कौशांबी में दलित महिला के अपहरण और हत्या मामले में चार दोषियों को उम्रकैद
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की एक अदालत ने वर्ष 2009 में एक दलित महिला की अपहरण के बाद हत्या के मामले में बुधवार को चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 1.31 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) पंकज सोनकर ने बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम) अमित मालवीय की अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया।
उन्होंने बताया कि दोषियों की पहचान अर्वेश तिवारी, सर्वेश तिवारी, रामकांत दुबे और शिवकांत दुबे के रूप में हुई है। अदालत ने चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 1.31 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। सोनकर के मुताबिक, सात अक्टूबर 2009 को कुंती देवी नाम की एक महिला के पिता ने सराय अकिल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी और आरोप लगाया गया था कि चारों आरोपी उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए और बाद में उसकी हत्या कर दी।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की तत्कालीन धाराओं 363 (अपहरण), 364 (हत्या के उद्देश्य से अपहरण), 368 (अपहृत व्यक्ति को गलत तरीके से छिपाना या बंधक बनाकर रखना), 302 (हत्या), 120बी (आपराधिक साजिश) और 34 (साझा मंशा से किया गया कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया था। आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(5) के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
देश के बुनियादी ढांचा उद्योगों की रफ्तार बढ़ी, अप्रैल-सितंबर में 5.1% रही वृद्धि
भारत के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर सितंबर में बढ़कर 30 महीने के उच्चतम स्तर 7.9 प्रतिशत पर पहुंच गई. पिछले साल के इसी महीने की तुलना में इस वृद्धि में लौह अयस्क, बिजली, कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, सीमेंट और इस्पात क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन का प्रमुख योगदान रहा. यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों में दी गई.
सितंबर में लौह अयस्क के उत्पादन में 18.4 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई. उत्पादन प्रक्रिया में लौह अयस्क के व्यापक इस्तेमाल और औद्योगिक विकास में इसके योगदान को देखते हुए इसे संशोधित कोर इंडस्ट्रीज इंडेक्स (आईसीआई) की नई श्रृंखला में एक नई मद के रूप में शामिल किया गया है. इसके साथ ही नई श्रृंखला में प्रमुख उद्योगों की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई है. इस नई श्रृंखला को पहली बार पिछले महीने लागू किया गया था.
सितंबर के दौरान बिजली उत्पादन में 11.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कोयला उत्पादन 10.7 प्रतिशत बढ़ा. महीने के दौरान रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में भी 10.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. आर्थिक गतिविधियों के बढ़ते स्तर के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में तेजी आने से इस क्षेत्र को मजबूती मिली. सीमेंट क्षेत्र में 10.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इस्पात उत्पादन में 4.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई राजमार्गों, बंदरगाहों और रेलवे जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सरकार के भारी निवेश के कारण मांग मजबूत बनी रही, जिससे इन क्षेत्रों को समर्थन मिला. हालांकि, सितंबर में उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के उत्पादन में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई.
अगस्त 2026 के अंतिम सूचकांक को 119.2 से संशोधित कर 120.4 कर दिया गया है. इसके अनुसार, सालाना वृद्धि दर को भी 4.8 प्रतिशत से संशोधित कर 5.9 प्रतिशत कर दिया गया है. अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान प्रमुख उद्योगों के सूचकांक की संचयी वृद्धि दर अब 5.1 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 2.5 प्रतिशत थी. यह बुनियादी ढांचा उद्योगों की वृद्धि में तेजी को दर्शाता है. उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने इस साल जुलाई में पहली बार आधार वर्ष 2022-23 के साथ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक (आईसीआई) की संशोधित श्रृंखला जारी की थी. इस नई श्रृंखला ने आधार वर्ष 2011-12 वाली पुरानी श्रृंखला का स्थान लिया है.
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