मैक्रों की तीन दिवसीय यात्रा संपन्न, एआई समिट में भारत की डिजिटल क्रांति को सराहा
नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति तीन दिवसीय भारत यात्रा संपन्न कर रवाना हो गए। रवानगी से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मैक्रों ने गुरुवार को इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लिया था।
एआई समिट के दौरान पीएम मोदी ने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और राष्ट्रीय प्रमुखों से द्विपक्षीय वार्ता की। फ्रांस के राष्ट्रपति से भी उनकी मुलाकात काफी सुर्खियों में रही।
17 से 19 फरवरी तक मैक्रों के आधिकारिक दौरे के दौरान, दोनों नेताओं ने होराइजन 2047 रोडमैप के तहत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की।
उन्होंने इंडो-पैसिफिक सहयोग सहित आपसी फायदे के दूसरे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत की। दोनों नेताओं ने मुंबई में इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का मिलकर उद्घाटन किया।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति का दौरा फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी के फ्रांस दौरे के बाद हुआ। ये दौरे दोनों देशों के बीच मौजूद स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के आपसी भरोसे और गहराई को दर्शाते हैं।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने गुरुवार शाम को दिल्ली एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति मैक्रों को विदा किया।
सिंह ने एक्स पोस्ट में कहा, उनके सफल दौरे के दौरान, हमारे आपसी रिश्ते स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़े। ये रक्षा, जरूरी मिनरल्स, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट एक्शन, हेल्थ, एजुकेशन और इकोनॉमिक सिक्योरिटी में हमारे आपसी सहयोग को और बढ़ावा देने वाला रहा। एआई इम्पैक्ट समिट में उनकी भागीदारी और व्यावहारिक जुड़ाव ने नई टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और एआई के जिम्मेदार उपयोग के प्रति भारत-फ्रांस सहयोग को महत्वपूर्ण गति प्रदान की है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक, होराइजन 2047 की प्रगति से लेकर मानव केंद्रित एआई के उपयोग, समावेशी विकास से लेकर स्थिर भविष्य को लेकर 20 से अधिक समझौतों तक...फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे ने दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को काफी विस्तार दिया।
--आईएएनएस
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AI की मदद से अफसरों ने पकड़ी बड़ी टैक्स चोरी, हैदराबादी बिरयानी बेच रहे थे रेस्टोरेंट्स
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने आयकर विभाग को फूड इंडस्ट्री में चल रहे एक बड़े टैक्स चोरी नेटवर्क का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई है. जांच की शुरुआत हैदराबाद की चर्चित बिरयानी चेन से हुई, जहां बिलिंग सिस्टम में गड़बड़ियों के संकेत मिले. गहन विश्लेषण के बाद विभाग को पता चला कि रेस्टॉरेंट्स के पॉइंट ऑफ सेल (POS) सिस्टम में सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ की जा रही थी.
70,000 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाने का अंदेशा
वित्त वर्ष 2019-20 से अब तक देशभर में करीब 70,000 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाए जाने का अनुमान है. यह खुलासा आयकर विभाग की हैदराबाद जांच इकाई ने एआई टूल्स और फॉरेंसिक डेटा एनालिटिक्स के जरिए किया. अरबों बिलों के डेटा को स्कैन कर ऐसे पैटर्न तलाशे गए, जिन्हें पारंपरिक जांच तरीकों से पकड़ पाना बेहद मुश्किल था.
60 टेराबाइट डेटा की गहन जांच
जांच के दौरान लगभग 60 टेराबाइट बिलिंग डेटा की पड़ताल की गई. यह डेटा देशभर के करीब 1.7 लाख रेस्टॉरेंट आईडी से जुड़ा था. आम तौर पर रेस्टॉरेंट्स कार्ड, यूपीआई और नकद भुगतान सहित सभी लेनदेन एक ही सॉफ्टवेयर में दर्ज करते हैं, ताकि आंतरिक गड़बड़ियों को रोका जा सके. लेकिन जांच में सामने आया कि इसी सिस्टम का इस्तेमाल राजस्व छिपाने के लिए किया जा रहा था.
कैसे काम करता था यह फ्रॉड मॉडल
जांच में कई चौंकाने वाले पैटर्न सामने आए. एक प्रमुख तरीका यह था कि नकद लेनदेन से जुड़े कई इनवॉइस सिस्टम से डिलीट कर दिए जाते थे. कुछ मामलों में कैश एंट्री का केवल एक हिस्सा रिकॉर्ड में रखा जाता था और शेष को मिटा दिया जाता था, जिससे आयकर और जीएसटी देनदारी कम दिखाई दे.
इसके अलावा, बड़ी संख्या में एक साथ बिल डिलीट करने के मामले भी पाए गए. यह संकेत देता है कि सॉफ्टवेयर में जानबूझकर ऐसी सुविधा या बैकडोर मौजूद था, जिसका इस्तेमाल टैक्स देनदारी घटाने के लिए किया गया.
जांच का दायरा हुआ राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित
प्रारंभिक छापेमारी हैदराबाद, विशाखापत्तनम और तेलंगाना-आंध्र प्रदेश के अन्य शहरों में की गई थी. बाद में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने जांच को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित कर दिया. अधिकारियों का मानना है कि अब तक सामने आए मामले इस संभावित घोटाले का केवल एक हिस्सा हो सकते हैं.
एआई आधारित विश्लेषण ने साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में तकनीक न सिर्फ व्यापार को आसान बनाती है, बल्कि राजस्व सुरक्षा के लिए भी एक शक्तिशाली हथियार बन सकती है.
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