केरल में रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन, पटरी से उतरा बिलासपुर-तिरुनेलवेली एक्सप्रेस का इंजन; कई ट्रेनें प्रभावित
Kerala Landslide: केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में भारी बारिश के बीच रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन हुआ है. जिससे एक ट्रेन का इंजन पटरी से उतर गया है. इस घटना के बाद कई ट्रेनें प्रभावित हुई हैं. जानकारी के मुताबिक, गुरुवार तड़के पारसाला रेलवे स्टेशन के नजदीक हुए भूस्खलन की चपेट में आने से बिलासपुर-तिरुनेलवेली एक्सप्रेस का इंजन पटरी से उतर गया. गनीमत ये रही कि इस घटना में किसी भी यात्री या रेलवे कर्मचारी को कोई चोट नहीं आई है. दक्षिण रेलवे ने सभी के सुरक्षित होने की पुष्टि की है.
गुरुवार तड़के हुआ रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन
रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, भूस्खलन की ये घटना गुरुवार तड़के 2.19 बजे हुई. जिसकी चपेट में ट्रेन संख्या 22619 बिलासपुर-तिरुनेलवेली एक्सप्रेस आ गई. भूस्खलन की जानकारी मिलते ही ट्रेन को पारसाला के पास रोक दिया गया. इसके बाद जांच में इंजन के पटरी से उतरने का पता चला. हादसे के कारण नेय्याट्टिंकरा-पारसाला रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही बाधित हो गई है.
Thiruvananthapuram, Keralam: Train services were heavily disrupted in the Neyyattinkara-Parassala section after Train No. 22619 Bilaspur–Tirunelveli Express was stopped following a landslide near Parassala Railway Station today at 2:19 AM. The locomotive of the train derailed…
— ANI (@ANI) October 22, 2026
वहीं फिलहाल रेलवे ने ट्रेन को आगे रवाना करने के लिए वैकल्पिक इंजन भेजने का इंतजाम किया है. साथ ही प्रभावित ट्रैक की मरम्मत और रेल यातायात बहाल करने के लिए दुर्घटना राहत ट्रेन (ART) को कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर भेज दिया गया है. इसके साथ ही रेलवे की टीमें घटनास्थल पर ट्रैक को बहाल करने के काम में जुटी हुई हैं.
भूस्खलन के बाद रास्ते में रोकी गईं तीन ट्रेनें
रेलवे ट्रैक पर हुए भूस्खलन के चलते रेल यातायात पर असर पड़ा है. इस घटना के बाद तीन ट्रेनों को बीच रास्ते में रोकना पड़ा है. इनमें तांबरम-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल स्पेशल ट्रेन को एरणियल, मदुरै-पुनालुर एक्सप्रेस को नॉर्थ पनकुडी और तांबरम-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल अमृत भारत एक्सप्रेस को नांगुनेरी में रोका गया है.
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बच्चों के लिए जानलेवा बन सकता है खसरा, डब्ल्यूएचओ ने बताए लक्षण और उपाय
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। खसरा बच्चों में होने वाली एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जिसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यह बीमारी एक वायरस के कारण होती है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से हवा के जरिए दूसरे लोगों तक फैल सकती है। छोटे बच्चों, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में खसरे के गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने खसरा के लक्षण और बचाव को लेकर सलाह जारी की है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, खसरे के वायरस के संपर्क में आने के आमतौर पर 7 से 14 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में यह सामान्य बुखार या सर्दी-जुकाम जैसा लग सकता है, लेकिन बाद में इसके लक्षण गंभीर रूप ले सकते हैं।
तेज बुखार आना, खांसी और नाक बहना, आंखों का लाल होना और उनसे पानी आना, चेहरे और गर्दन से शुरू होकर शरीर के दूसरे हिस्सों में लाल चकत्ते या दाने फैलना और गालों के अंदर छोटे-छोटे सफेद धब्बे दिखाई देना खसरे के प्रमुख लक्षण हैं। आमतौर पर शुरुआती लक्षणों के तीन से पांच दिन बाद शरीर पर दाने दिखाई देने लगते हैं। ये दाने धीरे-धीरे छाती, हाथों, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकते हैं। अगर बच्चे में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
खसरा केवल बुखार और त्वचा पर दाने होने तक सीमित नहीं है। गंभीर मामलों में इससे निमोनिया, कान में संक्रमण, तेज दस्त, शरीर में पानी की कमी और दिमाग में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में आंखों की रोशनी जाने का खतरा भी रहता है।
कुपोषित बच्चों, विटामिन ए की कमी वाले बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में जटिलताओं का जोखिम ज्यादा होता है। गर्भावस्था के दौरान खसरे का संक्रमण मां और गर्भस्थ शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनियाभर में खसरे से अनुमानित 95,000 लोगों की मौत हुई। इनमें ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चे थे, जिन्हें टीका नहीं लगा था या पूरा टीकाकरण नहीं हुआ था।
खसरे से बचने का सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण है। बच्चों को खसरे के टीके की दो खुराक दिलाना जरूरी है, क्योंकि पहली खुराक से सभी बच्चों में पर्याप्त प्रतिरक्षा विकसित नहीं होती।
अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा सुस्ती, पानी की गंभीर कमी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। खसरे का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज नहीं है। इसका उपचार लक्षणों को कम करने और जटिलताओं से बचाने पर केंद्रित होता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
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