक के रूप में पहचाना जाता रहा है। इसके बावजूद हाल ही में ‘ग्लोबल न्यूज कनाडा’ की एक रिपोर्ट में उन्हें “बी.सी. सिख नेता” कहा गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि तथ्यों को धुंधला करने का प्रयास है। इसमें दावा किया गया कि इस तरह की प्रस्तुति आतंकवाद के पीड़ितों का अपमान करती है और उग्रवादियों को सामुदायिक प्रतिनिधि के रूप में पेश करने का खतरनाक उदाहरण स्थापित करती है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस तरह का फ्रेमिंग निज्जर की कथित हिंसक गतिविधियों और जटिल भू-राजनीतिक संदर्भों को नजरअंदाज कर पीड़ित होने की संकीर्ण दृष्टि तक सीमित कर देता है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि उन्हें केवल सिख अधिकारों के पैरोकार के रूप में पेश करना, जबकि उनके कथित तौर पर पाकिस्तान की आईएसआई से संबंध और प्रशिक्षण शिविरों से जुड़ाव के आरोप रहे हैं, प्रवासी समुदायों के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि यदि मीडिया सांस्कृतिक पहचान के आधार पर आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों को “नेता” के रूप में प्रस्तुत करता है, तो इससे वैश्विक स्तर पर उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ सकती है, चाहे वह इस्लामवादी, अतिदक्षिणपंथी या अलगाववादी स्वरूप में हो।
रिपोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि पंजाब में कथित तौर पर निज्जर से जुड़े संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स द्वारा की गई हिंसा के पीड़ितों की आवाज इस नैरेटिव में हाशिये पर चली जाती है। साथ ही, कनाडा के इतिहास में सिख उग्रवाद और एयर इंडिया त्रासदी जैसे घटनाक्रमों को भी चेतावनी के तौर पर याद किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में मीडिया से तथ्यों को प्राथमिकता देने और किसी भी व्यक्ति की आतंकी नामांकन और गतिविधियों को स्पष्ट रूप से उल्लेखित करने की अपील की गई है। साथ ही सरकारों से भी साक्ष्यों के आधार पर समान मानदंड अपनाने और राजनीतिक दबाव से परे कार्रवाई करने की मांग की गई है।
--आईएएनएस
डीएससी
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