Responsive Scrollable Menu

क्या है SEM कोर्ट, जिसने CJP नेताओं को भेजा था तिहाड़? जानिए इसकी ताकत, सीमाएं और जमानतदार रिजेक्ट करने का पूरा नियम...

Special Executive Magistrate: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को लेकर एक शब्द बार-बार सुर्खियों में है, वह है  SEM कोर्ट. दरअसल, ये स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट होती है. आखिर यह अदालत क्या होती है, इसके पास कितनी ताकत है और इसकी सीमाएं क्या हैं. आइए आपको आसान भाषा में बताते हैं. 

SEM कोर्ट आखिर क्या होती है?

SEM का मतलब है स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट होता है. जानकारी के मुताबिक यह सामान्य आपराधिक अदालत की तरह मुकदमा चलाने वाला जज नहीं होता है. बल्कि इस कोर्ट के जज के पास कार्यपालिका का अधिकारी होता है. जिसे कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने से जुड़े खास काम सौंपे जाते हैं. राज्य सरकार किसी क्षेत्र या किसी खास काम के लिए ऐसे मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है.

यह न्यायिक मजिस्ट्रेट से कैसे अलग है?

न्यायिक मजिस्ट्रेट अपराधों की सुनवाई करता है, सबूत देखता है और दोषी या निर्दोष तय करता है. वहीं, कार्यपालक मजिस्ट्रेट का काम मुख्य रूप से रोकथाम का होता है. जो शांति भंग होने की आशंका पर पहले से कदम उठाना आदि. इसीलिए इसकी कार्यवाही आम तौर पर सजा देने के लिए नहीं बल्कि गड़बड़ी रोकने के लिए होती है.

SEM के पास कौन-सी बड़ी ताकतें होती हैं?

कानून के जानकारों के मुताबिक SEM कोर्ट निषेधाज्ञा के आदेश दे सकता है. जैसे हाल में चर्चा में रही बीएनएसएस की धारा 163. इसके अलावा शांति भंग की आशंका वाले व्यक्ति से 'बॉन्ड' भरवाने, यानी भविष्य में अच्छा आचरण रखने का लिखित वादा लेने और उसके साथ जमानतदार मांगने का अधिकार भी होता है. अगर कोई व्यक्ति यह सुरक्षा बॉन्ड या जमानतदार पेश नहीं कर पाता तो उसे तय अवधि के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है.

क्या SEM किसी को सजा सुना सकता है?

जानकारी के मुताबिक SEM किसी आपराधिक मामले में किसी को दोषी ठहराकर सजा नहीं सुनाता है. कोर्ट का उसकी हिरासत का मकसद सजा नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शांति बनी रहे. इसलिए कोर्ट की हिरासत आम तौर पर सीमित अवधि के लिए होती है और उसके लिए कारण दर्ज करना जरूरी माना जाता है.

जमानतदार को खारिज करने का अधिकार किसके पास होता है?

कानून मजिस्ट्रेट को यह परखने की छूट देता है कि जमानतदार वाकई योग्य और भरोसेमंद है या नहीं. इसका मकसद यह देखना होता है कि जमानतदार का आरोपी पर कितना नियंत्रण है और क्या वह उसे जरूरत पड़ने पर अदालत के सामने पेश कर सकता है या नहीं. लेकिन यह अधिकार मनमाना नहीं माना जा सकता और इसका इस्तेमाल ठोस कारणों के साथ होना चाहिए.

सौरव दास और आशुतोष रांका का मामला क्या है?

CJP के ये दोनों सह-संयोजक दिल्ली के प्रतिबंधित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल थे. 13 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने एहतिहातन कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लिया था. पुलिस के मुताबिक 14 अक्टूबर को उन्हें SEM के सामने पेश किया गया. जहां से दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था.

सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत कैसे बढ़ती गई?

जानकारी के मुताबिक पांच दिन पूरे होने के बाद 19 अक्टूबर को दोनों को फिर SEM के सामने पेश किया गया. जहां जिरह के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों को आगे और पांच दिन हिरासत में भेजने की मांग की. लेकिन अदालत ने सिर्फ दो दिन की मंजूरी दी. इसके साथ दोनों को 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अदालत ने बचाव पक्ष को दो दिन के भीतर लिखित जवाब और नए जमानतदारों की सूची दाखिल करने को भी कहा था. 21 अक्टूबर को फिर दोनों के मामले में सुनवाई है, जिस पर कोर्ट कोई निर्णय लेगी. 

SEM ने अपने आदेश में क्या कारण बताए?

