UP Election 2027: 'सनातन, राम राज्य..' पर गरमाई यूपी की सियासत, अखिलेश और सीएम योगी में तकरार!
UP Assembly Elections 2027: विजय दशमी पर रावण का दहन तो हुआ लेकिन उत्तर प्रदेश की सियासत में रावण के नाम पर सियासी वार शुरू हो गया. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के एआई वीडियो में लाल टोपी वाले रावण के जरिए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा गया तो अखिलेश यादव ने भी पलटवार किया. अखिलेश ने रामराज को समाजवाद से जोड़कर बीजेपी के हिंदुत्व की राजनीति को सीधे चुनौती दी. तो बीजेपी के वीडियो में बेरोजगारी, महिला सुरक्षा और तुष्टीकरण जैसे मुद्दों के जरिए सपा के शासनकाल को घेरने की कोशिश दिखी. सवाल यह है कि क्या 2027 के यूपी चुनाव से पहले राम, रावण और धार्मिक प्रतीकों की यह डिजिटल जंग निर्णायक होने वाली है? क्या 2027 में यूपी की सत्ता के तमाम दावेदार जनता के मुद्दों की जगह प्रतीकों की सियासत का रास्ता अपना रहे हैं? देखें ये रिपोर्ट....
Karwa Chauth 2026: करवा चौथ कब है? जानें चांद दिखने के बाद व्रत खोलने की A2Z विधि
Karwa Chauth 2026: सनातन धर्म में करवा चौथ का व्रत बहुत बड़ा और विशेष माना जाता है. इसे सुहागिन महिलाएं खूब श्रद्धा से मनाती हैं. इस वर्ष करवा चौथ का पावन पर्व 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन मनाया जाने वाला है. करवा चौथ का व्रत विवाहित स्त्रियां रखती है. इस दिन विधिविधान के साथ पत्नियां व्रत रखती हैं और पूजा करती है. सभी नियमों का पालन करती हैं और करवा माता से अखंड सौभाग्य की कामना करती है. व्रत रखने वाली सभी सुहागिन महिलाओं को पूजा और नियम का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए. इन नियमों का पालन करने से घर में हमेशा बरकत आती है और पति-पत्नी का रिश्ता मधुर रहता है. धार्मिक दृष्टिकोण से यह विशेष रात है, जिसका महत्व अत्यधिक होता है. आइए जानते हैं करवा चौथ की सही तारीख और व्रत खोलने की विधि.
करवा चौथ 2026 कब है? (Karwa Chauth 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 01 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और 29 अक्टूबर को रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगी. करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026 गुरुवार को रखा जाएगा.
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करवा चौथ पर रहेगा भद्रा का साया!
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, करवा चौथ पर भद्रा का साया नहीं रहने वाला है. भद्रा 29 अक्टूबर को प्रात:काल में ही समाप्त हो रहा है और इसलिए, सरगी से लेकर सुबह की पूजा में कोई परेशानी नहीं होगी. ब्रह्म मुहूर्त में सरगी खाने की परंपरा निभाई जाती है. वहीं, दोपहर के समय कथा सुनी जाती है और रात में चंद्रमा निकलने के बाद व्रत खोला जाता है.
करवा चौथ पूजन मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:58 से लेकर सुबह 05:46 मिनट तक
- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:48 से लेकर दोपहर 12:33 मिनट तक
- अमृत काल- सुबह 08:17 मिनट से लेकर सुबह 09:44 बजे तक
चंद्रोदय के बाद कैसे करें पूजन?
करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाओं को पूरे दिन निर्जला व्रत रखना होता है. इसके बाद रात के समय चंद्रमा के निकलने के बाद ही पूजन करना होता है. करवा चौथ पर छलनी की मदद से ही चंद्रमा दर्शन करने का विधान माना गया है. इस दौरान महिलाएं मन में अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद चंद्र देव से मांगती है. चंद्र देव को अर्घ्य देती है और उनका पूजन करती है. इसके बाद छलनी से चंद्रमा को देखने के बाद अपने पति का चेहरा देखती है. यह पल हर सुहागिन स्त्री के जीवन का खास पल माना जाता है. इस दिन सही विधि से चंद्र दर्शन करने पर दांपत्य जीवन में हमेशा मिठास और प्रेम रहता है. चंद्रमा के दर्शन करते समय मन में सिर्फ परिवार की खुशहाली की कामना करनी चाहिए.
कैसे करना चाहिए चंद्रमा को जल अर्पित?
छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के तुरंत बाद चंद्रमा को जल अर्पित करने का नियम बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान महिलाएं पूरे दिन श्रद्धाभाव के साथ जल चढ़ाकर पूजा करें. चंद्रमा को जल अर्पित करने से व्रत का पूरा फल मिलता है. जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इस पवित्र विधि को पूरा करने के पश्चात ही व्रत की मुख्य पूजा संपन्न होती है.
चंद्रमा का उदय होने के बाद छत या खुले आसमान के नीचे खड़े होना चाहिए. चांदी या तांबे के लोटे में शुद्ध जल, कच्चा दूध, अक्षत, सफेद फूल और मिश्री या शहद मिलाकर दोनों हाथों से मस्तक की ऊंचाई तक उठाकर पतली धार से चंद्रमा को जल अर्पित करें. लोटे को दोनों हाथों से पकड़े और फिर जल को बाहल गिराएं.
पति के हाथों जल पीकर व्रत खोलें
चंद्रमा पूजन के बाद पूजा की सभी विधियां समाप्त होने के बाद सुहागिन महिलाएं अपने पति के हाथों से जल ग्रहण करके निर्जला व्रत खोलती हैं. पति द्वारा जल पिलाने से आपसी रिश्ता ज्यादा मजबूत बनता है और प्रेम बढ़ता है. इसके बाद घर के सभी बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर उनसे अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है. पूरे दिन के कठिन व्रत के बाद इस प्रकार व्रत खोलने से मन में असीम शांति मिलती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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