Gold-Silver Price Today: सोने की कीमतों में भारी गिरावट, एक ही दिन में 5600 रुपये सस्ती हुई चांदी
Gold-Silver Price Today: कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को एक बार फिर वैश्विक और घरेलू दोनों बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर रुझान, रुपए की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है.
सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में गुरुवार सुबह सोने और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई. दिन के शुरुआती कारोबार में सोना 1.05 प्रतिशत गिरकर 4,106.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया, तो वहीं चांदी 2.24 प्रतिशत टूटकर 56.42 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई. इस बीच बोफा यानी बैंक ऑफ अमेरिका (बीओएफए) ने अनुमान जताया है कि मौजूदा दबाव जारी रहने पर सोना आगे चलकर 3,700 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है. भारतीय मुद्रा में यह स्तर लगभग 1.12 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के बराबर बैठता है. इस अनुमान ने भी निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है.
1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आया सोना
अंतरराष्ट्रीय कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया. घरेलू बाजार में सोना गिरकर 1.44 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया, जबकि चांदी का भाव 2.03 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के करीब आ गया. खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 11 बजे), मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,771 रुपए यानी 1.21 प्रतिशत गिरकर 1,44,308 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा. वहीं चांदी में और बड़ी गिरावट देखी गई और यह 5,521 रुपए यानी 2.64 प्रतिशत टूटकर 2,03,647 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई.
दिन के कारोबार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,46,079 रुपए से 1,087 रुपए यानी 0.74 प्रतिशत टूटकर 1,44,992 रुपए पर खुला, और एक समय यह 1,883 रुपए यानी 1.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,44,196 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया.
2.10 लाख रुपये प्रति किग्रा से नीचे आई चांदी
वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव 2,09,168 रुपए से 3,168 रुपए यानी 1.51 प्रतिशत गिरकर 2,06,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली, और एक समय इसने 5,648 रुपए यानी 2.70 प्रतिशत टूटकर 2,03,520 का दिन का निम्नतम स्तर छुआ. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत दिशा पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है.
विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी आर्थिक संकेतकों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं. यही कारण है कि सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है.
एक सप्ताह में 3500 रुपये से ज्यादा सस्ता हुआ सोना
पिछले सप्ताह एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में 3,581 रुपए यानी 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि चांदी 14,568 रुपए यानी 6.4 प्रतिशत तक टूट गई थी. जानकारों का मानना है कि घरेलू कीमतों में यह कमजोरी बड़े पैमाने पर मुद्रा विनिमय दर के प्रभाव से जुड़ी हुई है. बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह भारतीय रुपए की मजबूती भी है. मजबूत रुपया आयातित सोने और चांदी की लागत को कम करता है, जिससे स्थानीय कीमतों पर दबाव बनता है.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते गिरा सर्राफा बाजार
विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की चाल पर पश्चिम एशिया की स्थिति भी असर डाल रही है. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और सप्लाई चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं. यह स्थिति सामान्य तौर पर सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है. हालांकि दूसरी तरफ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी जैसी स्थितियां सोने को कुछ समर्थन भी दे सकती हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशकों का फोकस अमेरिका के आवास संबंधी आंकड़ों, उपभोक्ता भावना, महंगाई उम्मीदों और पीसीई मुद्रास्फीति आंकड़ों पर रहेगा. इसके अलावा, भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के पीएमआई आंकड़े, रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.
स्रोत- आईएएनएस
अभी के लिए, हमें रुकना होगा...यूक्रेन का 25% हिस्सा रूस को सौंपने के लिए तैयार जेलेंस्की!
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि वह रूस के साथ शांति समझौते के लिए मौजूदा फ्रंटलाइन को 'फ्रीज़' (यथावत) करने और फरवरी 2022 में शुरू हुए संघर्ष को खत्म करने के लिए तैयार हैं। ज़ेलेंस्की, जिनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा मौजूदा संघर्ष को खत्म करने के लिए कदम न उठाने को लेकर आलोचना की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके पास अपने देश का 75 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा रहेगा, तो उन्होंने हाँ में जवाब दिया और कहा कि वह युद्धविराम के लिए तैयार हैं। हालाँकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यूक्रेन को यह सुरक्षा गारंटी मिलनी चाहिए कि रूसी आक्रामकता और कब्ज़ा फिर से नहीं होगा।
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ज़ेलेंस्की ने कहा हाँ, अभी हमें इसे 'फ्रीज़' करना होगा, और मुझे लगता है कि इस युद्ध को खत्म करने का यही एक वास्तविक तरीका है। हम इसे युद्धविराम कहते हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे 'फ्रीज़' करना और रोकना कहा है। उन्होंने आगे कहा और ज़ाहिर है, आज हमें रूस से कम से कम इतना तो चाहिए ही - इसके बाद हम राष्ट्रपति ट्रम्प और यूरोपीय देशों के पास जाएँगे और सुरक्षा गारंटी की माँग करेंगे।
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रूस जीत नहीं रहा है
भले ही ज़ेलेंस्की ने परोक्ष रूप से यह संकेत दिया हो कि वे रूस के कब्ज़े वाले 25 प्रतिशत इलाके को छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने फिर दोहराया कि इस संघर्ष में मॉस्को (रूस) जीत नहीं रहा है। उन्होंने माना कि यूक्रेन के लोग इस युद्ध से थक चुके हैं, लेकिन साथ ही यह भी ज़ोर देकर कहा कि वे अपने ही देश में रहना चाहते हैं और रूसियों के खिलाफ लड़ना जारी रखेंगे। फॉक्स एंड फ्रेंड्स कार्यक्रम में उन्होंने कहा वे युद्ध के मैदान में नहीं जीत रहे हैं। यही वजह है कि वे हम पर किसी न किसी तरह का दबाव डालकर हमें हमारी ज़मीन से हटाना चाहते हैं। यह सही नहीं है। लोग थक चुके हैं, और ज़ाहिर है कि हम भी इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करना चाहते हैं।
ट्रम्प और ज़ेलेंस्की के बीच बढ़ते मतभेद
शायद यह पहली बार है जब ज़ेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन अपना खोया हुआ इलाका छोड़ने के लिए तैयार हो सकता है। हाल ही में, उन्होंने अमेरिका के शीर्ष दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से भी मुलाकात की थी, जिसमें संघर्ष को खत्म करने के तरीकों पर चर्चा हुई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में हुई अमेरिका-रूस तेल डील को लेकर ट्रम्प और ज़ेलेंस्की के बीच मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं। ज़ेलेंस्की ने इस कदम की आलोचना की है, लेकिन ट्रम्प ने पलटवार करते हुए कहा कि यूक्रेन को एक नए राष्ट्रपति की ज़रूरत है। इस पर ज़ेलेंस्की के मंत्रियों ने जवाब दिया कि यूक्रेन के लोग अपने राष्ट्रपति का समर्थन कर रहे हैं और उन्हें ही अपना नेता बनाए रखना चाहते हैं।
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