कड़ाके की सर्दी और बेमौसम बारिश की मार, जानें कैसा रहेगा आपके प्रदेश का हाल
देश के कई हिस्सों में मौसम ने करवट ली है. बीते 24 घंटों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम ने अलग-अलग रूप दिखाए. पंजाब और त्रिपुरा में घना कोहरा छाया रहा, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ. खासतौर पर अमृतसर में दृश्यता 100 मीटर से भी कम दर्ज की गई, जिससे सड़क और रेल यातायात पर असर पड़ा. वाहन चालकों को हेडलाइट्स का सहारा लेकर धीरे-धीरे सफर करना पड़ा. वहीं हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में ओलों के साथ बारिश हुई.
इससे फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है. कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी भी देखी गई. मैदानी इलाकों में अमृतसर 8.7°C के साथ सबसे ठंडा स्थान रहा. दूसरी ओर पुनालुर में अधिकतम तापमान 36.2°C दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक रहा.
भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि बंगाल की खाड़ी में बने दबाव के कारण कई क्षेत्रों में तेज बारिश हो सकती है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आज भारी वर्षा की संभावना जताई गई है. वहीं केरल और तमिलनाडु में 21 और 22 फरवरी को बिजली कड़कने और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है. प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 22 से 24 फरवरी के बीच बर्फबारी या हल्की बारिश के आसार हैं.
इससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है. मध्य भारत में भी मौसम करवट ले सकता है. मध्य प्रदेश में आज बारिश की संभावना है, जबकि ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 23 और 24 फरवरी को मौसम खराब रह सकता है.
उत्तर भारत में बढ़ेगा तापमान
उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में अब ठंड धीरे-धीरे विदा होती नजर आ रही है. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अगले सात दिनों के दौरान दिन के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है. वहीं रात के तापमान में भी 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी का अनुमान है. गुजरात और महाराष्ट्र में भी गर्मी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिमी हवाओं की तीव्रता कम होगी, जिससे तापमान में क्रमिक बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी.
मछुआरों के लिए चेतावनी
मौसम विभाग ने मछुआरों को 19 से 24 फरवरी के दौरान समुद्र में न जाने की सलाह दी है. विशेष रूप से श्रीलंका तट और अंडमान सागर के आसपास समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं. हालांकि अरब सागर की ओर जाने वाले मछुआरों के लिए फिलहाल कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है. प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं.
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संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: पाकिस्तान में 75 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे
इस्लामाबाद, 19 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक नई आकलन रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में करीब 75 लाख लोग गंभीर स्तर की खाद्य असुरक्षा और कुपोषण का सामना कर रहे हैं। बीते वर्ष देश में भारी मानसूनी बाढ़, लंबे सूखे, शुष्क दौर और बढ़ती हिंसा ने हालात को और बिगाड़ दिया है।
एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच लगभग 12.5 लाख लोग ‘आपातकाल’ स्तर की तीव्र खाद्य असुरक्षा की स्थिति में होंगे। इस स्तर पर बड़े पैमाने पर खाद्य कमी और तीव्र कुपोषण देखा जाता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एक मिलियन से अधिक लोगों को संभावित “महाविपत्ति” से बचाने के लिए तत्काल जीवनरक्षक सहायता की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की मानसूनी बाढ़ के अवशेष प्रभाव, सूखा और स्थानीय असुरक्षा ने कृषि और पशुपालन आधारित आजीविका को कमजोर कर दिया है। इससे उत्पादन घटा है, बाजार प्रभावित हुए हैं और लोगों की संकट से निपटने की क्षमता सीमित हुई है।
मौसमी कारणों ने भी संकट को बढ़ाया है। ‘लीन सीजन’ के दौरान खेतिहर मजदूरी और आय के अवसर कम हो जाते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में कड़ाके की सर्दी ने लोगों की आजीविका और खाद्य पहुंच को और प्रभावित किया है।
यूएन के बयान के अनुसार, कमजोर क्रय शक्ति, बाजार पर निर्भरता, कीमतों में अस्थिरता और बढ़ते कर्ज के कारण कई इलाकों में लोगों की खाद्य पहुंच प्रभावित हुई है। खासतौर पर लीन सीजन में गेहूं के आटे की उपलब्धता और कीमत चिंता का विषय बनी हुई है।
पिछले महीने जारी एक सर्वेक्षण में बताया गया था कि पाकिस्तान में लोग भोजन और शिक्षा दोनों का खर्च वहन करने में संघर्ष कर रहे हैं। गैलप पाकिस्तान द्वारा जारी एक नए विश्लेषण में सामने आया कि बीते 20 वर्षों में घरेलू खर्च का बड़ा हिस्सा खाद्य पदार्थों के बजाय जीवन-यापन की निश्चित लागतों पर जाने लगा है।
घरेलू एकीकृत आर्थिक सर्वेक्षण (एचआईईएस) के आंकड़ों के अनुसार, 2005 से 2025 के बीच परिवारों द्वारा भोजन पर खर्च का हिस्सा 43 प्रतिशत से घटकर 37 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में आवास और उपयोगिताओं पर खर्च 15 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच गया।
विश्लेषण में कहा गया है कि वास्तविक आय में गिरावट और भोजन की मात्रा में कमी के संकेतों को देखते हुए यह प्रवृत्ति इस बात को दर्शाती है कि परिवार बढ़ते स्थायी खर्चों जैसे मकान और बिजली-पानी को संभालने के लिए भोजन पर कटौती कर रहे हैं, न कि भोजन सस्ता हुआ है।
एचआईईएस 2024-25 सर्वेक्षण के अनुसार, 2018-19 से 2024-25 के बीच मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा झेलने वाले लोगों की संख्या हर छह में एक से बढ़कर हर चार में एक हो गई है। इससे वर्तमान में जीवन-यापन कठिन हो गया है और भविष्य की संभावनाएं भी चिंताजनक नजर आती हैं।
इसी बीच, सामाजिक और नीति विज्ञान संस्थान (आई-एसएपी) की 15वीं वार्षिक रिपोर्ट ‘पब्लिक फाइनेंसिंग ऑफ एजुकेशन’ के अनुसार, देश में पहली बार शिक्षा पर होने वाले कुल खर्च का बड़ा हिस्सा परिवारों द्वारा वहन किया जा रहा है। 5.03 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये की कुल शिक्षा लागत में से 2.8 ट्रिलियन रुपये परिवारों द्वारा खर्च किए जा रहे हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र 2.23 ट्रिलियन रुपये का योगदान दे रहा है।
घरेलू खर्च में 1.31 ट्रिलियन रुपये निजी स्कूल फीस, 613 अरब रुपये ट्यूशन और कोचिंग तथा 878 अरब रुपये अन्य खर्चों पर जा रहे हैं। सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता को लेकर चिंताओं के बीच निजी शिक्षा की ओर झुकाव बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में लगभग दो करोड़ बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो शिक्षा और भोजन दोनों के क्षेत्र में असमानता और गहराती जाएगी।
--आईएएनएस
डीएससी
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