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भारी बदलाव के बाद कितना मजबूत हुआ दिल्ली कैपिटल्स का कोचिंग स्टाफ? क्या 2 बार का वर्ल्ड चैंपियन दिला पाएगा पहला IPL खिताब

Delhi Capitals: इंडियन प्रीमियर लीग 2027 सीजन से पहले दिल्ली कैपिटल्स ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. पिछले सीजन में छठे स्थान पर रहने के बाद, टीम के सह-मालिकों (GMR और JSW) ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने पूरे सपोर्ट स्टाफ को बदल डाला है. दिल्ली कैपिटल्स इस बार किसी प्रयोग के बजाय सीधे 'दिग्गजों की फौज' उतारने जा रही है. दिल्ली कैपिटल्स ने भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच-विनर और 2 बार के वर्ल्ड चैंपियन युवराज सिंह को अपना नया असिस्टेंट और बैटिंग कोच नियुक्त किया है. युवराज के साथ ही हेड कोच के रूप में सौरव गांगुली, तेज गेंदबाजी कोच के रूप में श्रीलंका के दिग्गज चामिंडा वास और स्पिन कोच के रूप में अमित मिश्रा की एंट्री हुई है. इस भारी बदलाव और इतने बड़े-बड़े दिग्गजों के आने के बाद फैंस के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिग्गजों का यह नया ग्रुप दिल्ली कैपिटल्स की किस्मत बदलकर उन्हें इतिहास की पहली आईपीएल ट्रॉफी दिला पाएगा? तो आइए इस आर्टिकल में जानने की कोशिश करते हैं. 

दिल्ली कैपिटल्स का नया 'सुपरस्टार' कोचिंग स्टाफ

दिल्ली कैपिटल्स ने इस बार अपनी कमियों को दूर करने के लिए हर विभाग में दुनिया के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों को चुना है. टीम के हेड कोच सौरव गांगुली हैं, जो एक बेहतरीन टीम बनाने और युवा खिलाड़ियों को निखारने में माहिर हैं. बल्लेबाजी की कमान असिस्टेंट कोच युवराज सिंह के हाथों में है, जिनका काम बल्लेबाजों के अंदर से डर निकालना और बड़े मैचों का प्रेशर झेलना सिखाना है. तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी श्रीलंका के चामिंडा वास संभालेंगे, जो स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ के उस्ताद हैं. वहीं, स्पिन डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी अमित मिश्रा को मिली है, जो आईपीएल इतिहास में 3 बार हैट्रिक लेने वाले सबसे चतुर लेग स्पिनर हैं. 

• हेड कोच: सौरव गांगुली
• बल्लेबाजी कोच: युवराज सिंह
• तेज गेंदबाजी कोच: चामिंडा वास (श्रीलंका के दिग्गज)
• स्पिन गेंदबाजी कोच: अमित मिश्रा

क्यों खास है युवराज सिंह का दिल्ली कैपिटल्स से जुड़ना?

युवराज सिंह का दिल्ली कैपिटल्स के साथ रिश्ता बहुत दिलचस्प है. साल 2015 के आईपीएल ऑक्शन में दिल्ली ने उन्हें 16 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर खरीदा था. अब 11 साल बाद वे खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि एक मेंटर और कोच के रूप में इस टीम में वापस आए हैं. यह युवराज सिंह के कोचिंग करियर की पहली औपचारिक और आधिकारिक शुरुआत भी है. क्रिकेट फैंस जानते हैं कि 'युवी' सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक जज्बा हैं. उन्होंने भारत को 2007 का टी20 वर्ल्ड कप और 2011 का वनडे वर्ल्ड कप अपने दम पर जिताया था. जब दिल्ली की टीम दबाव के पलों में बिखर जाती है, तो वहां युवराज सिंह का चैंपियन माइंडसेट खिलाड़ियों के बेहद काम आने वाला है. 

युवी का मेंटरशिप मैजिक, शुभमन और अभिषेक को बनाया सुपरस्टार

भले ही युवराज सिंह पहली बार आईपीएल में कोचिंग की कमान संभाल रहे हों, लेकिन वे लंबे समय से भारतीय क्रिकेट के नए सुपरस्टार्स के गुरु रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा हैं, जिन्हें युवराज ने अपने घर पर रखकर ट्रेनिंग दी है. इन दोनों की सफलता के पीछे युवी पाजी की कड़ी मेहनत है, जिसके कारण इनके खेलने में युवराज जैसा निडर अंदाज दिखता है. अब युवराज के आने से दिल्ली कैपिटल्स के उन युवा बल्लेबाजों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो अक्सर स्पिन या तेज गेंदबाजी के सामने जल्दी आउट हो जाते हैं. युवराज इन युवाओं को क्रीज पर टिक कर खेलने और बिना डरे बड़े शॉट्स लगाने की बेहतरीन तकनीक सिखाएंगे. 

