100 मिनट में फुल सब्सक्राइब हुआ Jio का IPO, पहले दिन ₹50,000 करोड़ के पार पहुंचीं बोलियां, जानिए कैसे टूटा हर रिकॉर्ड
Jio IPO Subscription: भारतीय प्राइमरी मार्केट में एक नया माइलस्टोन हासिल हुआ है. रिलायंस की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms Ltd. का ₹30,213 करोड़ का IPO बुधवार, 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला और तुरंत ही इन्वेस्टर्स की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. रिपोर्ट्स के मुताबिक इश्यू खुलने के मात्र 100 मिनट के अंदर यह आईपीओ पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया. दोपहर तक बिड्स की संख्या ₹50,000 करोड़ से ज्यादा हो गई. यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO है. इसके पहले दिन की रफ्तार ने ही मार्केट एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है.
इश्यू 100 मिनट में कैसे पूरा हुआ?
"पूरी तरह सब्सक्राइब" का मतलब है कि कंपनी को उतने ही या उससे ज्यादा शेयरों के लिए बिड्स मिलीं, जितने शेयर उसने इन्वेस्टर्स को बेचने के लिए ऑफर किए थे. जियो का इश्यू खुलने के 100 मिनट के अंदर ही इस आंकड़े तक पहुंच गया. रिपोर्ट्स में इसे भारतीय इतिहास का सबसे तेज सब्सक्राइब होने वाला IPO बताया गया है. यह स्पीड दिखाती है कि इन्वेस्टर्स को रिलायंस के डिजिटल बिजनेस पर कितना भरोसा है.
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2:45 PM तक का डेटा
स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक दोपहर के 2:45 बजे तक कुल इन्वेस्टर बिड्स ₹50,000 करोड़ से ज्यादा हो गई थीं. यह इश्यू पहले ही दिन 2.35 गुना सब्सक्राइब हुआ. इन्वेस्टर्स ने 465 मिलियन शेयरों के लिए बिड लगाई, जबकि केवल 197.5 मिलियन शेयर ही बिक्री के लिए उपलब्ध थे. 2.35 गुना सब्सक्रिप्शन का मतलब है कि हर 1 शेयर के लिए लगभग 2.35 शेयरों की डिमांड थी. सोचिए अगर किसी दुकान में 100 सीटें हों और 235 लोग लाइन में लगे हों, तो डिमांड सीटों की संख्या से लगभग ढाई गुना ज्यादा होगी. जीयो के आईपीओ के साथ भी ऐसा ही हुआ.
इश्यू की पूरी जानकारी
कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर तय किया है. इस इश्यू में 27 करोड़ इक्विटी शेयर तक के नए इश्यू शामिल हैं, जिनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है. ऊपरी प्राइस बैंड पर, यह ₹30,213 करोड़ होता है. यह इश्यू 21 अक्टूबर को खुला और शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंद होगा. एंकर इन्वेस्टर्स ने सोमवार, 19 अक्टूबर को बिड जमा कीं. एंकर इन्वेस्टर्स बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स होते हैं जिन्हें IPO खुलने से एक दिन पहले शेयर अलॉट किए जाते हैं.रिटेल इन्वेस्टर्स को कम से कम 12 शेयरों के लिए और उसके बाद 12 के मल्टीपल में बिड लगानी होगी. ऊपरी प्राइस बैंड पर, एक लॉट की कीमत ₹13,428 है. एम्प्लॉई कोटे के तहत बिड लगाने वाले एलिजिबल एम्प्लॉई को प्रति शेयर ₹54 का डिस्काउंट मिलेगा.
पिछले रिकॉर्ड से कितना बड़ा?
इस IPO से पहले सबसे बड़ा इश्यू हुंडई मोटर इंडिया का था, जिसने 2024 में ₹27,858.75 करोड़ जुटाए थे. जियो का ₹30,213 करोड़ का इश्यू इससे लगभग 8% बड़ा है. इसका मतलब है कि यह IPO साइज और सब्सक्रिप्शन रेट दोनों के मामले में पिछले रिकॉर्ड को पार करता दिख रहा है.
इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की भूमिका
IPO में इन्वेस्टर्स को कई कैटेगरी में बांटा गया है. इनमें QIB (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स) शामिल हैं, जिनमें म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस कंपनियां और बड़े फंड हाउस शामिल हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि मजबूत डिमांड के पीछे इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की एग्रेसिव हिस्सेदारी थी. इससे पता चलता है कि बड़े इन्वेस्टर्स को जियो के बिजनेस, कैश फ्लो और भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में इसकी मजबूत स्थिति पर भरोसा है. हालांकि, कैटेगरी-वाइज सब्सक्रिप्शन के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं.
रिलायंस इन्वेस्टर्स के लिए इसका क्या मतलब है?
जियो का IPO रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए वैल्यू अनलॉक करने में मदद कर सकता है. अभी Jio की वैल्यू रिलायंस की ओवरऑल वैल्यूएशन में शामिल है, जिसमें रिटेल, ऑयल-टू-कैमिकल्स और न्यू एनर्जी जैसे बिजनेस भी शामिल हैं. लिस्टिंग के बाद, जियो के अपने शेयर की कीमत उसके टेलीकॉम बिजनेस की मार्केट-बेस्ड वैल्यू को दिखाएगी. इससे इन्वेस्टर्स को यह समझने में मदद मिलेगी कि रिलायंस के शेयर उसके सभी बिजनेस की कुल वैल्यू के मुकाबले सस्ते हैं या नहीं. लेकिन ध्यान रखें कि IPO अपने आप में रिलायंस शेयरहोल्डर्स के लिए एक्स्ट्रा वैल्यू नहीं बनाता है. असली फायदा जियो को मिलने वाली वैल्यूएशन, रिलायंस के पास बची हुई हिस्सेदारी और लिस्टिंग के बाद पेरेंट कंपनी के मार्केट के असेसमेंट पर निर्भर करेगा.
इससे मार्केट को क्या सिग्नल मिल रहा है?
यह रिस्पॉन्स ऐसे समय में आया है जब इस साल स्टॉक मार्केट दबाव में रहा है. US-ईरान टेंशन, फॉरेन इन्वेस्टर की बिकवाली, कमजोर रुपया और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों के बीच इस साल सेंसेक्स और निफ्टी में 12% से ज़्यादा की गिरावट आई है. ऐसे माहौल में इतने बड़े इश्यू की मजबूत डिमांड बड़े और मजबूत नामों में इन्वेस्टर की लगातार दिलचस्पी दिखाती है. इसके अलावा, जिस आसानी से इतने बड़े ऑर्डर वॉल्यूम को हैंडल किया गया, वह भविष्य के बड़े IPO के लिए एक नया बेंचमार्क सेट कर सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी अलग-अलग एनालिस्ट और ब्रोकरेज फर्मों की राय पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
भारी बदलाव के बाद कितना मजबूत हुआ दिल्ली कैपिटल्स का कोचिंग स्टाफ? क्या 2 बार का वर्ल्ड चैंपियन दिला पाएगा पहला IPL खिताब
Delhi Capitals: इंडियन प्रीमियर लीग 2027 सीजन से पहले दिल्ली कैपिटल्स ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. पिछले सीजन में छठे स्थान पर रहने के बाद, टीम के सह-मालिकों (GMR और JSW) ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने पूरे सपोर्ट स्टाफ को बदल डाला है. दिल्ली कैपिटल्स इस बार किसी प्रयोग के बजाय सीधे 'दिग्गजों की फौज' उतारने जा रही है. दिल्ली कैपिटल्स ने भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच-विनर और 2 बार के वर्ल्ड चैंपियन युवराज सिंह को अपना नया असिस्टेंट और बैटिंग कोच नियुक्त किया है. युवराज के साथ ही हेड कोच के रूप में सौरव गांगुली, तेज गेंदबाजी कोच के रूप में श्रीलंका के दिग्गज चामिंडा वास और स्पिन कोच के रूप में अमित मिश्रा की एंट्री हुई है. इस भारी बदलाव और इतने बड़े-बड़े दिग्गजों के आने के बाद फैंस के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिग्गजों का यह नया ग्रुप दिल्ली कैपिटल्स की किस्मत बदलकर उन्हें इतिहास की पहली आईपीएल ट्रॉफी दिला पाएगा? तो आइए इस आर्टिकल में जानने की कोशिश करते हैं.
