रूस पर चौंकाया...भारत पहुंचते ही अमेरिका के विदेश मंत्री ने किया बड़ा धमाका, सब हैरान!
ट्रंप की बेतुकी बहनबाजी को लेकर जिस तरह से भारत और अमेरिका के संबंधों में खटास पैदा हो रही थी अब उसमें अचानक से ऐसा बदलाव आया है कि पूरी दुनिया हैरान हो गई है। क्योंकि जो ट्रंप अपने मन मुताबिक डील फाइनल कराने के लिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसके लिए वह टेरिफ को हथियार बना रहे थे। लेकिन अचानक से ट्रंप के ऐसे तेवर बदले कि उन्होंने एक तरह से भारत के आगे सरेंडर कर दिया। दरअसल भारत से रिश्ते सुधारने और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए ट्रंप ने अपनी टीम उतार दी है। इसी टीम में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी शामिल हैं जो अपनी पत्नी के साथ दो दिन के भारत दौरे पर आए। लेकिन जैसे ही वह भारत की धरती पर उतरे और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिले तो उन्होंने धमाकेदार बयान देकर सबको चौंका दिया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता की जमकर तारीफ की है। उन्होंने भारत को रिफाइनिंग के मामले में महाशक्ति बताते हुए वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में उसकी अहम भूमिका पर जोर दिया है।
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रूबियों ने कहा है कि दोनों देश ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं और कुछ ही मुद्दों का समाधान बाकी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही अच्छी खबर सामने आ सकती है और दोनों देश समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। भारत की तरफ से रूसी तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि भारत ने बार-बार अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने की इच्छा व्यक्त की है जो कि एक समझदारी भरा कदम है। इसे एक दिन में रातोंरात करना आसान नहीं है। यह सिर्फ रूसी तेल का मामला नहीं है। यह भारत की ऊर्जा स्रोतों और विविध बनाने की इच्छा के बारे में और हमें लगता है कि हम इसकी ऊर्जा जरूरतों के कुछ स्रोतों की आपूर्ति कर सकते हैं। दरअसल रूबियों की यात्रा को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच रूसी तेल की खरीद और टेरिफ को लेकर अहम बातचीत चल रही है। अमेरिकी टेरिफ और बाजार तक पहुंच को लेकर महीनों से बातचीत अटकी हुई थी। भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव का एक प्रमुख मुद्दा रही है। अमेरिकी प्रशासन ने पहले रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टेरिफ लगाने की संभावना जताई थी।
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लेकिन हाल ही में ट्रंप ने रूस से तेल और गैस की खरीद से जुड़े मामलों में भारत को टेरिफ से बड़ी राहत देते हुए अतिरिक्त टेरिफ या नए 100% वाले टेरिफ पर छूट का ऐलान किया था। लेकिन अब रूबियों ने अपने बयानों में संकेत दिया है कि दोनों देश व्यापार समझौते को लेकर गंभीर हैं और बातचीत को जल्द नतीजे तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर साफ है कि अमेरिका भारत से डील करने के पूरे मूड में है।
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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में जो दिखता है जरूरी नहीं कि वही हकीकत हो असली खेल अक्सर पर्दे के पीछे चलता है। कैमरों के सामने बयान दिए जाते हैं। गर्मजशी के साथ हाथ मिलाए जाते हैं और समझौतों की बातें कही जाती हैं। लेकिन पर्दे के पीछे रणनीतिक हितों, दबाव और सौदेबाजी का खेल चलता है। कुल मिलाकर कूटनीत शतरंज की वह बिसात है जहां हर चाल दिखाई नहीं देती और हर खामोशी का मतलब भी एक जैसा नहीं होता। कूटनीत का असली खेल बयानों में नहीं बल्कि उन फैसलों में छिपा होता है जो दुनिया को दिखाई नहीं देते। ऐसा ही कुछ मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की यात्रा के दौरान देखने को मिला। मुंबई में भारत और अमेरिका के बीच अहम बातचीत हुई। जिस वक्त दुनिया भर में अमेरिका के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की मीटिंग की खबर चर्चाओं में थी। ठीक उसी दौरान अचानक से यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला की एंट्री ने सबको चौंका दिया।
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चौंकना इसलिए भी लाजमी है क्योंकि मीटिंग अमेरिका और भारत के बीच चल रही थी तो यूएई अचानक इस मीटिंग में कैसे पहुंच गया? इसके पीछे की क्या वजह है कि अमेरिका, भारत, यूएई ने कोई बड़ा गेम प्लान बनाया है? दरअसल वैसे तीनों देशों के नेताओं के बीच जो त्रिपक्षीय बैठक हुई उसमें ऊर्जा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई। लेकिन यूएई का मीटिंग में शामिल होने का इसलिए भी अहम है क्योंकि मिडिल ईस्ट में इस वक्त तनाव चल रहा है। यूएई फिलहाल रूस के बाद भारत के बड़े और सबसे रणनीतिक कच्चे तेल के सप्लायरों में से एक है। विदेश मंत्री ए जयशंकर ने एक हफ्ते में दूसरी बार यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला के साथ बातचीत की। जयशंकर ने खाड़ी की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए बातचीत और कूटनीति के जरिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। इसके अलावा सऊदी अरब में होती हमलों से पैदा हुई स्थिति और मुझ से जहाजों की आवाजाही और भारतीय नाविकों को ले जा रहे जहाजों पर हमलों के मुद्दे को उठाया गया।
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जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद भारत आए थे। फरवरी में क्राउन प्रिंस शेख खालिद ने एआई इंपैक्ट समिट और ब्रिक्स समिट में हिस्सा लिया था। इसके अलावा मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई की आठवीं यात्रा की थी। भारत और यूएई के बीच संबंध ऐतिहासिक, आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। दोनों देशों ने फरवरी 2022 में बड़ा आर्थिक साझेदारी समझौता सीईपीए पर हस्ताक्षर किए थे। जिससे द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। ऊर्जा रक्षा तकनीक और 35 लाख से ज्यादा भारतीयों के प्रवासी जुड़ाव के मामले में दोनों देश घनिष्ठ साझेदार हैं। ऐसे में यूएई के विदेश मंत्री का भारत आना वो भी अमेरिका के विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान तो यह खास हो जाता है। कहा जा रहा है कि तीनों देशों के नेताओं के बीच मिडिल ईस्ट पर तनाव के मुद्दे के साथ ही कच्चे तेल को लेकर बातचीत हुई है। जिसका असर जल्द देखने को मिल सकता है। उधर अमेरिका भी भारत के साथ फाइनल डील की बात कह चुका है।
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