दादा और युवी की ऐतिहासिक जोड़ी अब ड्रेसिंग रूम से मचेगी धमाल

क्रिकेट के पुराने फैंस अच्छी तरह जानते हैं कि सौरव गांगुली ही वह कप्तान थे जिन्होंने युवराज सिंह के टैलेंट को सबसे पहले पहचाना और साल 2000 में उन्हें भारतीय टीम में एंट्री दिलाई थी. साल 2002 में लॉर्ड्स के मैदान पर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में भी गांगुली की कप्तानी और युवराज की तूफानी बल्लेबाजी की जोड़ी सुपरहिट रही थी. अब यही पुरानी और भरोसेमंद जोड़ी दिल्ली कैपिटल्स के सपोर्ट स्टाफ की असली ताकत बनने जा रही है. जहां एक तरफ गांगुली पर्दे के पीछे रहकर टीम की बड़ी रणनीतियां बनाएंगे. वहीं युवराज सीधे मैदान पर खिलाड़ियों के साथ मिलकर उनकी बल्लेबाजी को सुधारेंगे. इन दोनों दिग्गजों की कमाल की ट्यूनिंग ड्रेसिंग रूम के माहौल को बेहद मजबूत और खुशनुमा बनाएगी, जिसका सीधा फायदा दिल्ली की टीम को मिलेगा.

चामिंडा वास-अमित मिश्रा के आने से दिल्ली की बॉलिंग यूनिट हुई बेहद मजबूत

सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, दिल्ली कैपिटल्स ने इस बार अपनी गेंदबाजी को मजबूत करने के लिए भी कमाल के बदलाव किए हैं. दिल्ली की टीम अक्सर डेथ ओवर्स में ज्यादा रन लुटाने के लिए ट्रोल होती रही है. इस कमजोरी को दूर करने के लिए श्रीलंका के महान तेज गेंदबाज चामिंडा वास को लाया गया है, जिनके नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 750 से ज्यादा विकेट हैं. वे दिल्ली के तेज गेंदबाजों को सटीक यॉर्कर और कटर डालने के गुर सिखाएंगे.

वहीं दूसरी तरफ, स्पिन डिपार्टमेंट को संभालने के लिए भारतीय पूर्व दिग्गज अमित मिश्रा की घर वापसी हुई है. मिश्रा जी दिल्ली कैपिटल्स के लिए लंबे समय तक खेल चुके हैं और इस टीम के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं. अब वास की रफ्तार का तजुर्बा और मिश्रा जी की चतुर फिरकी मिलकर दिल्ली की गेंदबाजी को सुपर हिट बनाएगी.

क्या दिल्ली कैपिटल्स इस बार जीत पाएगी पहला खिताब?

दिल्ली कैपिटल्स ने पिछले 19 सीजनों में एक बार भी आईपीएल की ट्रॉफी नहीं जीती है. उनका सबसे बेस्ट प्रदर्शन साल 2020 में था, जब वे फाइनल में पहुंचे थे. लेकिन इस बार मैनेजमेंट ने कप्तानी के मोर्चे पर बड़े बदलाव करने के साथ-साथ, ऋषभ पंत की वापसी और केएल राहुल की मौजूदगी से अपने कोचिंग स्टाफ को 'अजेय' बना दिया है. 

युवराज सिंह का खूंखार और कभी न हार मानने वाला रवैया, सौरव गांगुली का तेज दिमाग, और गेंदबाजी में वास-मिश्रा की जुगलबंदी यह साफ बताती है कि दिल्ली कैपिटल्स IPL 2027 में सिर्फ हिस्सा लेने नहीं, बल्कि ट्रॉफी उठाने के इरादे से उतरेगी. फैंस के लिए यह सीजन बेहद रोमांचक होने वाला है क्योंकि इस बार 'दिल्ली के दिल' में चैंपियंस का दिमाग काम कर रहा है.

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क्या है SEM कोर्ट, जिसने CJP नेताओं को भेजा था तिहाड़? जानिए इसकी ताकत, सीमाएं और जमानतदार रिजेक्ट करने का पूरा नियम...

Special Executive Magistrate: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को लेकर एक शब्द बार-बार सुर्खियों में है, वह है  SEM कोर्ट. दरअसल, ये स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट होती है. आखिर यह अदालत क्या होती है, इसके पास कितनी ताकत है और इसकी सीमाएं क्या हैं. आइए आपको आसान भाषा में बताते हैं. 

SEM कोर्ट आखिर क्या होती है?

SEM का मतलब है स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट होता है. जानकारी के मुताबिक यह सामान्य आपराधिक अदालत की तरह मुकदमा चलाने वाला जज नहीं होता है. बल्कि इस कोर्ट के जज के पास कार्यपालिका का अधिकारी होता है. जिसे कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने से जुड़े खास काम सौंपे जाते हैं. राज्य सरकार किसी क्षेत्र या किसी खास काम के लिए ऐसे मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है.

यह न्यायिक मजिस्ट्रेट से कैसे अलग है?

न्यायिक मजिस्ट्रेट अपराधों की सुनवाई करता है, सबूत देखता है और दोषी या निर्दोष तय करता है. वहीं, कार्यपालक मजिस्ट्रेट का काम मुख्य रूप से रोकथाम का होता है. जो शांति भंग होने की आशंका पर पहले से कदम उठाना आदि. इसीलिए इसकी कार्यवाही आम तौर पर सजा देने के लिए नहीं बल्कि गड़बड़ी रोकने के लिए होती है.