दिल्ली कैपिटल्स का नया 'सुपरस्टार' कोचिंग स्टाफ
दिल्ली कैपिटल्स ने इस बार अपनी कमियों को दूर करने के लिए हर विभाग में दुनिया के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों को चुना है. टीम के हेड कोच सौरव गांगुली हैं, जो एक बेहतरीन टीम बनाने और युवा खिलाड़ियों को निखारने में माहिर हैं. बल्लेबाजी की कमान असिस्टेंट कोच युवराज सिंह के हाथों में है, जिनका काम बल्लेबाजों के अंदर से डर निकालना और बड़े मैचों का प्रेशर झेलना सिखाना है. तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी श्रीलंका के चामिंडा वास संभालेंगे, जो स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ के उस्ताद हैं. वहीं, स्पिन डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी अमित मिश्रा को मिली है, जो आईपीएल इतिहास में 3 बार हैट्रिक लेने वाले सबसे चतुर लेग स्पिनर हैं.
• हेड कोच: सौरव गांगुली
• बल्लेबाजी कोच: युवराज सिंह
• तेज गेंदबाजी कोच: चामिंडा वास (श्रीलंका के दिग्गज)
• स्पिन गेंदबाजी कोच: अमित मिश्रा
क्यों खास है युवराज सिंह का दिल्ली कैपिटल्स से जुड़ना?
युवराज सिंह का दिल्ली कैपिटल्स के साथ रिश्ता बहुत दिलचस्प है. साल 2015 के आईपीएल ऑक्शन में दिल्ली ने उन्हें 16 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर खरीदा था. अब 11 साल बाद वे खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि एक मेंटर और कोच के रूप में इस टीम में वापस आए हैं. यह युवराज सिंह के कोचिंग करियर की पहली औपचारिक और आधिकारिक शुरुआत भी है. क्रिकेट फैंस जानते हैं कि 'युवी' सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक जज्बा हैं. उन्होंने भारत को 2007 का टी20 वर्ल्ड कप और 2011 का वनडे वर्ल्ड कप अपने दम पर जिताया था. जब दिल्ली की टीम दबाव के पलों में बिखर जाती है, तो वहां युवराज सिंह का चैंपियन माइंडसेट खिलाड़ियों के बेहद काम आने वाला है.
A champion. A leader. ???? ????????????????????. ????????
— Delhi Capitals (@DelhiCapitals) October 13, 2026
The legend who inspired generations is ready to shape Dilli's legacy. Welcome home, Yuvi paa! ????❤️ pic.twitter.com/i7A77rv2tJ
युवी का मेंटरशिप मैजिक, शुभमन और अभिषेक को बनाया सुपरस्टार
भले ही युवराज सिंह पहली बार आईपीएल में कोचिंग की कमान संभाल रहे हों, लेकिन वे लंबे समय से भारतीय क्रिकेट के नए सुपरस्टार्स के गुरु रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा हैं, जिन्हें युवराज ने अपने घर पर रखकर ट्रेनिंग दी है. इन दोनों की सफलता के पीछे युवी पाजी की कड़ी मेहनत है, जिसके कारण इनके खेलने में युवराज जैसा निडर अंदाज दिखता है. अब युवराज के आने से दिल्ली कैपिटल्स के उन युवा बल्लेबाजों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो अक्सर स्पिन या तेज गेंदबाजी के सामने जल्दी आउट हो जाते हैं. युवराज इन युवाओं को क्रीज पर टिक कर खेलने और बिना डरे बड़े शॉट्स लगाने की बेहतरीन तकनीक सिखाएंगे.
