एक्सप्लेनर: क्या है अमेरिका राष्ट्रपति के विशेषाधिकार वाली 'धारा 122', जिसने फिर से कराई टैरिफ की वापसी
नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को हटा दिया गया है। वहीं, धारा 122 का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने 150 दिनों की अवधि के लिए अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है। यह अस्थायी आयात शुल्क 24 फरवरी से लागू होगा।
अब व्हाइट हाउस की ओर से एक फैक्टशीट जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत दी गई शक्ति का प्रयोग किया है। इसके तहत राष्ट्रपति सरचार्ज और अन्य विशेष आयात प्रतिबंधों के माध्यम से कुछ आधारभूत अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को संबोधित कर सकते हैं।
फैक्टशीट के मुताबिक, अमेरिका के सामने आने वाली आधारभूत अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए कुछ वस्तुओं पर अस्थायी आयात शुल्क लागू नहीं होगा।
इनमें कुछ महत्वपूर्ण खनिज, मुद्रा और बुलियन में उपयोग होने वाली धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक, कुछ कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और फार्मास्यूटिकल सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्री वाहन और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को धारा 301 के तहत अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए कुछ अनुचित और भेदभाव करने वाले कानूनों, नीतियों और प्रथाओं की जांच करने का निर्देश दिया है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं या उसे प्रतिबंधित करते हैं।
बयान में कहा गया, अमेरिका को आधारभूत अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं (व्यापार घाटे) का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू उत्पादन में कमी के परिणामस्वरूप, अमेरिका को अपनी खपत की अधिकांश वस्तुओं का आयात करना पड़ता है, जिससे अमेरिकी डॉलर हमारी अर्थव्यवस्था से बाहर विदेशों में चले जाते हैं।”
धारा 122 के तहत लगाए गए टैरिफ 150 दिनों के बाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे, जब तक कि कांग्रेस उन्हें बढ़ाने के लिए मतदान न करे। हालांकि समय सीमा स्पष्ट है, व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति इन उपायों को समाप्त होने से पहले भुगतान संतुलन आपातकाल की नई घोषणा करके इन्हें दोबारा लागू कर सकते हैं।
कई रिपोर्टों के अनुसार, अन्य व्यापार कानूनों के विपरीत, धारा 122 के तहत टैरिफ लगाने से पहले औपचारिक जांच की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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समिट में अमेरिका ने ग्लोबल एआई गवर्नेंस को किया खारिज, कहा-हर देश अपनी नीति खुद तय करे
वॉशिंगटन, 21 फरवरी (आईएएनएस)। नई दिल्ली में हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अमेरिका ने साफ कहा कि वह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के लिए किसी तरह की वैश्विक केंद्रीकृत व्यवस्था या नियंत्रण के पक्ष में नहीं है।
व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और एआई पॉलिसी और सॉवरेनिटी को लेकर एक साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर देश को अपनी जरूरत और अपने राष्ट्रीय हित के हिसाब से एआई नीति बनानी चाहिए। एआई का नियंत्रण किसी एक वैश्विक संस्था या सख्त अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत नहीं होना चाहिए। एआई को लेकर नियम-कानून लोकल यानी देश-स्तर पर तय होने चाहिए।
उन्होंने कहा, “जैसा कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने कई बार कहा है कि हम एआई के ग्लोबल गवर्नेंस को पूरी तरह से रिजेक्ट करते हैं। हमारा मानना है कि अगर एआई ब्यूरोक्रेसी और केंद्रीय नेतृत्व के अंतर्गत है, तो इसे अपनाने से बेहतर भविष्य नहीं बन सकता।”
क्रैट्सियोस ने कहा कि एआई गवर्नेंस लोकल रहनी चाहिए और नेशनल इंटरेस्ट के साथ अलाइन होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “एआई गवर्नेंस को खास लोगों की खास जरूरतों और इंटरेस्ट पर फोकस करना चाहिए और इसलिए इसे लोकल होना चाहिए।”
क्रैट्सियोस ने कहा, “रियल एआई सॉवरेनिटी का मतलब है अपने लोगों के फायदे के लिए बेस्ट-इन-क्लास तकनीक का मालिक होना और उसका इस्तेमाल करना और वैश्विक बदलावों के बीच अपनी नेशनल डेस्टिनी बनाना।”
उन्होंने पूरी तरह से तकनीकी आत्मनिर्भरता के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “किसी भी देश के लिए पूरी तरह से टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता अवास्तविक है, क्योंकि एआई स्टैक बहुत जटिल है, लेकिन एआई को तेजी से अपनाने के साथ-साथ स्ट्रेटजिक ऑटोनॉमी हासिल की जा सकती है और यह स्वतंत्र देशों के लिए एक जरूरत है। अमेरिका मदद करना चाहता है।”
क्रेट्सियोस ने देशों से अमेरिकन एआई एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम के जरिए वॉशिंगटन के साथ साझेदारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि एआई अपनाने से हम सभी के लिए जो खुशहाली आ सकती है, उसे पाने के लिए स्वतंत्र पार्टनर बहुत जरूरी हैं। इसीलिए राष्ट्रपति ने अमेरिकन एआई एक्सपोर्ट प्रोग्राम लॉन्च किया।”
उन्होंने कहा कि वित्तीय रुकावटों को दूर करने के लिए यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक, यूएस ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी, मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन और एक नए वर्ल्ड बैंक फंड ने सभी ने नए एआई पर केंद्रित प्रोग्राम शुरू किए हैं।
इस दौरान क्रेटसियोस ने टेक कॉर्प्स का भी अनावरण किया। यह पब्लिक सर्विसेज में एआई एप्लिकेशन्स के डिप्लॉयमेंट का समर्थन करने के लिए पार्टनर देशों के साथ वॉलंटियर टेक्निकल टैलेंट को जोड़ेगा। उन्होंने कहा, “विकासशील देश एक बुनियादी बदलाव के प्वाइंट पर विकसित अर्थव्यवस्था से पीछे रह रहे हैं।” इसकी वजह उन्होंने वित्तीय दिक्कतों और टेक्निकल कैपेसिटी के अंतर को मुख्य रुकावटें बताया।
अमेरिका के तकनीकी दबदबे पर जोर देते हुए क्रेटसियोस ने घोषणा की, “एआई में गोल्ड स्टैंडर्ड अमेरिका में बना है।”
--आईएएनएस
केके/वीसी
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