SEM के पास कौन-सी बड़ी ताकतें होती हैं?

कानून के जानकारों के मुताबिक SEM कोर्ट निषेधाज्ञा के आदेश दे सकता है. जैसे हाल में चर्चा में रही बीएनएसएस की धारा 163. इसके अलावा शांति भंग की आशंका वाले व्यक्ति से 'बॉन्ड' भरवाने, यानी भविष्य में अच्छा आचरण रखने का लिखित वादा लेने और उसके साथ जमानतदार मांगने का अधिकार भी होता है. अगर कोई व्यक्ति यह सुरक्षा बॉन्ड या जमानतदार पेश नहीं कर पाता तो उसे तय अवधि के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है.

क्या SEM किसी को सजा सुना सकता है?

जानकारी के मुताबिक SEM किसी आपराधिक मामले में किसी को दोषी ठहराकर सजा नहीं सुनाता है. कोर्ट का उसकी हिरासत का मकसद सजा नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शांति बनी रहे. इसलिए कोर्ट की हिरासत आम तौर पर सीमित अवधि के लिए होती है और उसके लिए कारण दर्ज करना जरूरी माना जाता है.

जमानतदार को खारिज करने का अधिकार किसके पास होता है?

कानून मजिस्ट्रेट को यह परखने की छूट देता है कि जमानतदार वाकई योग्य और भरोसेमंद है या नहीं. इसका मकसद यह देखना होता है कि जमानतदार का आरोपी पर कितना नियंत्रण है और क्या वह उसे जरूरत पड़ने पर अदालत के सामने पेश कर सकता है या नहीं. लेकिन यह अधिकार मनमाना नहीं माना जा सकता और इसका इस्तेमाल ठोस कारणों के साथ होना चाहिए.

सौरव दास और आशुतोष रांका का मामला क्या है?

CJP के ये दोनों सह-संयोजक दिल्ली के प्रतिबंधित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल थे. 13 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने एहतिहातन कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लिया था. पुलिस के मुताबिक 14 अक्टूबर को उन्हें SEM के सामने पेश किया गया. जहां से दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था.

सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत कैसे बढ़ती गई?

जानकारी के मुताबिक पांच दिन पूरे होने के बाद 19 अक्टूबर को दोनों को फिर SEM के सामने पेश किया गया. जहां जिरह के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों को आगे और पांच दिन हिरासत में भेजने की मांग की. लेकिन अदालत ने सिर्फ दो दिन की मंजूरी दी. इसके साथ दोनों को 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अदालत ने बचाव पक्ष को दो दिन के भीतर लिखित जवाब और नए जमानतदारों की सूची दाखिल करने को भी कहा था. 21 अक्टूबर को फिर दोनों के मामले में सुनवाई है, जिस पर कोर्ट कोई निर्णय लेगी. 

SEM ने अपने आदेश में क्या कारण बताए?

इससे पहले इस मामले में मजिस्ट्रेट ने कहा कि था दोनों ने 11 अक्टूबर को दिया अपना बॉन्ड जानबूझकर तोड़ा और तुरंत शांति भंग की. आदेश में यह भी लिखा गया था कि दोनों का आचरण कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाता और वे प्रतिबंधित इलाकों में प्रदर्शन के आदी रहे हैं. अदालत के मुताबिक भविष्य में ऐसा न करने का उनका आश्वासन भी रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के सामने भरोसा जगाने में विफल रहा.

SEM ने जमानतदारों को लेकर आदेश में क्या कहा था?

आदेश के मुताबिक मजिस्ट्रेट ने नए जमानतदारों से व्यक्तिगत पूछताछ की. एक जमानतदार के बॉन्ड और पहचान पत्र में तस्वीरों का अंतर पाया गया और जब उससे दूसरा पहचान पत्र मांगा गया तो वह पेश नहीं कर सका. दूसरा जमानतदार उस व्यक्ति के बारे में माता-पिता का नाम और पता जैसी बुनियादी जानकारी तक नहीं बता पाया जिसके लिए वह जमानत देने आया था. अदालत ने माना कि इन दोनों का आरोपियों पर कोई नियंत्रण नहीं है.

CJP और उसके वकीलों का क्या कहना है?

CJP का आरोप है कि जमानतदारों को खारिज करना पुलिस कार्रवाई की मंशा पर सवाल खड़े करता है. उसके वकीलों ने मीडिया में दिए बयान में कहा कि यह आदेश कानून और सुप्रीम कोर्ट के तय किए गए 'ड्यू प्रोसेस' का उल्लंघन है. वकीलों का दावा है कि पिछले चार दिनों में मजिस्ट्रेट ने आठ अलग-अलग लोगों को जमानतदार के रूप में खारिज किया है. 

क्या SEM के आदेश को चुनौती दी जा सकती है?

SEM का आदेश अंतिम नहीं होता है. CJP के दोनों नेताओं ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है और याचिका वापस भी ले ली. बता दें इस केस की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एनसीआर यानी गैर-संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट दर्ज की है. 

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