कर्ज के बोझ के बीच लग्जरी जेट पर बवाल, सवालों में घिरी मरियम नवाज
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लंबे समय से दबाव में है. विदेशी कर्ज़, महंगाई और बजट घाटे के बीच अब पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज एक नए विवाद के केंद्र में हैं. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पंजाब सरकार ने लगभग 10 अरब रुपये की कीमत वाला लग्ज़री Gulfstream G500 विमान खरीदा है. इस खबर के सामने आते ही राजनीतिक हलकों से लेकर आम जनता तक में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
अमेरिकी रजिस्ट्रेशन वाला विमान, कीमत पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकन रजिस्ट्रेशन नंबर N144S वाला यह बिजनेस जेट अभी अमेरिकी रजिस्ट्रेशन पर दर्ज है और उसका पाकिस्तान में ट्रैवल रिकॉर्ड भी सामने आया है. हालांकि, स्थानीय स्तर पर इसकी आधिकारिक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने की पुष्टि नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि इस हाई-एंड विमान की अनुमानित कीमत करीब 10 अरब पाकिस्तानी रुपये है, जिसने वित्तीय प्राथमिकताओं को लेकर बहस छेड़ दी है.
विपक्ष का हमला, सोशल मीडिया पर आलोचना
विपक्षी दलों ने इस संभावित खरीद को 'फिजूलखर्ची' करार दिया है. नेताओं का कहना है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे देश में लग्ज़री जेट खरीदना जनता की भावनाओं के खिलाफ है. सोशल मीडिया पर भी यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जब आम लोग महंगाई और बेरोज़गारी से जूझ रहे हों, तब सरकारी खजाने से महंगे विमान की खरीद क्या उचित है?
आलोचकों का तर्क है कि इसी रकम से स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं को मजबूती दी जा सकती थी. कई यूजर्स ने यह भी लिखा कि 'पब्लिक का पैसा पब्लिक पर खर्च होना चाहिए.'
‘एयर पंजाब’ प्रोजेक्ट से जुड़ा मामला?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब सरकार अपनी नई प्रांतीय एयरलाइन “एयर पंजाब” शुरू करने की तैयारी में है. शुरुआती चरण में सात विमान शामिल करने की योजना की खबरें हैं, और पहली उड़ान अप्रैल में शुरू करने का लक्ष्य बताया जा रहा है. माना जा रहा है कि कथित रूप से खरीदा गया यह विमान उसी व्यापक एविएशन योजना का हिस्सा हो सकता है.
सरकार का बचाव
पंजाब की सूचना मंत्री उज़मा बुख़ारी ने इन दावों पर सफाई देते हुए कहा कि यह खरीद किसी व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं, बल्कि प्रस्तावित एयरलाइन के फ्लीट निर्माण की रणनीति का हिस्सा है. उनके मुताबिक, 'एयर पंजाब के लिए विभिन्न श्रेणियों के विमान शामिल किए जाएंगे. कुछ विमान खरीदे जाएंगे और कुछ लीज़ पर लिए जाएंगे, ताकि संचालन में लचीलापन बना रहे.'
हालांकि, सरकार की इस दलील के बावजूद पारदर्शिता और प्राथमिकताओं को लेकर बहस जारी है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस सौदे से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेगी और क्या 'एयर पंजाब' परियोजना वास्तव में आर्थिक रूप से टिकाऊ साबित हो पाएगी.
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इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए अमेरिकी अवर सचिव जैकब हेलबर्ग
वॉशिंगटन, 20 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए। अमेरिकी विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार हेलबर्ग 20 और 21 फरवरी को भारत के दौरे पर रहेंगे। जैकब व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस के नेतृत्व में अमेरिकी डेलीगेशन के साथ समिट में शामिल हुए।
अमेरिकी विभाग ने बताया कि अवर सचिव द्विपक्षीय मीटिंग में शामिल होंगे और कॉन्फ्रेंस में भाषण देंगे। अपने संबोधन में वह भारत के साथ अमेरिका के आर्थिक संबंध और उभरती टेक्नोलॉजी में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर देंगे और एआई एक्शन प्लान के हिस्से, अमेरिकी एआई एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम के अगले फेज को लॉन्च करने में मदद मिल सके।
इसके अलावा, अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित, हाई-क्वालिटी और सस्ते हैंडहेल्ड स्मार्टफोन डिवाइस के डिप्लॉयमेंट में तेजी लाने के प्रोग्राम का समर्थन करने के लिए 200 मिलियन डॉलर तक की विदेशी मदद देने के लिए एक कॉम्पिटिटिव प्रक्रिया शुरू की है।
एज एआई पैकेज के जरिए, डिपार्टमेंट हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद ऑपरेटिंग सिस्टम (एंड्रॉयड/आईओएस) पर चलने वाले नेक्स्ट-जेनरेशन स्मार्टफोन की कॉम्पिटिटिवनेस को बेहतर बनाने के लिए नए प्रस्ताव चाहता है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र के अगले एक अरब इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को एक खुले, आपस में जुड़ने योग्य (इंटरऑपरेबल) और नवाचार-केंद्रित सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम से जोड़ना है।
यह पहल एआई नवाचार और उद्यमिता से जुड़े डेवलपर टूल्स के माध्यम से लाखों लोगों को सशक्त बनाते हुए, एक समृद्ध और आपस में जुड़े हिंद-प्रशांत के पैक्स सिलिका विजन को गति देती है।
अमेरिकी विभाग ने बताया, यह पहल बाजार आधारित ऐसा विकल्प देती है, जो जोखिम वाले विक्रेताओं पर निर्भरता को कम करता है। इसके बजाय यह बाजार-आधारित विकल्प उपलब्ध कराती है, जिससे गैर-भरोसेमंद प्रोवाइडर्स की मूल्य-हेरफेर की संभावना कम होती है और यह एक विश्वसनीय एआई सॉफ्टवेयर प्रणाली को बढ़ावा देती है।
यह अमेरिकी प्रयासों का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि साझेदार देशों का डिजिटल ढांचा सुरक्षित, स्वायत्त और किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त बना रहे।
--आईएएनएस
केके/एएस
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