दादा और युवी की ऐतिहासिक जोड़ी अब ड्रेसिंग रूम से मचेगी धमाल
क्रिकेट के पुराने फैंस अच्छी तरह जानते हैं कि सौरव गांगुली ही वह कप्तान थे जिन्होंने युवराज सिंह के टैलेंट को सबसे पहले पहचाना और साल 2000 में उन्हें भारतीय टीम में एंट्री दिलाई थी. साल 2002 में लॉर्ड्स के मैदान पर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में भी गांगुली की कप्तानी और युवराज की तूफानी बल्लेबाजी की जोड़ी सुपरहिट रही थी. अब यही पुरानी और भरोसेमंद जोड़ी दिल्ली कैपिटल्स के सपोर्ट स्टाफ की असली ताकत बनने जा रही है. जहां एक तरफ गांगुली पर्दे के पीछे रहकर टीम की बड़ी रणनीतियां बनाएंगे. वहीं युवराज सीधे मैदान पर खिलाड़ियों के साथ मिलकर उनकी बल्लेबाजी को सुधारेंगे. इन दोनों दिग्गजों की कमाल की ट्यूनिंग ड्रेसिंग रूम के माहौल को बेहद मजबूत और खुशनुमा बनाएगी, जिसका सीधा फायदा दिल्ली की टीम को मिलेगा.
चामिंडा वास-अमित मिश्रा के आने से दिल्ली की बॉलिंग यूनिट हुई बेहद मजबूत
सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, दिल्ली कैपिटल्स ने इस बार अपनी गेंदबाजी को मजबूत करने के लिए भी कमाल के बदलाव किए हैं. दिल्ली की टीम अक्सर डेथ ओवर्स में ज्यादा रन लुटाने के लिए ट्रोल होती रही है. इस कमजोरी को दूर करने के लिए श्रीलंका के महान तेज गेंदबाज चामिंडा वास को लाया गया है, जिनके नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 750 से ज्यादा विकेट हैं. वे दिल्ली के तेज गेंदबाजों को सटीक यॉर्कर और कटर डालने के गुर सिखाएंगे.
वहीं दूसरी तरफ, स्पिन डिपार्टमेंट को संभालने के लिए भारतीय पूर्व दिग्गज अमित मिश्रा की घर वापसी हुई है. मिश्रा जी दिल्ली कैपिटल्स के लिए लंबे समय तक खेल चुके हैं और इस टीम के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं. अब वास की रफ्तार का तजुर्बा और मिश्रा जी की चतुर फिरकी मिलकर दिल्ली की गेंदबाजी को सुपर हिट बनाएगी.
क्या दिल्ली कैपिटल्स इस बार जीत पाएगी पहला खिताब?
दिल्ली कैपिटल्स ने पिछले 19 सीजनों में एक बार भी आईपीएल की ट्रॉफी नहीं जीती है. उनका सबसे बेस्ट प्रदर्शन साल 2020 में था, जब वे फाइनल में पहुंचे थे. लेकिन इस बार मैनेजमेंट ने कप्तानी के मोर्चे पर बड़े बदलाव करने के साथ-साथ, ऋषभ पंत की वापसी और केएल राहुल की मौजूदगी से अपने कोचिंग स्टाफ को 'अजेय' बना दिया है.
युवराज सिंह का खूंखार और कभी न हार मानने वाला रवैया, सौरव गांगुली का तेज दिमाग, और गेंदबाजी में वास-मिश्रा की जुगलबंदी यह साफ बताती है कि दिल्ली कैपिटल्स IPL 2027 में सिर्फ हिस्सा लेने नहीं, बल्कि ट्रॉफी उठाने के इरादे से उतरेगी. फैंस के लिए यह सीजन बेहद रोमांचक होने वाला है क्योंकि इस बार 'दिल्ली के दिल' में चैंपियंस का दिमाग काम कर रहा है.
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