दिल्ली में BJP सरकार का 1 साल पूरा, सीएम रेखा गुप्ता में पेश किया रिपोर्ट कार्ड
दिल्ली की भाजपा सरकार ने अपने एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड जारी किया. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीते एक साल के कामकाज और आगे की प्राथमिकताओं को साझा किया. उन्होंने कहा कि यह सरकार 'वादों की नहीं, बल्कि काम की सरकार' है और बीते वर्ष में ठोस नीतिगत फैसलों पर जोर दिया गया.
स्वास्थ्य सुरक्षा पर फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने अपने पहले ही कैबिनेट निर्णय में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी. आयुष्मान योजना के विस्तार के तहत जरूरतमंद परिवारों को 10 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर उपलब्ध कराया गया. उनका कहना था कि इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गंभीर बीमारियों के इलाज में राहत देना है. सरकार का दावा है कि इस पहल से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिला है और निजी अस्पतालों में भी इलाज की पहुंच आसान हुई है.
Live: Hon'ble CM Smt. @gupta_rekha is addressing a Press Conference.#MissionViksitDelhi https://t.co/xgpitDnKfM
— BJP Delhi (@BJP4Delhi) February 20, 2026
‘कोई भूखा न सोए’-अटल कैंटीन पहल
रिपोर्ट कार्ड में ‘अटल कैंटीन’ योजना को भी प्रमुख उपलब्धि बताया गया. मुख्यमंत्री के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य राजधानी में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए. अब तक 70 अटल कैंटीन शुरू की जा चुकी हैं, जहां किफायती दरों पर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. सरकार का दावा है कि यह पहल प्रवासी मजदूरों, रिक्शा चालकों और दैनिक वेतनभोगियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है.
विकास और प्रशासनिक सुधार
सरकार ने यह भी कहा कि उसने 'कागज कम, काम ज्यादा' की नीति अपनाई है. प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, योजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाने और पारदर्शिता पर जोर दिया गया है. आने वाले वर्ष के लिए बुनियादी ढांचे, स्वच्छता और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता में रखा गया है.
एक वर्ष पूरा होने पर जारी यह रिपोर्ट कार्ड राजनीतिक तौर पर भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे सरकार ने अपने कामकाज का सार्वजनिक मूल्यांकन पेश किया है और आगामी योजनाओं का रोडमैप भी स्पष्ट किया है.
कर्ज के बोझ के बीच लग्जरी जेट पर बवाल, सवालों में घिरी मरियम नवाज
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लंबे समय से दबाव में है. विदेशी कर्ज़, महंगाई और बजट घाटे के बीच अब पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज एक नए विवाद के केंद्र में हैं. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पंजाब सरकार ने लगभग 10 अरब रुपये की कीमत वाला लग्ज़री Gulfstream G500 विमान खरीदा है. इस खबर के सामने आते ही राजनीतिक हलकों से लेकर आम जनता तक में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
अमेरिकी रजिस्ट्रेशन वाला विमान, कीमत पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकन रजिस्ट्रेशन नंबर N144S वाला यह बिजनेस जेट अभी अमेरिकी रजिस्ट्रेशन पर दर्ज है और उसका पाकिस्तान में ट्रैवल रिकॉर्ड भी सामने आया है. हालांकि, स्थानीय स्तर पर इसकी आधिकारिक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने की पुष्टि नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि इस हाई-एंड विमान की अनुमानित कीमत करीब 10 अरब पाकिस्तानी रुपये है, जिसने वित्तीय प्राथमिकताओं को लेकर बहस छेड़ दी है.
विपक्ष का हमला, सोशल मीडिया पर आलोचना
विपक्षी दलों ने इस संभावित खरीद को 'फिजूलखर्ची' करार दिया है. नेताओं का कहना है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे देश में लग्ज़री जेट खरीदना जनता की भावनाओं के खिलाफ है. सोशल मीडिया पर भी यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जब आम लोग महंगाई और बेरोज़गारी से जूझ रहे हों, तब सरकारी खजाने से महंगे विमान की खरीद क्या उचित है?
आलोचकों का तर्क है कि इसी रकम से स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं को मजबूती दी जा सकती थी. कई यूजर्स ने यह भी लिखा कि 'पब्लिक का पैसा पब्लिक पर खर्च होना चाहिए.'
‘एयर पंजाब’ प्रोजेक्ट से जुड़ा मामला?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब सरकार अपनी नई प्रांतीय एयरलाइन “एयर पंजाब” शुरू करने की तैयारी में है. शुरुआती चरण में सात विमान शामिल करने की योजना की खबरें हैं, और पहली उड़ान अप्रैल में शुरू करने का लक्ष्य बताया जा रहा है. माना जा रहा है कि कथित रूप से खरीदा गया यह विमान उसी व्यापक एविएशन योजना का हिस्सा हो सकता है.
सरकार का बचाव
पंजाब की सूचना मंत्री उज़मा बुख़ारी ने इन दावों पर सफाई देते हुए कहा कि यह खरीद किसी व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं, बल्कि प्रस्तावित एयरलाइन के फ्लीट निर्माण की रणनीति का हिस्सा है. उनके मुताबिक, 'एयर पंजाब के लिए विभिन्न श्रेणियों के विमान शामिल किए जाएंगे. कुछ विमान खरीदे जाएंगे और कुछ लीज़ पर लिए जाएंगे, ताकि संचालन में लचीलापन बना रहे.'
हालांकि, सरकार की इस दलील के बावजूद पारदर्शिता और प्राथमिकताओं को लेकर बहस जारी है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस सौदे से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेगी और क्या 'एयर पंजाब' परियोजना वास्तव में आर्थिक रूप से टिकाऊ साबित हो पाएगी.
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