10%, 13.5% या 18%?: टैरिफ के चक्रव्यूह में फंसा भारत, जानें अब कितना लगेगा टैक्स
Trump Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक ताजा फैसले ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक घोषित कर दिया है, जो उन्होंने पिछले साल लागू किए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शांति काल में 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) का इस्तेमाल कर इस तरह के टैक्स नहीं थोप सकते।
इस फैसले के बाद यह माना जा रहा था कि भारत से होने वाले निर्यात पर शुल्क गिरकर फिर से पुराने स्तर (3.5%) पर आ जाएगा। लेकिन ट्रंप के एक नए दांव ने भारतीय निर्यातकों को फिर से टैरिफ के चक्रव्यूह में उलझा दिया है।
ट्रंप के नए दांव में फंसा भारत
सुप्रीम कोर्ट के झटके के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 'सेक्शन 122' के तहत एक नया आदेश जारी कर दिया। इसके जरिए उन्होंने भारत सहित सभी देशों से होने वाले आयात पर 10% का नया टैरिफ लगा दिया है। यह नया टैक्स 24 फरवरी से प्रभावी हो जाएगा। ट्रंप का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बेअसर करने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है। अब सवाल यह है कि भारत के लिए अंतिम दर क्या होगी- समझौते वाली 18% या नई 10%?
VIDEO | US President Donald Trump (@realDonaldTrump) says the SC decision to strike down tariffs levied on other countries might not substantially constrain a president's ability to order tariffs going forward, and there can be even more tariffs.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 20, 2026
He says, "But now I'm going to… pic.twitter.com/nkuGZaABlV
13.5% या 18%? आंकड़ों का उलझा हुआ गणित
वर्तमान में भारतीय सामानों पर शुल्क को लेकर तीन प्रमुख संभावनाएं दिखाई दे रही हैं:
- पहली संभावना (10%): व्हाइट हाउस ने फिलहाल यह संकेत दिया है कि कानूनी तौर पर सभी देशों के लिए अस्थायी रूप से 10% की दर प्रभावी होगी।
- दूसरी संभावना (13.5%): अगर ट्रंप का नया 10% टैरिफ पुराने 3.5% (MFN शुल्क) के ऊपर लगाया जाता है, तो भारतीय निर्यातकों को कुल 13.5% टैक्स देना पड़ सकता है।
- तीसरी संभावना (18%): ट्रंप ने खुद यह बयान दिया है कि भारत के साथ हुए समझौते के तहत 18% की दर ही लागू रहेगी। उनके अनुसार, पीएम मोदी के साथ हुई 'फेयर डील' में कोई बदलाव नहीं होगा।
निर्यातकों के लिए राहत या बढ़ेगी मुश्किल?
अगर टैरिफ दर 18% से घटकर 10% या 13.5% पर आती है, तो यह भारतीय कपड़ा, रत्न-आभूषण और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। अमेरिका भारतीय सामानों का सबसे बड़ा बाजार है, ऐसे में एक-एक प्रतिशत का बदलाव करोड़ों डॉलर के व्यापार को प्रभावित करता है। हालांकि, स्टील पर 50% और ऑटो पार्ट्स पर 25% का पुराना 'सेक्शन 232' टैरिफ अभी भी जारी रहेगा।
दिल्ली से वाशिंगटन तक हलचल
इस भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए भारत सरकार का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह वाशिंगटन डीसी का दौरा करेगा। वहां अमेरिकी अधिकारियों के साथ होने वाली बातचीत में यह साफ हो पाएगा कि भारतीय सामानों पर वास्तव में कितना बोझ पड़ेगा। फिलहाल के लिए, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारत को बातचीत की मेज पर एक मजबूत स्थिति (Bargaining Power) प्रदान कर दी है।
छपरा के युवा किसान का 'फ्लोरल' जादू! एक ही पौधे में खिल रहे मल्टीकलर गुलाब, पुश्तैनी धंधे में फूंकी नई जान
Success Story: छपरा के युवा प्रगतिशील किसान अभिषेक कुमार ने आत्मा से प्रशिक्षण लेकर फूलों की खेती को मुनाफे का आधुनिक व्यवसाय बना दिया है. अपनी तीसरी पुश्तैनी पीढ़ी के काम को नई तकनीक से जोड़ते हुए अभिषेक अब खुद की नर्सरी में 50 से अधिक वैरायटी के गुलाब तैयार कर रहे हैं. उनके टाटा सेंचुरी और मल्टीकलर गुलाबों की खासियत यह है कि वे 20 दिनों तक ताजे रहते हैं. एक ही पौधे में कई रंगों के फूल खिलते हैं.
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