संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: पाकिस्तान में 75 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे
इस्लामाबाद, 19 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक नई आकलन रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में करीब 75 लाख लोग गंभीर स्तर की खाद्य असुरक्षा और कुपोषण का सामना कर रहे हैं। बीते वर्ष देश में भारी मानसूनी बाढ़, लंबे सूखे, शुष्क दौर और बढ़ती हिंसा ने हालात को और बिगाड़ दिया है।
एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच लगभग 12.5 लाख लोग ‘आपातकाल’ स्तर की तीव्र खाद्य असुरक्षा की स्थिति में होंगे। इस स्तर पर बड़े पैमाने पर खाद्य कमी और तीव्र कुपोषण देखा जाता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एक मिलियन से अधिक लोगों को संभावित “महाविपत्ति” से बचाने के लिए तत्काल जीवनरक्षक सहायता की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की मानसूनी बाढ़ के अवशेष प्रभाव, सूखा और स्थानीय असुरक्षा ने कृषि और पशुपालन आधारित आजीविका को कमजोर कर दिया है। इससे उत्पादन घटा है, बाजार प्रभावित हुए हैं और लोगों की संकट से निपटने की क्षमता सीमित हुई है।
मौसमी कारणों ने भी संकट को बढ़ाया है। ‘लीन सीजन’ के दौरान खेतिहर मजदूरी और आय के अवसर कम हो जाते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में कड़ाके की सर्दी ने लोगों की आजीविका और खाद्य पहुंच को और प्रभावित किया है।
यूएन के बयान के अनुसार, कमजोर क्रय शक्ति, बाजार पर निर्भरता, कीमतों में अस्थिरता और बढ़ते कर्ज के कारण कई इलाकों में लोगों की खाद्य पहुंच प्रभावित हुई है। खासतौर पर लीन सीजन में गेहूं के आटे की उपलब्धता और कीमत चिंता का विषय बनी हुई है।
पिछले महीने जारी एक सर्वेक्षण में बताया गया था कि पाकिस्तान में लोग भोजन और शिक्षा दोनों का खर्च वहन करने में संघर्ष कर रहे हैं। गैलप पाकिस्तान द्वारा जारी एक नए विश्लेषण में सामने आया कि बीते 20 वर्षों में घरेलू खर्च का बड़ा हिस्सा खाद्य पदार्थों के बजाय जीवन-यापन की निश्चित लागतों पर जाने लगा है।
घरेलू एकीकृत आर्थिक सर्वेक्षण (एचआईईएस) के आंकड़ों के अनुसार, 2005 से 2025 के बीच परिवारों द्वारा भोजन पर खर्च का हिस्सा 43 प्रतिशत से घटकर 37 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में आवास और उपयोगिताओं पर खर्च 15 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच गया।
विश्लेषण में कहा गया है कि वास्तविक आय में गिरावट और भोजन की मात्रा में कमी के संकेतों को देखते हुए यह प्रवृत्ति इस बात को दर्शाती है कि परिवार बढ़ते स्थायी खर्चों जैसे मकान और बिजली-पानी को संभालने के लिए भोजन पर कटौती कर रहे हैं, न कि भोजन सस्ता हुआ है।
एचआईईएस 2024-25 सर्वेक्षण के अनुसार, 2018-19 से 2024-25 के बीच मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा झेलने वाले लोगों की संख्या हर छह में एक से बढ़कर हर चार में एक हो गई है। इससे वर्तमान में जीवन-यापन कठिन हो गया है और भविष्य की संभावनाएं भी चिंताजनक नजर आती हैं।
इसी बीच, सामाजिक और नीति विज्ञान संस्थान (आई-एसएपी) की 15वीं वार्षिक रिपोर्ट ‘पब्लिक फाइनेंसिंग ऑफ एजुकेशन’ के अनुसार, देश में पहली बार शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च का बड़ा हिस्सा परिवारों द्वारा वहन किया जा रहा है। 5.03 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये की कुल शिक्षा लागत में से 2.8 ट्रिलियन रुपये परिवारों द्वारा खर्च किए जा रहे हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र 2.23 ट्रिलियन रुपये का योगदान दे रहा है।
घरेलू खर्च में 1.31 ट्रिलियन रुपये निजी स्कूल फीस, 613 अरब रुपये ट्यूशन और कोचिंग तथा 878 अरब रुपये अन्य खर्चों पर जा रहे हैं। सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता को लेकर चिंताओं के बीच निजी शिक्षा की ओर झुकाव बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में लगभग दो करोड़ बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो शिक्षा और भोजन दोनों के क्षेत्र में असमानता और गहराती जाएगी।
--आईएएनएस
डीएससी
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Uttarakhand News: उत्तराखंड ने पार किया 1 गीगावाट सौर ऊर्जा का आंकड़ा, हरित ऊर्जा में बड़ी छलांग
Uttarakhand News: उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 1 गीगावाट से अधिक कर ली है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 1027.87 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है. इसे स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
सीएम धामी ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” और हरित ऊर्जा के विजन से प्रेरित होकर राज्य में सौर ऊर्जा को जनआंदोलन का रूप दिया गया है. केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर तालमेल से युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी बने हैं.
कई योजनाओं की अहम भूमिका
राज्य में सौर क्षमता बढ़ाने में कई योजनाओं की अहम भूमिका रही है. इनमें ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट से 397 मेगावाट, रूफटॉप सोलर (पीएम सूर्यघर योजना) से 241 मेगावाट और मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से 137 मेगावाट की क्षमता स्थापित की गई है. इसके अलावा कॉमर्शियल नेट मीटरिंग से 110 मेगावाट, कैप्टिव सोलर प्लांट से 51 मेगावाट, कनाल टॉप और कनाल बैंक प्रोजेक्ट से 37 मेगावाट तथा सरकारी भवनों पर 26 मेगावाट क्षमता के संयंत्र लगाए गए हैं.
नए संयंत्र किए जा रहे स्थापित
वर्तमान में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 100 मेगावाट से अधिक क्षमता के नए संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं. साथ ही कैप्टिव सोलर और सरकारी भवनों पर भी अतिरिक्त क्षमता विकसित की जा रही है. इस उपलब्धि में Uttarakhand Renewable Energy Development Agency (UREDA) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. एजेंसी ने दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक सौर परियोजनाएं पहुंचाने, तकनीकी मार्गदर्शन देने और जन-जागरूकता बढ़ाने का काम किया है.
आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने भविष्य में सौर ऊर्जा क्षमता को और बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया है. यह उपलब्धि ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है.
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