Skin Care: स्ट्रॉबेरी से बने फेस पैक से चेहरे का बढ़ेगा ग्लो! इस तरीके से बनाकर करें इस्तेमाल, सब करेंगे तारीफ
Skin Care Tips: भागदौड़ भरी जिंदगी, धूल-मिट्टी और बढ़ते प्रदूषण के बीच त्वचा की चमक खोना आम समस्या बन चुकी है। महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और केमिकल ट्रीटमेंट्स के बावजूद कई बार मनचाहा निखार नहीं मिल पाता। ऐसे में अगर आपकी रसोई में मौजूद एक साधारण फल आपकी स्किन को नेचुरल ग्लो दे दे, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है?
जी हां, स्ट्रॉबेरी सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि स्किन केयर में भी कमाल की मानी जाती है। विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड से भरपूर स्ट्रॉबेरी त्वचा को गहराई से साफ कर उसे फ्रेश और दमकता बनाती है। आइए जानते हैं स्ट्रॉबेरी फेस पैक बनाने और इस्तेमाल करने का आसान तरीका।
क्यों फायदेमंद है स्ट्रॉबेरी फेस पैक?
स्ट्रॉबेरी में मौजूद विटामिन C त्वचा की रंगत सुधारने में मदद करता है। यह डेड स्किन सेल्स को हटाकर पोर्स को क्लीन करता है, जिससे चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और समय से पहले होने वाली झुर्रियों को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
साथ ही, इसमें मौजूद हल्का एसिडिक तत्व अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे यह ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
स्ट्रॉबेरी फेस पैक बनाने की विधि
सबसे पहले 2-3 ताजी स्ट्रॉबेरी को अच्छे से धो लें। इन्हें मैश करके स्मूद पेस्ट तैयार करें। अब इसमें एक चम्मच शहद और एक चम्मच दही मिलाएं। इन सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स करें ताकि एक क्रीमी पेस्ट तैयार हो जाए।
अगर आपकी स्किन ड्राई है तो आप इसमें कुछ बूंदें बादाम तेल भी मिला सकते हैं। वहीं ऑयली स्किन के लिए कुछ बूंदें नींबू रस मिलाना लाभकारी हो सकता है।
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इस्तेमाल करने का सही तरीका
चेहरे को हल्के फेस वॉश से साफ कर लें और तौलिए से थपथपाकर सुखाएं। अब तैयार फेस पैक को चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगाएं। आंखों के आसपास का हिस्सा छोड़ दें।
इसे 15-20 मिनट तक लगा रहने दें। सूखने के बाद हल्के गुनगुने पानी से धो लें। हफ्ते में 1-2 बार इस पैक का इस्तेमाल करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
किन बातों का रखें ध्यान
यदि आपकी स्किन बहुत सेंसिटिव है, तो फेस पैक लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। किसी भी तरह की जलन या एलर्जी महसूस हो तो तुरंत धो लें। साथ ही, नींबू मिलाने की स्थिति में धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना न भूलें।
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Anxiety Remedies: टीनएजर्स में बढ़ने लगे हैं एंजाइटी के मामले! ये तरीके रिलैक्स रखने में करेंगे मदद
Anxiety Remedies: आज का किशोर पहले से ज्यादा स्मार्ट और जागरूक है, लेकिन उतना ही दबाव में भी। पढ़ाई, करियर की चिंता, सोशल मीडिया पर तुलना और पर्सनल लाइफ की उलझनें ये सब मिलकर टीनएजर्स में एंजाइटी के मामलों को तेजी से बढ़ा रहे हैं। कई बार माता-पिता इसे सामान्य मूड स्विंग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि अंदर ही अंदर बच्चा मानसिक तनाव से जूझ रहा होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते एंजाइटी के संकेत पहचान लिए जाएं, तो इसे संभालना आसान हो सकता है। सही मार्गदर्शन, खुला संवाद और कुछ आसान रिलैक्सेशन तकनीकें टीनएजर्स को मानसिक रूप से मजबूत बना सकती हैं। आइए जानते हैं कि आखिर एंजाइटी क्यों बढ़ रही है और इससे राहत पाने के असरदार तरीके क्या हैं।
क्यों बढ़ रही है टीनएजर्स में एंजाइटी?
अकादमिक दबाव - अच्छे नंबर लाने और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने का तनाव।
सोशल मीडिया का प्रभाव - दूसरों की 'परफेक्ट' जिंदगी देखकर खुद को कमतर आंकना।
करियर को लेकर असमंजस - कम उम्र में ही भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियां।
पारिवारिक या सामाजिक अपेक्षाएं - हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन का दबाव।
नींद और स्क्रीन टाइम की गड़बड़ी - देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करना।
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एंजाइटी के आम लक्षण
- बार-बार घबराहट या बेचैनी महसूस होना
- नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना
- पढ़ाई में ध्यान न लगना
- चिड़चिड़ापन या अचानक गुस्सा
- आत्मविश्वास में कमी
यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
रिलैक्स रखने के असरदार तरीके
डीप ब्रीदिंग और मेडिटेशन
हर दिन 10-15 मिनट गहरी सांस लेने और ध्यान लगाने से दिमाग शांत होता है। यह तनाव हार्मोन को कम करने में मदद करता है।
फिजिकल एक्टिविटी
योग, दौड़ना, डांस या कोई भी खेल एंजाइटी कम करने में बेहद कारगर है। शारीरिक गतिविधि से ‘हैप्पी हार्मोन’ रिलीज होते हैं।
डिजिटल डिटॉक्स
दिन में कम से कम 1-2 घंटे मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं। इससे मानसिक शांति मिलती है।
ओपन कम्युनिकेशन
माता-पिता और दोस्तों से खुलकर बात करना बेहद जरूरी है। अपनी भावनाएं शेयर करने से मन हल्का होता है।
सही दिनचर्या
समय पर सोना, पौष्टिक भोजन लेना और नियमित रूटीन फॉलो करना मानसिक संतुलन बनाए रखने में मददगार है।
(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)
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(लेखक:कीर्ति)
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