एक तरफ अमेरिका ने ईरान का घेराव कर लिया है। युद्धपोत को समंदर में उतार दिए हैं। कई यहां पर सैन्य गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। तो वहीं दूसरी तरफ भारत में अचानक 70 देशों के जंगी जहाज आ पहुंचे हैं। जिसने पूरी दुनिया में इस वक्त खतरनाक तहलका मचा दिया है। यह 70 जंगी जहाज अमेरिका, रूस, जापान और ऑस्ट्रेलिया और तमाम देशों से विशाखापट्टनम पहुंच चुके हैं। बता दें कि इस बार 4 मार्च को होली है। कहते हैं होली में दुश्मन भी गले मिल जाते हैं और भारत में होली से पहले ऐसा ही एक मिलन होने जा रहा है। दुनिया के दो परंपरागत प्रतिविधि अमेरिका और रूस दोनों की नौसेनाएं भारत के विशाखापट्टनम के समंदर में मौजूद है। यानी भारत एक ऐसा मंच बन चुका है जहां वैश्विक ताकतें आपसी मतभेद के बावजूद एक साथ खड़ी हो सकती है और यह एक कूटनीति का एक जरिया भी है जिस पर भारत पर जो दूसरे देश हैं वह भरोसा करते हैं कि अगर कूटनीति करनी है तो भारत जाना होगा।
बता दें कि तीन बड़े इवेंट हो रहे हैं। एक बड़ा संदेश यहां जमावड़ा सिर्फ अभ्यास नहीं है। यह तीन बड़े नौसैनिक आयोजनों का संगम है। पहला इंटरनेशनल फ्लट रिव्यू यानी कि आईएफआर 2026 इसके बाद एक्सरसाइज मिलन 2026 और इसके बाद आईओएस कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स। 15 फरवरी से 24 फरवरी तक चलने वाले इस मेगा इवेंट में 72 कंट्रीज के 60 से ज्यादा युद्धपोत हिस्सा लेने के लिए आ पहुंचे हैं। मिलन 2026 का औपचारिक उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापटनम में किया। वहीं बता दें कि यह आयोजन भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान के मुख्यालय विशाखापटनम में हो रहा है और इसकी कई सारी तस्वीरें और वीडियोस इस वक्त जमकर सोशल मीडिया पर वायरल है। इस इंटरनेशनल फ्लट रिव्यू में भारत ने अपना 76% स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएएस विक्रांत भी उतार दिया है। जिसके वीडियो सामने आते ही खतरनाक भूचाल भी आ गया है।
इसके साथ ही स्वदेशी फ्रिगेट, विध्वंसक पोत, स्टील जहाज, पनडुपी रोधी कॉरवेट और सबमरीन भी प्रदर्शन यहां पर जमकर कर रहे हैं। यह सिर्फ ताकत दिखाना नहीं। यह संदेश है कि भारतीय नौसेना का बजट अब घरेलू निर्माण और समुद्री आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। हिंद महासागर और यह मिलन एक्सरसाइज? बता दें कि भारत का 11,000 से भी ज़्यादा का किलोमीटर लंबा जो तटीय इलाका है, उसमें 1300 से ज़्यादा द्वीप है। अंडमान निकोबार से लेकर लक्ष्यद्वीप तक यह है। 95% भारत का व्यापार समुद्री रास्तों से गुजरता है। वैल्यू के हिसाब से 70% से भी ज्यादा है यह।
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने गुरुवार को भारत के साथ रक्षा सहयोग को गहरा करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों की योजना राफेल जेट कार्यक्रम का विस्तार करना है, जिसमें भारत में सह-उत्पादन और मेक इन इंडिया भविष्य के ऑर्डरों का मुख्य आधार बनेंगे।
मैक्रों ने 'मेड इन इंडिया' राफेल पर बात की
भारत एआई शिखर सम्मेलन के दौरान मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए मैक्रॉन ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक "विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी" है जो पारंपरिक रक्षा संबंधों से कहीं आगे जाती है। उन्होंने पुष्टि की कि भारत ने हाल ही में राफेल विमानों के लिए एक नया ऑर्डर देने और इस प्लेटफॉर्म से संबंधित औद्योगिक सहयोग को और गहरा करने की इच्छा व्यक्त की है। मैक्रों कहा कि राफेल के संबंध में, हम विस्तार करना चाहते हैं। भारत ने कुछ दिन पहले राफेल 114 के नए बैच का ऑर्डर देने और सह-उत्पादन करने की इच्छा की पुष्टि की है। 'मेक इन इंडिया' इस नए ऑर्डर का मूल आधार होगा।" उन्होंने इस कदम को एक नया कदम बताया जो मौजूदा सहयोग को मजबूत करते हुए इसे और आगे ले जाता है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने रखरखाव और संरक्षा में सहयोग को मजबूत करने की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला, जिसमें विविध रखरखाव क्षमताएं और दोनों पक्षों के बीच घनिष्ठ, दीर्घकालिक औद्योगिक समझौते शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, राफेल बेहद महत्वपूर्ण है। मैक्रों ने कहा कि पनडुब्बियों सहित अन्य प्रमुख रक्षा क्षेत्रों में भी सहयोग के समान मॉडल तलाशे जा सकते हैं, और उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग के एक नए युग के निर्माण के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में एयरोस्पेस साझेदारी के विस्तार की ओर इशारा किया।
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