गुजरात HC बोला-मायके गई पत्नी को थप्पड़ मारना क्रूरता नहीं:अत्याचार साबित करने को मारपीट के ठोस सबूत चाहिए; पति को आरोपों से बरी किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि पत्नी के बिना बताए मायके में रात रुकने पर पति द्वारा थप्पड़ मारने की एक घटना को क्रूरता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने एक पुराने मामले में पति को आरोपों से बरी कर दिया। जस्टिस गीता गोपी ने आदेश में कहा कि क्रूरता साबित करने के लिए लगातार और असहनीय मारपीट के ठोस सबूत जरूरी हैं। आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में यह भी दिखाना होगा कि आरोपी के कृत्य और आत्महत्या के बीच नजदीकी कारण संबंध था। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा संबंध साबित नहीं हुआ। अब जानिए क्या है पूरा मामला यह फैसला दिलीपभाई मंगलाभाई वरली की अपील पर आया। उन्होंने सेशंस कोर्ट के 2003 के फैसले को चुनौती दी थी। सेशंस कोर्ट ने मई 1996 में पत्नी की आत्महत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए धारा 306 में सात साल और धारा 498ए में एक साल की सजा सुनाई थी। अपीलकर्ता की ओर से धवल व्यास ने दलील दी कि आरोप सामान्य थे और दहेज मांग या उकसाने का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि विवाद पति के रात में बैंजो बजाने के लिए बाहर जाने और देर से लौटने को लेकर होता था। राज्य की ओर से ज्योति भट्ट ने सजा बरकरार रखने की मांग की। हाई कोर्ट ने कहा कि अभियोजन लगातार क्रूरता, मेडिकल रिकॉर्ड या पूर्व शिकायतें पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त सबूत के बिना सजा दी थी। ---------------- ये खबर भी पढ़ें… बिना वजह पति से दूरी बनाना मानसिक क्रूरता: 10 साल से मायके में पत्नी पत्नी ने बिना पर्याप्त कारण वैवाहिक जीवन से दूरी बनाई, यह पति के प्रति मानसिक क्रूरता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद में फैसला सुनाते हुए पति की तलाक मंजूर कर ली है। पत्नी पिछले 10 साल से मायके में रह रही है। पूरी खबर पढ़ें…
ED ने 9-महीने में ₹32000 करोड़ की संपत्ति अटैच की:यह गृह मंत्रालय के एक साल के बजट के बराबर; जमीन-जायदाद में 8 गुना जब्ती
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस वित्त वर्ष के पहले 9 महीने में ही 32,500 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर चुकी है। मोदी सरकार के दस साल का रिकॉर्ड देखें तो अटैच की गई जमीन-जायदाद में 8 गुना से अधिक बढ़ोतरी हो चुकी है। इस साल सबसे बड़ी गाज अनिल अंबानी समूह पर गिरी है, जिसकी 5600 करोड़ रु की संपत्ति अटैच हुई है। इसके अलावा क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड में 4190 करोड़ रु., पर्ल ग्रुप पोंजी के 3436 करोड़ रु. और यूनाइटेड रियल एस्टेट के 1000 करोड़ रु. की संपत्तियां भी दायरे में आई हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार 141% अधिक संपत्ति अटैच की गई है। एजेंसी कुल मिलाकर अब तक 1.55 लाख करोड़ की संपत्ति अटैच कर चुकी है, जो एक साल के गृह मंत्रालय के बजट के बराबर है। इसमें बैंक खाते, एफडी, शेयर, वाहन, लग्जरी आइटम, कॉर्पोरेट प्रॉपर्टी और इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो शामिल हैं। अदालती प्रक्रिया में लगने वाला वक्त बड़ी चुनौती पीएमएलए की आरंभिक जांच के बाद संपत्ति जब्त की गईं और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर कोर्ट में अटैचमेंट सही भी पाए गए। पर, बड़ी बाधा अदालती प्रक्रिया लगातार खिंचते जाने की है और मामले पर फैसला आने तक संपत्ति फ्रोजन हालत में रहती है। 2012-13 में 2347 करोड़ रु. की संपत्ति की गई थी जब्त पिछले 12 साल में ईडी के मामलों में साढ़े सात गुना और जब्त की गई संपत्ति में 12 गुना बढ़ोतरी हुई है। कभी 2012-13 में 62 मामलों में 2347 करोड़ रु की संपत्ति जब्त की गई थी, जिसमें से अदालतों में 325 करोड़ रुपए सही पाए गए थे। 15 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति वापसी का आदेश आर्थिक अपराधियों के खिलाफ ईडी की रोज रोज होने वाली कार्रवाई और संपत्तियां जब्त करने की खबरों की पड़ताल के बाद भास्कर ने पाया कि अदालतों से एक लाख 6 हजार करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति को सही माना है। वहीं, 30 मामलों में अदालतों ने 15 हजार करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति वापस करने का भी आदेश दिया है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… I-Pac रेड विवाद- ED सुप्रीम कोर्ट में बोली-CM के फायदे के लिए पुलिस ने काम में रुकावट डाली केंद्रीय जांच एजेंसी एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट(ED) ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया है। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि CM और राज्य की मशीनरी कथित कोयला चोरी स्कैम के सिलसिले में I-PAC ऑफिस और उसके डायरेक्टर के ठिकानों पर रेड के दौरान गैर-कानूनी तरीके से घुसे। पूरी खबर पढ़ें…
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