इससे पहले इस मामले में मजिस्ट्रेट ने कहा कि था दोनों ने 11 अक्टूबर को दिया अपना बॉन्ड जानबूझकर तोड़ा और तुरंत शांति भंग की. आदेश में यह भी लिखा गया था कि दोनों का आचरण कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाता और वे प्रतिबंधित इलाकों में प्रदर्शन के आदी रहे हैं. अदालत के मुताबिक भविष्य में ऐसा न करने का उनका आश्वासन भी रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के सामने भरोसा जगाने में विफल रहा.

SEM ने जमानतदारों को लेकर आदेश में क्या कहा था?

आदेश के मुताबिक मजिस्ट्रेट ने नए जमानतदारों से व्यक्तिगत पूछताछ की. एक जमानतदार के बॉन्ड और पहचान पत्र में तस्वीरों का अंतर पाया गया और जब उससे दूसरा पहचान पत्र मांगा गया तो वह पेश नहीं कर सका. दूसरा जमानतदार उस व्यक्ति के बारे में माता-पिता का नाम और पता जैसी बुनियादी जानकारी तक नहीं बता पाया जिसके लिए वह जमानत देने आया था. अदालत ने माना कि इन दोनों का आरोपियों पर कोई नियंत्रण नहीं है.

CJP और उसके वकीलों का क्या कहना है?

CJP का आरोप है कि जमानतदारों को खारिज करना पुलिस कार्रवाई की मंशा पर सवाल खड़े करता है. उसके वकीलों ने मीडिया में दिए बयान में कहा कि यह आदेश कानून और सुप्रीम कोर्ट के तय किए गए 'ड्यू प्रोसेस' का उल्लंघन है. वकीलों का दावा है कि पिछले चार दिनों में मजिस्ट्रेट ने आठ अलग-अलग लोगों को जमानतदार के रूप में खारिज किया है. 

क्या SEM के आदेश को चुनौती दी जा सकती है?

SEM का आदेश अंतिम नहीं होता है. CJP के दोनों नेताओं ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है और याचिका वापस भी ले ली. बता दें इस केस की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एनसीआर यानी गैर-संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट दर्ज की है. 

हिंसक प्रदर्शनों के दौरान चेहरा छिपाने पर पूरी तरह पाबंदी, क्या है एंटी-रायट कानून? पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने उठाया ये सख्त कदम...

Explainer: ‘समाजवाद ही रामराज्य है’, अखिलेश के इस बयान से यूपी की सियासत में नई बहस, क्या 2027 में राम बनाम PDA होगा मुकाबला?

Explainer: ट्रेन में स्पीकर पर रील-गाना चलाने वाले सावधान! रेलवे ने दी जेल तक की चेतावनी, सिगरेट पीने, महिला कोच में सफर करने वालें भी जानें ये नियम

 

Continue reading on the app

ये हैं सबसे ज्यादा माइलेज देने वाली ऑटोमैटिक कार; कीमत मात्र ₹4,77,400 से शुरू

10 Most Fuel Efficient Automatic Cars in India: अगर आप बार-बार बढ़ते पेट्रोल खर्च से परेशान हैं और नई ऑटोमैटिक कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये 10 कारें आपके काम आ सकती हैं. Maruti Suzuki Grand Vitara के हाइब्रिड इंजन से लेकर Alto K10 और S-Presso जैसी बजट कारों तक, इस लिस्ट में कई शानदार विकल्प हैं. कुछ मॉडल 25 kmpl से ज्यादा माइलेज देने का दावा करते हैं. जानिए किस कार की कीमत कितनी है, माइलेज कितना मिलता है और आपके बजट के लिए कौन-सी कार बेहतर हो सकती है.

Continue reading on the app

  Sports

3 महारिकॉर्ड ईशान किशन के निशाने पर...भारत-न्यूजीलैंड टी20 सीरीज में रच सकते हैं इतिहास

Ishan Kishan can made 3 record: विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन इन दिनों अपने करियर के सबसे बेहतरीन फॉर्म से गुजर रहे हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च में शुरू होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज उनके लिए सिर्फ एक और सीरीज नहीं, बल्कि इतिहास रचने का एक ऐतिहासिक मंच है. क्रिकेट के इस छोटे फॉर्मेट में उनका बल्ला इस साल जिस तरह से गरजा है, उसने दुनिया भर के गेंदबाजों की नींद उड़ा दी है. यही वजह है कि साल के अंत तक उनके पास एक-दो नहीं बल्कि तीन बड़े और ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम करने का सुनहरा मौका है. Wed, 21 Oct 2026 22:31:00 +0530

  Videos
See all

Saurabh Das & Ashutosh Ranka Released : सौरभ और आशुतोष को शर्तों पर मिली जमानत? | CJP | Delhi Police #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-21T19:46:48+00:00

PM Kisan Yojana : PM किसान योजना की 24वीं किस्त पर अपडेट! | PM Kisan | Samman Nidhi| PM KisanYojana #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-21T19:30:09+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers