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बच्चों के लिए जानलेवा बन सकता है खसरा, डब्ल्यूएचओ ने बताए लक्षण और उपाय

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। खसरा बच्चों में होने वाली एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जिसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। यह बीमारी एक वायरस के कारण होती है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से हवा के जरिए दूसरे लोगों तक फैल सकती है। छोटे बच्चों, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में खसरे के गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने खसरा के लक्षण और बचाव को लेकर सलाह जारी की है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, खसरे के वायरस के संपर्क में आने के आमतौर पर 7 से 14 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में यह सामान्य बुखार या सर्दी-जुकाम जैसा लग सकता है, लेकिन बाद में इसके लक्षण गंभीर रूप ले सकते हैं।

तेज बुखार आना, खांसी और नाक बहना, आंखों का लाल होना और उनसे पानी आना, चेहरे और गर्दन से शुरू होकर शरीर के दूसरे हिस्सों में लाल चकत्ते या दाने फैलना और गालों के अंदर छोटे-छोटे सफेद धब्बे दिखाई देना खसरे के प्रमुख लक्षण हैं। आमतौर पर शुरुआती लक्षणों के तीन से पांच दिन बाद शरीर पर दाने दिखाई देने लगते हैं। ये दाने धीरे-धीरे छाती, हाथों, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकते हैं। अगर बच्चे में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

खसरा केवल बुखार और त्वचा पर दाने होने तक सीमित नहीं है। गंभीर मामलों में इससे निमोनिया, कान में संक्रमण, तेज दस्त, शरीर में पानी की कमी और दिमाग में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में आंखों की रोशनी जाने का खतरा भी रहता है।

कुपोषित बच्चों, विटामिन ए की कमी वाले बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में जटिलताओं का जोखिम ज्यादा होता है। गर्भावस्था के दौरान खसरे का संक्रमण मां और गर्भस्थ शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनियाभर में खसरे से अनुमानित 95,000 लोगों की मौत हुई। इनमें ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चे थे, जिन्हें टीका नहीं लगा था या पूरा टीकाकरण नहीं हुआ था।

खसरे से बचने का सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण है। बच्चों को खसरे के टीके की दो खुराक दिलाना जरूरी है, क्योंकि पहली खुराक से सभी बच्चों में पर्याप्त प्रतिरक्षा विकसित नहीं होती।

अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा सुस्ती, पानी की गंभीर कमी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। खसरे का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज नहीं है। इसका उपचार लक्षणों को कम करने और जटिलताओं से बचाने पर केंद्रित होता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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कार्बाइड गन के उपयोग पर लगाएं सख्ती से रोक, कोई भी दुर्घटना हुई तो कलेक्टर -SP होंगे जिम्मेदार, CM मोहन ने दिए कड़े निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय से सभी कलेक्टर्स, कमिश्नर्स और एसपी-आईजी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य सरकार की सभी फ्लैगशिप स्कीम्स, विकास कार्यक्रमों के फील्ड में क्रियान्वयन का फीडबैक लिया। साथ ही आगामी सभी तीज-त्यौहारों में कानून-व्यवस्था की बेहतर से बेहतर तैयारी रखने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री यादव ने साफ कहा कि आगामी तीज-त्यौहारों, सामाजिक और धार्मिक मेलों के दौरान सभी कलेक्टर्स-एसपी विशेष सावधानी बरतें। सुनिश्चित करें कि त्यौहारों के दौरान कार्बाइड गन और कार्बाइड लैम्प का उपयोग ना हो, क्योंकि लोकल मेड कार्बाइड गन और कार्बाइड लैम्प मानवों के लिए बेहद खतरनाक होती हैं। दीपावली के दौरान पटाखों की अवैध बिक्री पर रोक लगाएं। कहीं भी और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं होने पाएं। किसी जिले में यदि किसी भी प्रकार की विषम परिस्थिति निर्मित होगी, तो इसके लिए कलेक्टर और एसपी ही जिम्मेदार माने जाएंगे।

कलेक्टर-एसपी को विशेष निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने त्यौहारों और सामाजिक मेलों के आयोजन के संदर्भ में कलेक्टर-एसपी को विशेष रूप से निर्देशित करते हुए कहा कि वे अपने-अपने जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाएं। कहीं भी किसी भी प्रकार की सामाजिक/साम्प्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए सभी आवश्यक प्रतिबंधात्मक एवं सुरक्षा कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। दीपावली पर्व के दौरान भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर असामाजिक तत्वों तथा संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखें। इन स्थानों पर नियमित और प्रभावी पेट्रोलिंग की जाए। महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए।

कार्बाइड गन-लैंप पर सख्ती, पटाखों की अवैध बिक्री पर भी रोक लगाए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पटाखों की दुकानों को लाइसेंस जारी करते समय सभी जरूरी शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। विक्रेताओं की दुकानों का भौतिक सत्यापन और निरीक्षण भी किया जाए। किसी भी स्थान पर विस्फोटक सामग्री का अवैध भंडारण न होने दें। अवैध भंडारण पाए जाने पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा प्रतिबंधित पटाखों के क्रय-विक्रय, भंडारण व उपयोग पर भी प्रभावी रोक लगाएं।

उन्होंने आगे कहा कि कार्बाइड गन एवं कार्बाइड लैंप के उपयोग से होने वाली दुर्घटनाओं और संभावित जनहानि के मद्देनजर इनके उपयोग पर सख्ती से रोक लगाएं। दीपावली के दौरान संवेदनशील स्थलों पर अग्निशमन वाहनों, अग्निशमन उपकरणों, प्रमुख स्थानों पर एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। निकटवर्ती अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट रखा जाए, चिकित्सकों की ड्यूटी तय की जाए। सभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में सुरक्षा व कानून-व्यवस्था की तैयारियों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें। सभी विभागों के मध्य प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करें, ताकि त्यौहार बगैर दुर्घटना के सम्पन्न हो सके।

त्यौहारों में नकली या मिलावटी मावा, घी, पनीर और मिष्ठान बिकने नहीं पाएं

बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी सभी तीज-त्यौहारों के दौरान खाद्य सामग्रियों में मिलावटखोरी को सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नकली या मिलावटी मावा, घी, पनीर और मिठाइयां न बिकने पाए।मिलावट की शंका होने पर खाद्य पदार्थों के नमूनें लेने और आवश्यक हो तो खाद्य पदार्थों को जब्त करने की कार्रवाई करें।

उन्होंने कहा कि जिलों में विशेष दल बनाए जाकर खाद्य पदार्थों की मिलावट की रोकथाम संबंधी कार्यवाही निरंतर करते रहें। मिलावट की शंका होने पर खाद्य पदार्थों के सीमित नमूने लें और आवश्यक हो तभी खाद्य पदार्थों को जब्त करने की कार्रवाई करें। अस्वास्थ्यकर और अस्वच्छ स्थानों में खाद्य पदार्थ निर्माण और विक्रय करने वाले प्रतिष्ठानों पर भी खाद्य सुरक्षा अधिनियम अनुसार कार्रवाई की जाए। विभाग द्वारा बताया गया कि अब तक मिलावटखोरी पाए जाने पर 17 लायसेंस निलंबित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 42 प्रकरणों में एफआईआर भी दर्ज की गई है।

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